250 ग्राम सोना हड़पने का आरोप: शंख एयरलाइंस के संस्थापक सरवन कुमार के खिलाफ कोर्ट का बड़ा आदेश
ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
उन्नाव। ऑटो चालक से लेकर एयरलाइंस कंपनी के संस्थापक बनने तक का सफर तय करने वाले सरवन कुमार उर्फ श्रवण कुमार एक पुराने विवाद को लेकर कानूनी मुश्किलों में घिरते दिखाई दे रहे हैं। उन्नाव के रहने वाले एक व्यक्ति ने उन पर करीब 250 ग्राम सोने के आभूषण हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने विश्वास के आधार पर अपने सोने के आभूषण सरवन कुमार को गोल्ड लोन दिलाने के लिए सौंपे थे, लेकिन न तो लोन मिला और न ही उसके आभूषण वापस किए गए।
पुलिस और उच्च अधिकारियों से न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए पीड़ित ने अदालत की शरण ली। मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) ने इसे परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत का कहना है कि शिकायतकर्ता के पास आरोपितों का पूरा विवरण और साक्ष्य उपलब्ध हैं, इसलिए पुलिस जांच से कोई नया तथ्य सामने आने की संभावना नहीं दिखाई देती।
गोल्ड लोन दिलाने का दिया था भरोसा
सदर क्षेत्र के मोहल्ला कलक्टरगंज निवासी सतीश कुमार ने अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र में बताया कि वर्ष 2017 में सरवन कुमार उनके ही मोहल्ले में रहते थे और उस समय प्लॉटिंग का काम किया करते थे। सतीश के अनुसार उस दौरान उनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। इस बात की जानकारी होने पर सरवन कुमार ने उन्हें गोल्ड लोन दिलाने का प्रस्ताव दिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सरवन कुमार उन्हें कानपुर के नयागंज स्थित सर्राफा बाजार में एक ज्वैलर्स के पास ले गए। वहां उनके करीब 250 ग्राम सोने के आभूषणों का मूल्यांकन किया गया और लगभग 14 लाख रुपये का गोल्ड लोन मिलने की बात कही गई। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनसे बैंक खाते का विवरण लिया गया और आश्वासन दिया गया कि 24 घंटे के भीतर पूरी धनराशि उनके खाते में पहुंच जाएगी।
रुपये नहीं मिले, दिए गए दो चेक भी बाउंस हुए
सतीश कुमार का कहना है कि तय समय के बाद भी उनके खाते में कोई धनराशि नहीं आई। जब उन्होंने सरवन कुमार से संपर्क किया तो उन्होंने अपनी मां सुशीला के साथ मिलकर उन्हें 7.70 लाख रुपये के दो चेक दिए। साथ ही कहा कि ज्वैलर्स से भुगतान लेकर मामला निपटा दिया जाएगा।
हालांकि, जब शिकायतकर्ता ने दोनों चेक बैंक में जमा किए तो वे क्लियर नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने कई बार सरवन कुमार से अपने सोने के आभूषण वापस करने की मांग की, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने पुलिस में शिकायत करने की बात कही तो सरवन कुमार अपने परिवार के साथ वहां से चले गए और उनसे संपर्क टूट गया।
परिवार पर भी पड़ा गहरा असर
सतीश कुमार ने अदालत को बताया कि इस पूरे घटनाक्रम का उनके परिवार पर गंभीर मानसिक और आर्थिक प्रभाव पड़ा। उनके अनुसार लगातार तनाव और आर्थिक नुकसान की वजह से उनके पिता को गहरा सदमा लगा, जिसके बाद 1 जनवरी 2019 को उनका निधन हो गया।
उन्होंने यह भी कहा कि इस विवाद के कारण वह स्वयं भी गंभीर रूप से बीमार हो गए और उन्हें ओपन हार्ट सर्जरी तक करानी पड़ी। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्होंने दोबारा न्याय के लिए प्रयास शुरू किए।
पुलिस से लेकर एसपी तक लगाई गुहार
शिकायतकर्ता ने बताया कि स्वस्थ होने के बाद उन्होंने 19 सितंबर 2025 को सदर कोतवाली में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद 29 दिसंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक को डाक के माध्यम से विस्तृत प्रार्थना पत्र भेजा गया, फिर भी उन्हें राहत नहीं मिली।
जब पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और पूरे मामले को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।
कोर्ट ने परिवाद दर्ज करने का दिया आदेश
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) अंकिता शुक्ला की अदालत में हुई। न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों और शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र का अवलोकन करने के बाद कहा कि शिकायतकर्ता आरोपितों के नाम, पते और पूरे घटनाक्रम से भली-भांति परिचित है। उसके पास आवश्यक साक्ष्यों की भी जानकारी है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे में पुलिस जांच से किसी नए तथ्य के सामने आने की संभावना कम दिखाई देती है। इसी आधार पर न्यायालय ने मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया।
पड़ोसियों ने बताया संघर्ष से सफलता तक का सफर
सरवन कुमार के पुराने पड़ोसियों के अनुसार उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत लोडर चलाने से की थी। बाद में वह प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार से जुड़े और प्लॉटों की खरीद-बिक्री के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत हुए।
बताया जाता है कि वर्ष 2016 में नोटबंदी के दौरान उन्होंने अपने परिवार के साथ उन्नाव छोड़ दिया और पहले कानपुर के लाटूश रोड क्षेत्र में रहने लगे। इसके कुछ समय बाद उनका परिवार लखनऊ के गोमती नगर एक्सटेंशन में शिफ्ट हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जनवरी 2026 में उन्हें जानकारी मिली कि सरवन कुमार अब एक एयरलाइंस कंपनी के संस्थापक बन चुके हैं। उनकी इस सफलता की चर्चा पूरे क्षेत्र में हुई, लेकिन अब पुराने विवाद के सामने आने से मामला फिर सुर्खियों में है।
सरवन कुमार ने आरोपों को बताया निराधार
इस पूरे मामले में सरवन कुमार ने शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और तथ्यहीन हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में वह उन्नाव में मौजूद ही नहीं थे, इसलिए शिकायतकर्ता के आरोप वास्तविकता से परे हैं। सरवन कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी विधिक टीम पूरे मामले का अध्ययन करेगी और कानून के अनुसार अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखेगी।
अदालती प्रक्रिया पर रहेगी नजर
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद मामला परिवाद के रूप में दर्ज हो चुका है और आगे की कानूनी कार्यवाही न्यायालय की निगरानी में होगी। अब दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और तर्क अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। मामले की वास्तविक स्थिति और आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल यह मामला उन्नाव समेत प्रदेश के कई जिलों में चर्चा का विषय बना हुआ है।









