साहित्य समीक्षा
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समीक्षा
‘का करूँ सजनी, आए न बालम’ : विरह-शृंगार की अमर अभिव्यक्ति और भारतीय साहित्य की संवेदनात्मक परंपरा
यह साहित्यिक विवेचना लेखक अनिल अनूप द्वारा एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम में प्रस्तुत विचारों की भावात्मक पुनर्संरचना है। इसमें…
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समीक्षा
“कवितांजलि” : संवेदनाओं, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों का सजग काव्य-दर्पण
समीक्षक : अनिल अनूप हिंदी साहित्य की समकालीन काव्यधारा में जब संवेदनाओं का क्षरण, सामाजिक विघटन और मानवीय मूल्यों का…
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