भोजपुरी
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जिले की चिट्ठी
जिले की चिट्ठी ; सरयू बहती रही… सवाल ठहरे रहे, खेत हरे हैं… मगर आँखें अब भी नम हैं
— इरफान अली लारी आदरणीय संपादक साहब, आदाब! आज यह चिट्ठी मैं उस ज़मीन से लिख रहा हूँ, जहाँ सूरज…
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— इरफान अली लारी आदरणीय संपादक साहब, आदाब! आज यह चिट्ठी मैं उस ज़मीन से लिख रहा हूँ, जहाँ सूरज…
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