खास बात

उद्घाटन से पहले एक्सप्रेसवे पर सियासी घमासान, धंसने के आरोपों पर आमने-सामने आए सपा और भाजपा

दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से ठीक पहले इस परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि हजारों करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का उद्घाटन पहले ही हो चुका है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने इन समर्थकों को पूरी तरह से निराधार नियुक्त किया है, इसे राजनीतिक संकटा करार दिया है। वहीं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएच थिएटर) ने भी स्पष्ट किया है कि एक्सप्रेसवे का कोई हिस्सा नहीं है और सोशल मीडिया पर वायरल चित्रों को चित्रित तरीके से पेश किया जा रहा है।

उद्घाटन से पहले भव्य राजनीतिक सरगर्मी

सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री बंटोरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रवेश द्वार में किया गया है। इस परियोजना में प्रदेश की महत्वपूर्ण संरचना संरचना की परिभाषा शामिल है और इसे दोनों प्रमुख शहरों के बीच यात्रा को और अधिक तेज, सुरक्षित और सुलभ बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

हालाँकि उद्घाटन से पहले सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और वीडियो आने के बाद प्रोजेक्ट की गुणवत्ता को लेकर बहस शुरू हो गई। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी ने सरकार पर मजबूत दावेदारी पेश करते हुए निर्माण कार्यों में शामिल होने का वादा किया।

अखिलेश यादव ने लगाए गंभीर आरोप

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे जैसी डिजिटल यात्रा का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और बढ़िया यात्रा उपलब्ध कराना है, लेकिन अगर निर्माण की गुणवत्ता पर ही सवाल उठाए जाएं तो यात्रियों का भरोसा खोना पड़ता है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे इसलिए बनाए जाते हैं ताकि लोग निश्चिंत होकर तेज गति से यात्रा कर सकें, न कि पूरी यात्रा के दौरान किसी अनहोनी की आपदा में भगवान का नाम लेते रहें। उन्होंने दावा किया कि लगभग 4,700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन से पहले ही क्षतिग्रस्त हो गया है।

अखिलेश यादव ने अपने बयान में महाराष्ट्र के एक रोड प्रोजेक्ट का भी उल्लेख करते हुए कहा कि अगर बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट प्रोजेक्ट समय से पहले खराब होने लगें तो इससे निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी पर्यवेक्षण दोनों पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

दस्तावेज़ और डिज़ाइन पर प्रश्न

सपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि क्या भाजपा छत्तीसगढ़ राज्य में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य में लगी हुई है। उन्होंने सवाल किया कि सामुहिक प्रौद्योगिकी के डिजाइन और निर्माण में क्या सावधानी बरती जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर संदेह पैदा हो जाए तो तेज रफ्तार सड़क का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। उनके अनुसार जनता यह जानना चाहती है कि ऐसी परियोजनाएं वास्तव में आम लोगों की सुविधा के लिए बनाई जा रही हैं या फिर कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए।

उन्होंने दावा किया कि यदि निर्माण गुणवत्ता पर इसी प्रकार प्रश्नचिह्न लगते रहे तो लोग छोटी दूरी की यात्रा करने से पहले भी कई बार सोचने को मजबूर होंगे। उनका कहना था कि केवल गति बढ़ा देने से विकास नहीं माना जा सकता, बल्कि सुरक्षा और गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

भाजपा ने आरोपों को बताया राजनीतिक बयानबाजी

समाजवादी पार्टी के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा की उन्नाव जिला इकाई के अध्यक्ष अनुराग अवस्थी ने कहा कि विपक्ष बिना किसी ठोस आधार के विकास कार्यों को विवादित बनाने का प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में तेजी से हो रहे आधारभूत ढांचा विकास से विपक्ष असहज है और आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए जनता के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखने के लिए इस प्रकार के बयान दिए जा रहे हैं।

अवस्थी ने कहा कि यदि किसी स्थान पर निर्माण कार्य से संबंधित कोई सामान्य तकनीकी कमी सामने आती भी है तो संबंधित एजेंसी उसका तत्काल समाधान करती है। किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में रखरखाव और सुधार की प्रक्रिया सामान्य तकनीकी व्यवस्था का हिस्सा होती है। उन्होंने कहा कि उद्घाटन से पहले इस प्रकार के आरोप लगाना केवल राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास है।

एनएचएआई ने किया धंसने के दावे का खंडन

विवाद बढ़ने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भी स्थिति स्पष्ट की। परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने कहा कि एक्सप्रेसवे का मुख्य मार्ग पूरी तरह सुरक्षित है और उसके धंसने की बात तथ्यहीन है।

उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर जिस हिस्से की तस्वीरें प्रसारित की जा रही हैं, वह मुख्य कैरिजवे नहीं बल्कि सड़क के किनारे स्थित मिट्टी का भाग है। उनके अनुसार वर्षा और अन्य प्राकृतिक कारणों से किनारे की मिट्टी कुछ स्थानों पर खिसक सकती है, जिसे नियमित रखरखाव के अंतर्गत ठीक किया जाता है।

उन्होंने कहा कि इस घटना का एक्सप्रेसवे की संरचनात्मक मजबूती, सड़क की गुणवत्ता या यातायात सुरक्षा से कोई संबंध नहीं है। संबंधित हिस्से की मरम्मत पहले ही पूरी कर ली गई है और उद्घाटन से पहले सभी आवश्यक तकनीकी निरीक्षण भी कर लिए गए हैं।

जनता के लिए खोला जाएगा एक्सप्रेसवे

एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। उनका कहना है कि यातायात शुरू होने के बाद स्वयं लोग सड़क की गुणवत्ता और सुविधा का अनुभव कर सकेंगे।

अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि परियोजना सभी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार की गई है और सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री के आधार पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय आधिकारिक तथ्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

चुनावी माहौल में तेज हुआ सियासी संघर्ष

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चरण धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे चल रहे राजनीतिक आश्रमों की गति दे रहे हैं। ऐसे समय में बड़े विकास कार्य स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस का विषय बन रहे हैं। सत्य पक्ष जहाँ अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, वहीं रचनात्मकता निर्माण की गुणवत्ता, लागत और स्थिरता जैसे विचारधारा को लेकर सरकार को रोजगार में शामिल किया गया है।

यह विवाद भी सामने आया कि नाऊन-कानपुर एक्सप्रेसवे को लेकर एक राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा माना जा रहा है। एक ओर उद्यम निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाया जा रहा है तो दूसरी ओर सरकार और संबंधित परियोजना परियोजनाओं को पूरी तरह से सुरक्षित और मानक के बारे में बताया जा रहा है।

दस्तावेज़ और उत्तरों के बीच जारी है बहस

इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर समाजवादी पार्टी के निर्माण और गुणवत्ता को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि बीजेपी और एनएच इंस्टिट्यूट इन सामानों को खारिज कर रहे हैं। अब एक्सप्रेसवे पर यातायात शुरू होने के बाद उसके प्रदर्शन और शिक्षा पर लोगों की नजर बनी रहेगी।

आरोप-प्रत्यारोप के बीच संबंधित आरोप में कहा गया है कि एक्सप्रेसवे सुरक्षित है और यात्रियों के लिए सल्लम एवम जहाज़ उपलब्ध कराने की पूरी तैयारी की जा चुकी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कलाकारों द्वारा दिए गए तथ्यों का तथ्यात्मक आधार और प्रोजेक्ट व्यवहारिक रूप से लोगों के लक्ष्यों पर कितनी खरी उतरती है।

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