लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़: 119 लोग हिरासत में, 100 लैपटॉप और 178 मोबाइल बरामद
विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर ऑनलाइन रिफंड के नाम पर होती थी करोड़ों की साइबर ठगी
लखनऊ के विभूति खंड में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी से जुड़े एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए 119 लोगों को हिरासत में लिया है। कार्रवाई के दौरान 100 लैपटॉप, 178 मोबाइल फोन और कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ऑनलाइन शॉपिंग रिफंड और तकनीकी सहायता के नाम पर देश-विदेश के लोगों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करता था। पुलिस अब फोरेंसिक जांच के जरिए पूरे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क और उसके वित्तीय लेन-देन की जांच में जुटी है।
ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। साइबर अपराधियों के एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने विभूति खंड क्षेत्र में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर 119 लोगों को हिरासत में लिया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े रिफंड, तकनीकी सहायता और अन्य आकर्षक ऑफरों का झांसा देकर देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों को अपना शिकार बनाता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों, विदेशी कनेक्शन और अन्य सहयोगियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।
विभूति खंड की समिट बिल्डिंग से संचालित हो रहा था फर्जी कॉल सेंटर
पुलिस के अनुसार यह अवैध कॉल सेंटर लखनऊ के विभूति खंड थाना क्षेत्र स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर संचालित किया जा रहा था। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य कॉर्पोरेट कार्यालय जैसा दिखाई देता था, लेकिन अंदर से साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क संचालित हो रहा था।
बताया जा रहा है कि यहां कार्यरत कर्मचारी विशेष प्रशिक्षण के साथ लोगों को फोन करते थे और उन्हें विभिन्न प्रकार के बहाने बनाकर अपने जाल में फंसाते थे। कार्यालय में आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम, इंटरनेट नेटवर्क और कॉलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे किसी को आसानी से शक न हो।
रात में चलता था पूरा ऑपरेशन
जांच एजेंसियों के अनुसार इस कॉल सेंटर की अधिकांश गतिविधियां रात के समय संचालित होती थीं। इसका मुख्य कारण विदेशी देशों के समय के अनुसार लोगों से संपर्क करना था।
गिरोह के सदस्य अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग और इंटरनेट आधारित संचार माध्यमों का उपयोग कर विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे। बातचीत के दौरान वे स्वयं को प्रतिष्ठित कंपनियों या तकनीकी सहायता टीम का कर्मचारी बताकर भरोसा जीतते थे और फिर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाते थे।
रिफंड और तकनीकी सहायता के नाम पर करते थे ठगी
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि गिरोह ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले लोगों को रिफंड दिलाने, बैंकिंग सहायता देने अथवा तकनीकी समस्या का समाधान करने का झांसा देता था।
कई मामलों में पीड़ितों को बताया जाता था कि उनके खाते में अतिरिक्त राशि चली गई है या उन्हें रिफंड प्राप्त करना है। इसके बाद उनसे बैंकिंग जानकारी, डिजिटल एक्सेस या अन्य संवेदनशील सूचनाएं हासिल कर उनके खातों से धनराशि निकाल ली जाती थी।
इसी तरह तकनीकी सहायता के नाम पर भी लोगों के कंप्यूटर और मोबाइल तक पहुंच बनाकर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जाता था।
डॉलर आधारित एप्लीकेशन का भी किया जाता था इस्तेमाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेन-देन और साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए डॉलर आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म और विभिन्न ऑनलाइन एप्लीकेशन का इस्तेमाल करता था।
इस तकनीक के माध्यम से अपराधी अपनी पहचान छिपाने के साथ-साथ विदेशी ग्राहकों तक आसानी से पहुंच बना लेते थे। यही वजह है कि इस पूरे मामले को केवल स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के रूप में देखा जा रहा है।
संयुक्त अभियान में पुलिस को मिली बड़ी सफलता
इस कार्रवाई को लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर प्रकोष्ठ और साइबर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। काफी समय से इस कॉल सेंटर की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
सटीक सूचना मिलने के बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की, जिसके दौरान पूरे कार्यालय को घेर लिया गया। कार्रवाई इतनी तेजी से हुई कि वहां मौजूद अधिकांश कर्मचारी बाहर निकलने का मौका भी नहीं पा सके।
100 लैपटॉप, 178 मोबाइल समेत कई डिजिटल उपकरण बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। इनमें 100 लैपटॉप, 178 मोबाइल फोन, कई हार्ड डिस्क, डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल हैं।
बरामद उपकरणों से यह संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और बड़े पैमाने पर साइबर अपराधों को अंजाम दे रहा था। पुलिस सभी डिजिटल उपकरणों का डेटा सुरक्षित कर उनकी तकनीकी जांच करा रही है।
अहमदाबाद के दो संचालक पुलिस की हिरासत में
जांच के दौरान पुलिस ने कॉल सेंटर के संचालन से जुड़े दो प्रमुख व्यक्तियों को भी हिरासत में लिया है। इनमें अहमदाबाद निवासी ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार शामिल हैं।
पुलिस इन दोनों से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क की संरचना, वित्तीय लेन-देन, विदेशी संपर्कों और अन्य सहयोगियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सके।
फोरेंसिक जांच से खुलेंगे कई बड़े राज
बरामद किए गए सभी लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। विशेषज्ञ इन उपकरणों से ईमेल, कॉल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री, बैंकिंग लेन-देन, डिजिटल वॉलेट और अन्य तकनीकी जानकारियां जुटाने में लगे हैं।
संभावना जताई जा रही है कि जांच के दौरान कई और राज्यों तथा विदेशों से जुड़े साइबर अपराधियों के नाम सामने आ सकते हैं। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कितनी राशि की ठगी की गई।
पूरे सिंडिकेट तक पहुंचने की कोशिश
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक कॉल सेंटर तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां पूरे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी सिंडिकेट का पता लगाने में जुटी हैं।
हिरासत में लिए गए 119 लोगों से पूछताछ के आधार पर अन्य राज्यों में सक्रिय नेटवर्क, वित्तीय चैनलों और तकनीकी सहयोगियों की जानकारी जुटाई जा रही है। यदि जांच में और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
साइबर अपराध के खिलाफ सख्त संदेश
लखनऊ पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है। डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में पुलिस लगातार ऐसे संगठित गिरोहों पर नजर बनाए हुए है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आम लोगों को भी ऑनलाइन लेन-देन, रिफंड कॉल, तकनीकी सहायता और बैंकिंग संबंधी फोन कॉल के दौरान सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक विवरण या रिमोट एक्सेस साझा करने से बचना चाहिए।
लखनऊ के विभूति खंड में फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर पर की गई यह कार्रवाई प्रदेश की अब तक की बड़ी साइबर ऑपरेशनों में से एक मानी जा रही है। 119 लोगों की हिरासत, 100 लैपटॉप और 178 मोबाइल फोन की बरामदगी इस बात का संकेत है कि साइबर अपराध का यह नेटवर्क बेहद संगठित और व्यापक था। अब फोरेंसिक जांच और पूछताछ के आधार पर पुलिस पूरे सिंडिकेट की परतें खोलने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।









