प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा खेल! बन्थरा में अपात्रों पर मेहरबानी, पात्र गरीबों के हक पर डाका
RTI के बावजूद नहीं सार्वजनिक हुई लाभार्थियों की सूची, अपात्रों को लाभ और धन उगाही के आरोपों से घिरी नगर पंचायत बन्थरा।
रिपोर्ट: कमलेश कुमार चौधरी
बन्थरा (लखनऊ) गरीबों के सिर पर छत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। राजधानी लखनऊ के बन्थरा नगर पंचायत क्षेत्र में इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितता, भ्रष्टाचार और धन उगाही के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पात्र लाभार्थियों को योजना से बाहर कर दिया गया, जबकि अपात्र लोगों को सूची में शामिल कर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया।
मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत कई बार मांगी गई लाभार्थियों की सूची तक संबंधित विभाग उपलब्ध नहीं करा सके। इससे योजना की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना पर भ्रष्टाचार के साए
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और बेघर परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। लेकिन बन्थरा नगर पंचायत में इस योजना को लेकर जो आरोप सामने आए हैं, वे व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वर्ष 2025-26 की लाभार्थी सूची तैयार करने में बड़े पैमाने पर मनमानी की गई। ऐसे लोगों के नाम सूची में शामिल कर दिए गए जो योजना की पात्रता के दायरे में नहीं आते थे, जबकि वास्तविक जरूरतमंदों और गरीब परिवारों को लाभ से वंचित कर दिया गया।
लोगों का कहना है कि पात्रता के बजाय प्रभाव, पहुंच और कथित आर्थिक लेनदेन को प्राथमिकता दी गई। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि गरीबों के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है।
सरकारी भूमि पर निर्माण और अधिकारियों की चुप्पी
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि नगर पंचायत क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। आरोप है कि गाटा संख्या 375, 376, 377 और 445 जैसी सरकारी भूमि पर कब्जे कर निर्माण कराया गया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंद लीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में संबंधित लेखपाल, नगर पंचायत अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार विभागों को लिखित एवं मौखिक रूप से सूचना दी गई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य नहीं रोका गया।
ग्राम पंचायत औरामा क्षेत्र में चल रहे ऐसे निर्माण कार्यों को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। नागरिकों का सवाल है कि यदि सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण हो रहा था तो प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
वायरल वीडियो और खबरों के बावजूद नहीं हुई जांच
प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित धांधली और धन उगाही को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके अलावा विभिन्न समाचार पत्रों और मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लगातार खबरें प्रकाशित होती रहीं।
इसके बावजूद न तो किसी बड़ी जांच की घोषणा हुई और न ही किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई सामने आई। इससे आम लोगों में यह धारणा बन रही है कि कहीं न कहीं पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को सार्वजनिक रूप से जांच कराकर सच्चाई सामने लानी चाहिए। वहीं यदि आरोप सही हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
RTI में नहीं मिली जानकारी, बढ़ा संदेह
मामले का सबसे अहम पहलू सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी है। शिकायतकर्ता के अनुसार 21 फरवरी 2026 को नगर पंचायत बन्थरा से प्रधानमंत्री आवास योजना वर्ष 2025-26 की लाभार्थी सूची मांगी गई थी। आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन ने जवाब देते हुए कहा कि उनके पास उक्त सूची उपलब्ध नहीं है और इसके लिए डूडा कार्यालय से संपर्क किया जाए।
इसके बाद 14 अप्रैल 2026 को डूडा परियोजना अधिकारी से भी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूची मांगी गई। लेकिन आरोप है कि निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद लाभार्थियों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई।
सूचना न दिए जाने से लोगों के बीच संदेह और गहरा गया है। नागरिकों का कहना है कि यदि सूची पूरी तरह नियमों के अनुरूप बनाई गई है तो उसे सार्वजनिक करने में आखिर समस्या क्या है?
840 अपात्रों को लाभ मिलने का आरोप
स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त जारी होने के दौरान लगभग 840 ऐसे लोगों के नाम सूची में शामिल किए गए जो योजना के वास्तविक पात्र नहीं थे।
आरोप है कि इन लोगों के खातों में पहली किस्त की धनराशि भेजी जा चुकी है। वहीं वास्तविक पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिला।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है, लेकिन यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह प्रदेश की सबसे बड़ी आवासीय योजना संबंधी अनियमितताओं में से एक मामला साबित हो सकता है।
15 हजार से 50 हजार रुपये तक वसूली के आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि लाभार्थी सूची में नाम शामिल कराने के नाम पर 15 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की गई।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ कर्मचारियों, कार्यदायी संस्था से जुड़े लोगों तथा अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की मिलीभगत से यह खेल संचालित हुआ।
हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
दूसरी किस्त जारी होने से पहले बढ़ी बेचैनी
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे में स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
उनका कहना है कि यदि पहली सूची में गड़बड़ियां हुई थीं तो दूसरी किस्त जारी होने से पहले पूरे मामले की जांच कराई जानी चाहिए। अन्यथा सरकारी धन फिर उन्हीं लोगों तक पहुंच जाएगा जिन्हें कथित रूप से गलत तरीके से लाभार्थी बनाया गया है। लोगों का कहना है कि जांच के बिना दूसरी किस्त जारी करना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा होगा।
बन्थरा नगर पंचायत के विकास पर भी उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत बनने के बाद भी क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हो सका है। करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत होने के बावजूद कई बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
सड़कों, नालियों, साफ-सफाई और अन्य विकास कार्यों को लेकर भी लोगों में असंतोष है। नागरिकों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर खर्च होने वाली धनराशि का सामाजिक ऑडिट कराया जाना चाहिए।
क्या सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए लाभार्थियों की सूची?
योजना से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण सवालों में एक यह भी है कि लाभार्थियों की सूची नगर पंचायत कार्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर क्यों नहीं चस्पा की गई?
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक करना एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है। इससे पात्र और अपात्र लाभार्थियों की पहचान करने में आसानी होती है तथा जनता भी निगरानी कर सकती है। यदि सूची सार्वजनिक होती तो लोगों के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती थी।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी स्वतंत्र और सक्षम अधिकारी अथवा एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। लोगों का मानना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कथित भ्रष्टाचार से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शासन-प्रशासन इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जांच कराएगा या फिर गरीबों के आवास का सपना फाइलों और कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। बन्थरा की जनता इसी सवाल का जवाब तलाश रही है।








