गलती और इरादे का अंतर : क्यों बुरी नीयत को माफी नहीं, प्रतिकार मिलना चाहिए

लेखक केवल कृष्ण पनगोत्रा की तस्वीर के साथ अच्छे इरादे की प्रशंसा और बुरे इरादे के प्रतिकार पर आधारित आकर्षक संपादकीय फीचर इमेज।

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

-केवल कृष्ण पनगोत्रा

गलती और इरादे का अंतर समझना आज के समय की एक बड़ी सामाजिक और नैतिक आवश्यकता है। अक्सर हम सुनते हैं, “अरे छोड़िए, गलती हो गई थी, माफ कर दीजिए।” यह वाक्य जीवन के किसी न किसी मोड़ पर हर व्यक्ति ने कहा या सुना होगा।

निस्संदेह, गलती को स्वीकार किया जाना चाहिए और उसे माफ भी किया जाना चाहिए। अपनी भूल मान लेना और दूसरों की त्रुटि को क्षमा कर देना बड़े दिल और परिपक्व व्यक्तित्व की पहचान है। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या हर अनुचित या अप्रिय कार्य को केवल गलती कहकर छोड़ दिया जाना चाहिए?

यहीं से गलती और इरादे का अंतर समझने की आवश्यकता पैदा होती है। मनुष्य के जीवन में होने वाली गलतियों को यदि गहराई से देखा जाए तो वे मुख्यतः दो प्रकार की प्रतीत होती हैं। पहली, वह गलती जो अनजाने में होती है। व्यक्ति उसे करना नहीं चाहता, लेकिन परिस्थितियों, असावधानी या जानकारी के अभाव में उससे वह कार्य हो जाता है। दूसरी, वह कार्य जिसे व्यक्ति पूरी जानकारी और समझ के साथ जानबूझकर करता है।

वास्तव में गलती वही है जो अनजाने में हो। गलती को भूल, चूक या कोताही भी कहा जा सकता है। ये सभी शब्द लगभग एक ही भाव को व्यक्त करते हैं। ऐसी स्थिति में क्षमा और सुधार की संभावना बनी रहती है।

लेकिन जो कार्य सोच-समझकर और जानबूझकर किया जाता है, उसे गलती नहीं कहा जा सकता। वह व्यक्ति की नीयत या इरादे का परिणाम होता है। अंग्रेज़ी में इसे इंटेंशन (Intention) कहा जाता है। इरादा अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी। किंतु बुरे इरादे से किए गए कार्य को गलती का नाम देना वस्तुतः उस बुरी नीयत का बचाव करना है।

See also  पनगोत्रा की चिट्ठी ; धर्म, अध्यात्म और जागरूकता : क्या करोड़ों अनुयायी समाज को बेहतर बना पाए हैं?

अच्छे इरादों की समाज में हमेशा प्रशंसा होती है। ऐसे लोग दूसरों के लिए प्रेरणा बनते हैं और उनके कार्यों का अनुसरण भी किया जाता है। अच्छे इरादे समाज में विश्वास, सहयोग और सकारात्मकता को बढ़ाते हैं।

इसके विपरीत, बुरे इरादे से किया गया कार्य केवल इसलिए क्षमा योग्य नहीं हो जाता कि बाद में उसे गलती बता दिया जाए। बुरी नीयत को न तो स्वीकार किया जाना चाहिए और न ही उसे सामान्य मानकर अनदेखा किया जाना चाहिए। उसका उचित और स्पष्ट प्रतिकार होना आवश्यक है।

यदि समाज में बुरे इरादों का विरोध नहीं किया जाता, तो यह अप्रत्यक्ष रूप से बुराई को संरक्षण देने जैसा है। इससे गलत प्रवृत्तियों का मनोबल बढ़ता है और सामाजिक व्यवस्था कमजोर होने लगती है। परिणामस्वरूप सत्य, न्याय और नैतिकता के मूल्यों को नुकसान पहुंचता है।

इसलिए गलती और इरादे का अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है। गलती को समझना, स्वीकार करना और माफ करना मानवीय गुण हैं। अच्छे इरादों की सराहना और उनका अनुसरण समाज को बेहतर बनाता है। वहीं बुरे इरादों का समय रहते प्रतिकार करना एक स्वस्थ, न्यायपूर्ण और संतुलित समाज की अनिवार्य शर्त है।

अंततः यही कहा जा सकता है कि गलती को माफी मिलनी चाहिए, अच्छे इरादे को सम्मान मिलना चाहिए और बुरी नीयत को प्रतिकार मिलना चाहिए। यही सामाजिक नैतिकता का सबसे संतुलित और न्यायपूर्ण मार्ग है।

यायावर
Author: यायावर

यायावर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें