अतिक्रमण की भेंट चढ़ा विमल कुंड सौंदर्याकरण, 2 करोड़ की विकास राशि लैप्स होने का खतरा
परिक्रमा मार्ग से अतिक्रमण नहीं हटने पर रुके निर्माण कार्य, स्थानीय नागरिकों और संतों में रोष
हिमांशु मोदी की रिपोर्ट
Kamwan विमल कुंड में प्रस्तावित सौंदर्याकरण और विकास कार्य स्थानीय प्रशासन की लापरवाही तथा अतिक्रमणों के कारण अधर में लटक गए हैं। धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस ऐतिहासिक कुंड के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत करीब 2 करोड़ रुपये की राशि अब लैप्स होने के कगार पर पहुंच गई है। परिक्रमा मार्ग पर प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए स्थाई और अस्थाई अतिक्रमणों के चलते न केवल सौंदर्याकरण कार्य प्रभावित हुआ है, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं भी रुक गई हैं।
स्थानीय नागरिकों, साधु-संतों और श्रद्धालुओं में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही अतिक्रमण नहीं हटाए गए तो धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की सरकारी योजना पूरी तरह विफल हो जाएगी और कामां की धार्मिक पहचान को भी नुकसान पहुंचेगा।
परिक्रमा मार्ग पर अतिक्रमण बना सबसे बड़ी बाधा
बताया जा रहा है कि तीर्थराज विमल कुंड के बाहरी परिक्रमा मार्ग पर वर्षों से स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण बने हुए हैं। इन्हीं अतिक्रमणों के कारण सात मीटर चौड़ी सीसी सड़क, इंटरलॉकिंग टाइल्स, पैदल यात्रियों के लिए पद मार्ग और अन्य निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं।
राज्य सरकार ने बजट घोषणा 2025-26 में ब्रज भूमि कामवन क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विमल कुंड के सौंदर्याकरण और श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं के विकास हेतु लगभग 2 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की थी। इस परियोजना का जिम्मा पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंपा गया था।
पीडब्ल्यूडी विभाग ने 29 जनवरी को भरतपुर की आशु इंटरप्राइजेज को कार्यादेश जारी कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया था। प्रारंभिक चरण में विमल कुंड की बाहरी परिक्रमा मार्ग पर सुलभ शौचालय का निर्माण भी शुरू कर दिया गया, लेकिन अतिक्रमण हटाने में प्रशासन की निष्क्रियता के कारण यह कार्य बीच में ही रोकना पड़ा।
इन विकास कार्यों पर लगा ब्रेक
विमल कुंड परियोजना के तहत श्रद्धालुओं और ब्रज यात्रियों के लिए कई महत्वपूर्ण सुविधाएं विकसित की जानी थीं। इनमें प्रवेश द्वार का निर्माण, परिक्रमा मार्ग पर सुलभ शौचालय, छाया और पेयजल की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के बैठने के लिए सीमेंट की कुर्सियां, सात मीटर चौड़ी सीसी सड़क, नाली निर्माण, इंटरलॉकिंग टाइल्स, बाउंड्री वॉल और कुंड के चारों घाटों की मरम्मत व रंग-रोगन जैसे कार्य शामिल हैं।
लेकिन अतिक्रमण नहीं हटने के कारण अधिकांश निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो पाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और धार्मिक स्थलों के विकास की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित होती दिखाई दे रही हैं।
गोपाल कुंड और धर्मराज कुंड की स्थिति भी चिंताजनक
केवल विमल कुंड ही नहीं बल्कि गोपाल कुंड और धर्मराज कुंड की स्थिति भी कम गंभीर नहीं है। इन दोनों धार्मिक स्थलों पर भी सौंदर्याकरण और विकास कार्य प्रस्तावित हैं, लेकिन वहां भी अतिक्रमण बड़ी बाधा बना हुआ है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो कामां क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाएं पूरी तरह प्रभावित हो जाएंगी। इससे श्रद्धालुओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ेगा और क्षेत्रीय विकास पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
संत समाज और नागरिकों ने जिला कलेक्टर से लगाई गुहार
विमल कुंड के साधु-संतों और स्थानीय नागरिकों ने डीग जिला कलेक्टर से मांग की है कि प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए स्थाई और अस्थाई अतिक्रमणों को तत्काल हटाया जाए ताकि रुका हुआ सौंदर्याकरण कार्य दोबारा शुरू हो सके।
लोगों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण धार्मिक स्थल बदहाल हो रहे हैं। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत करोड़ों रुपये की राशि भी व्यर्थ चली जाएगी।
पीडब्ल्यूडी ने भी प्रशासन को कराया अवगत
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन सौरभ खंडेलवाल ने बताया कि अतिक्रमण हटाने को लेकर 24 अप्रैल को नगरपालिका ईओ को अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटने के बाद ही अन्य निर्माण कार्य समय पर पूरे कराए जा सकेंगे।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो सकती है और स्वीकृत बजट भी लैप्स होने की आशंका बढ़ जाएगी।
धार्मिक पर्यटन पर पड़ सकता है बड़ा असर
ब्रज क्षेत्र का कामां कस्बा धार्मिक आस्था और पर्यटन की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में विमल कुंड और अन्य धार्मिक स्थलों का सौंदर्याकरण क्षेत्रीय पर्यटन को नई पहचान दे सकता था, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह सपना अधूरा नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र अतिक्रमण नहीं हटाए गए तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। नागरिकों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा और विकास कार्यों को बचाने के लिए प्रशासन को तत्काल सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
विमल कुंड सौंदर्याकरण: जरूरी सवाल-जवाब
विमल कुंड का सौंदर्याकरण कार्य क्यों रुका हुआ है?
परिक्रमा मार्ग पर स्थाई और अस्थाई अतिक्रमणों के कारण सीसी सड़क, इंटरलॉकिंग टाइल्स और अन्य निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
इस परियोजना के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है?
राज्य सरकार ने बजट घोषणा 2025-26 में करीब 2 करोड़ रुपये की राशि विमल कुंड सौंदर्याकरण और मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए स्वीकृत की है।
कौन-कौन से विकास कार्य प्रस्तावित हैं?
सुलभ शौचालय, छाया-पानी की व्यवस्था, बैठने की कुर्सियां, सात मीटर चौड़ी सीसी सड़क, नाली निर्माण, इंटरलॉकिंग टाइल्स, बाउंड्री वॉल और घाटों की मरम्मत जैसे कार्य प्रस्तावित हैं।
स्थानीय लोगों की मांग क्या है?
स्थानीय नागरिकों और संत समाज ने डीग जिला कलेक्टर से अतिक्रमण हटवाकर सौंदर्याकरण कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की है।
यदि अतिक्रमण नहीं हटे तो क्या नुकसान होगा?
विकास कार्य अधर में लटक सकते हैं, स्वीकृत राशि लैप्स होने का खतरा बढ़ सकता है और कामां के धार्मिक पर्यटन को नुकसान पहुंच सकता है।











