मानसिक स्वास्थ्य
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विचार
‘कॉकरोच’ नहीं, सपनों से भरे विद्यार्थी हैं वे : परीक्षा व्यवस्था, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर एक गंभीर विमर्श
लेखक: बल्लभ लखेश्री भारत में प्रतियोगी परीक्षाएं केवल परीक्षा नहीं होतीं, बल्कि लाखों परिवारों के सपनों, संघर्षों और भविष्य का…
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संपादकीय
जब घर में आदमी अदृश्य हो जाता है : भावनात्मक उपेक्षा का सबसे बड़ा सच
✍️ संपादकीय भारत को परिवारों का देश कहा जाता है। यह वह समाज है जहाँ माता-पिता, दादा-दादी, पति-पत्नी, बेटे-बेटियाँ और…
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