INDIA गठबंधन की नई कवायद : दो साल बाद जुटा विपक्ष, ममता को मिला समर्थन, राहुल की सफाई और अखिलेश के सवालों के बीच 5 अहम प्रस्तावों पर बनी सहमति

नई दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन की बैठक में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, सोनिया गांधी और अन्य विपक्षी नेता साझा रणनीति पर चर्चा करते हुए।

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अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के बाद बने विपक्षी गठबंधन INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने के संकेत दिए हैं। लगभग दो वर्षों के अंतराल के बाद राजधानी दिल्ली में आयोजित गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करने, संसद में समन्वय बढ़ाने और जनहित के मुद्दों पर संयुक्त संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

हालांकि इस बैठक में शामिल दलों के बीच कई राजनीतिक मतभेद भी सामने आए। आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही, जबकि कांग्रेस और वाम दलों के बीच चल रही खींचतान भी बैठक के दौरान महसूस की गई। इसके बावजूद विपक्षी नेताओं ने पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनाकर गठबंधन को सक्रिय बनाए रखने का संदेश दिया।

विपक्षी एकता को नई ऊर्जा देने की कोशिश

दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस बैठक को विपक्षी एकता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के विधानसभा चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों और विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों की चुनौतियों को देखते हुए यह बैठक आयोजित की गई। बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, वामपंथी दलों सहित कुल 23 राजनीतिक दलों ने भाग लिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दल आगामी राजनीतिक चुनौतियों, संसद के मानसून सत्र और विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए साझा रणनीति बनाना चाहते हैं। इसी कारण इस बैठक को केवल औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाली बैठक के रूप में देखा जा रहा है।

ममता बनर्जी की पहल पर बुलाई गई बैठक

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक को आयोजित कराने में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद ममता बनर्जी विपक्षी दलों को एक मंच पर बनाए रखने के पक्ष में सक्रिय दिखाई दे रही हैं। बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की और गर्मजोशी से उनका अभिवादन किया। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा की।

बताया जाता है कि ममता बनर्जी ने विपक्षी नेताओं से पश्चिम बंगाल का दौरा कर वहां कथित राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का प्रत्यक्ष आकलन करने का अनुरोध भी किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी उनके सांसदों और नेताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है, लेकिन उनकी पार्टी इस दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है।

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संकट के समय ममता के साथ खड़ा दिखा वामपंथ

बैठक का एक रोचक पहलू यह भी रहा कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी रहे वामपंथी दल अब INDIA गठबंधन के मंच पर ममता बनर्जी के साथ खड़े दिखाई दिए।

सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने स्पष्ट रूप से कहा कि विपक्षी गठबंधन इस समय ममता बनर्जी के साथ खड़ा है और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए। हालांकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेतृत्व ने अधिक संतुलित रुख अपनाया और किसी एक दल के पक्ष में खुलकर बयान देने से परहेज किया। फिर भी यह स्पष्ट था कि विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ व्यापक राजनीतिक एकजुटता बनाए रखना चाहते हैं।

AAP और DMK की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल

बैठक का एक प्रमुख मुद्दा उन दलों की अनुपस्थिति भी रही जो कभी INDIA गठबंधन के महत्वपूर्ण सहयोगी माने जाते थे। आम आदमी पार्टी ने हाल ही में गठबंधन से अलग होने का औपचारिक निर्णय लिया है। वहीं डीएमके ने कांग्रेस के साथ मतभेदों का हवाला देते हुए बैठक का बहिष्कार किया।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि विपक्षी एकता को मजबूत करना है तो सहयोगी दलों के बीच संवाद और विश्वास को बनाए रखना होगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह हस्तक्षेप केवल AAP और DMK तक सीमित नहीं था, बल्कि यह विपक्षी गठबंधन के भविष्य को लेकर चिंता का भी संकेत था।

राहुल गांधी को देनी पड़ी सफाई

बैठक के दौरान कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के बीच चल रहे मतभेद भी सामने आए।

केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं और राहुल गांधी द्वारा किए गए कुछ राजनीतिक बयानों को लेकर वाम दलों में नाराजगी बनी हुई है। CPI(M) का आरोप है कि कांग्रेस नेतृत्व ने चुनावी प्रचार के दौरान पार्टी और केरल के वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन पर भाजपा से निकटता के आरोप लगाए थे। बैठक में CPI(M) की ओर से राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के बयानों से पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हुआ है और इस विषय पर स्पष्टता आवश्यक है।

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सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने बैठक में कहा कि उनके बयान राजनीतिक संदर्भ में दिए गए थे और उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, विचारधारा या संगठन का अपमान करना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्षी दलों के बीच सहयोग और संवाद बनाए रखना आवश्यक है। इस सफाई के बाद माहौल कुछ हद तक सामान्य हुआ और बैठक आगे बढ़ सकी।

किन पांच बिंदुओं पर बनी सहमति?

बैठक के समापन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि विपक्षी दलों के बीच पांच महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी है।

1. मतदाता सूची और SIR मुद्दे पर मुख्य न्यायाधीश को पत्र

विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को गंभीर बताया। इस विषय पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र लिखने का निर्णय लिया गया।

2. शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

बैठक में शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े विवादित मुद्दों पर चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि लाखों विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले मामलों में केंद्र सरकार संतोषजनक जवाब देने में विफल रही है। इसी कारण शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग करने का निर्णय लिया गया।

3. आर्थिक संकट पर सर्वदलीय बैठक की मांग

विपक्षी दलों ने बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और आर्थिक चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। इस संबंध में केंद्र सरकार से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की गई।

4. हर दो महीने में होगी INDIA गठबंधन की बैठक

गठबंधन को सक्रिय बनाए रखने के लिए यह तय किया गया कि अब हर दो महीने में सभी दलों की बैठक आयोजित की जाएगी। अगली बैठक अगस्त महीने में हैदराबाद में आयोजित करने पर सहमति बनी।

5. संसद में समन्वित रणनीति

आगामी मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने का निर्णय लिया गया। इसके तहत प्रतिदिन सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि संसद के भीतर विपक्ष एकजुट होकर अपनी रणनीति आगे बढ़ा सके।

कौन-कौन नेता रहे मौजूद?

बैठक में विपक्ष के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए। कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे। तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और अन्य कई वरिष्ठ नेता भी बैठक में शामिल हुए। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के प्रमुख उद्धव ठाकरे तथा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इसके अलावा वाम दलों की ओर से डी. राजा, जॉन ब्रिटास, दीपांकर भट्टाचार्य सहित कई प्रमुख नेताओं ने बैठक में भाग लिया।

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विपक्षी राजनीति के लिए क्या संकेत?

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब विपक्षी गठबंधन के भीतर कई प्रकार के राजनीतिक मतभेद मौजूद हैं। कुछ दल गठबंधन से दूरी बना रहे हैं तो कुछ राज्यों में सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

फिर भी दिल्ली में हुई यह बैठक इस बात का संकेत देती है कि भाजपा के खिलाफ साझा राजनीतिक मंच को पूरी तरह समाप्त नहीं होने दिया जाएगा। विपक्षी दल संसद, चुनाव और जनआंदोलनों के स्तर पर समन्वय बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

अब निगाहें अगस्त में प्रस्तावित हैदराबाद बैठक पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि INDIA गठबंधन केवल बैठकें करने तक सीमित रहता है या फिर वह राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रभावी और संगठित विपक्ष के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत कर पाता है।

सवाल-जवाब: INDIA गठबंधन बैठक 2026

INDIA गठबंधन की बैठक में कितने दल शामिल हुए?

नई दिल्ली में हुई इस बैठक में विपक्षी गठबंधन से जुड़े 23 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया।

बैठक में किन पांच मुद्दों पर सहमति बनी?

SIR मामले पर CJI को पत्र, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, आर्थिक संकट पर सर्वदलीय बैठक, हर दो महीने में INDIA बैठक और मानसून सत्र में विपक्षी समन्वय पर सहमति बनी।

AAP और DMK बैठक में क्यों नहीं शामिल हुए?

AAP ने गठबंधन से अलग होने का ऐलान किया, जबकि DMK ने कांग्रेस से मतभेदों के चलते बैठक का बहिष्कार किया।

राहुल गांधी ने CPI(M) को क्या सफाई दी?

राहुल गांधी ने कहा कि उनके बयान राजनीतिक संदर्भ में थे और उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या विचारधारा पर हमला करना नहीं था।

INDIA गठबंधन की अगली बैठक कहां होगी?

गठबंधन की अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में आयोजित करने पर सहमति बनी है।

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Author: यायावर

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