बाढ़ की तबाही से नहीं उबरे लोग, फिर मंडराया खतरा ; घर-गृहस्थी से रास्तों तक मची तबाही

बाढ़ से जलमग्न क्षेत्र, क्षतिग्रस्त नदी तट और बहते पानी के बीच रिपोर्टर संजय सिंह राणा की तस्वीर वाली समाचार फीचर इमेज।

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संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट। मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ से मिले जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि एक बार फिर जलस्तर बढ़ने से हजारों परिवारों की चिंता बढ़ गई। शनिवार की विनाशकारी बाढ़ के बाद रविवार को नदी का पानी घटा तो लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन सोमवार की सुबह मंदाकिनी फिर उफान पर आ गई। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 2.05 मीटर ऊपर पहुंचने से नदी किनारे रहने वाले परिवारों में दहशत फैल गई। हालांकि शाम करीब पांच बजे जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया और पानी में कमी आने लगी।

पिछले एक सप्ताह में मंदाकिनी का जलस्तर सात बार खतरे के निशान को पार कर चुका है। करीब 48 घंटे तक चली भीषण बाढ़ ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में 10 हजार से अधिक परिवारों की गृहस्थी को प्रभावित किया है। कहीं घरों में पानी घुसने से सामान बर्बाद हो गया तो कहीं कच्चे मकान ढह गए। सड़कों और रपटों के बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा था नदी का पानी

शनिवार को मंदाकिनी ने विकराल रूप धारण कर लिया था। नदी खतरे के निशान से 8.70 मीटर ऊपर पहुंचकर 135.200 मीटर के रिकॉर्ड स्तर पर बह रही थी। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण रामघाट सहित आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी। रविवार सुबह पानी घटने लगा, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली, लेकिन रात से नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने लगा।

बाढ़ ने धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र की पहचान माने जाने वाले रामघाट को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। घाट की पहचान रहा तुलसी मंदिर बाढ़ की चपेट में आकर बह गया, जबकि तुलसीदास की प्रतिमा भी क्षतिग्रस्त हो गई। फुटओवर ब्रिज में लगी टिन की चादरें भी पानी के तेज बहाव में बह गईं।

रामघाट के आसपास संचालित 400 से अधिक दुकानें बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। दुकानदारों के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ दुकान और सामान के नुकसान की चिंता है तो दूसरी ओर पर्यटन गतिविधियां बंद होने से कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है।

20 मोहल्लों में पेयजल संकट

बाढ़ का असर केवल घरों और दुकानों तक सीमित नहीं रहा। पेयजल आपूर्ति व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए बनाए गए इंटेकवेल में पानी भर जाने से मशीनें खराब हो गई हैं। इसके कारण करीब 20 मोहल्लों में 72 घंटे से नलों की धार सूखी हुई है।

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बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण लोगों के सामने पानी की समस्या और बढ़ गई। सबमर्सिबल पंप भी नहीं चल सके। बाढ़ के बाद साफ पानी की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

गोबरिया गांव में करीब 30 परिवारों के बेघर होने की जानकारी सामने आई है। वहीं परसौंजा गांव में 80 से अधिक कच्चे मकान ढह गए हैं। प्रभावित परिवारों के सामने सिर छिपाने की जगह के साथ-साथ दो वक्त के भोजन का संकट भी पैदा हो गया है।

कई मार्गों पर टूटा संपर्क

लगातार बारिश और नदियों के उफान का असर सड़क संपर्क पर भी पड़ा है। भरतकूप क्षेत्र के पहाड़ों में रात के समय हुई तेज बारिश के बाद भरतकूप-कालिंजर मार्ग पर पानी भर गया, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया।

टिकरिया रपटा बह जाने से मानिकपुर और सतना के बीच सीधा सड़क संपर्क टूट गया है। अब लोगों को सतना जाने के लिए बांदा, कालिंजर, सिंहपुर और पन्ना होकर करीब 200 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे स्थानीय लोगों के साथ व्यापारियों और जरूरी काम से यात्रा करने वालों की परेशानी बढ़ गई है।

चित्रकूट-सतना मार्ग पर मझगवां के पास पिंडरा नदी का रपटा भी बह गया है। इससे सतना की ओर जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि कर्वी में मंदाकिनी पुल की एप्रोच रोड को दुरुस्त कर दिया गया है और अब बड़े वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है।

पर्यटन पर पड़ा बाढ़ का सीधा असर

बाढ़ ने धार्मिक पर्यटन की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है। रामघाट से लेकर सती अनुसुइया, हनुमानधारा और स्फटिक शिला तक सन्नाटा पसरा हुआ है। होटल और धर्मशालाएं खाली पड़ी हैं। गुप्त गोदावरी की सीढ़ियों पर भी पानी लगातार बह रहा है और पर्यटन गतिविधियां बंद हैं।

सामान्य दिनों में करीब 60 हजार श्रद्धालु और पर्यटक प्रतिदिन इस क्षेत्र में पहुंचते हैं, लेकिन बाढ़ और खराब रास्तों के कारण वर्तमान में उनकी संख्या 10 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पा रही है। सुरक्षा कारणों से नौका संचालन भी बंद कर दिया गया है।

होटल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अरुण गुप्ता के अनुसार सामान्य दिनों में पूरे क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 10 करोड़ रुपये का कारोबार होता था। पर्यटन बंद होने से होटल, धर्मशाला, नाव संचालन, दुकान और अन्य छोटे कारोबारों से जुड़े लोगों की आय पर बड़ा असर पड़ा है।

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मोहरवां रपटा पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकी

वाल्मीकि नदी पर बने मोहरवां रपटा की स्थिति भी बाढ़ के कारण कमजोर हो गई है। मिट्टी के कटान को देखते हुए प्रशासन ने भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया है। थाना प्रभारी नरेश प्रजापति के मुताबिक जिलाधिकारी के निर्देश पर यह कदम सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया है।

प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल कमजोर पुल-पुलियों और रपटों पर हादसे रोकना है। नदी और नालों के जलस्तर को देखते हुए लोगों को भी अनावश्यक आवागमन से बचने की सलाह दी जा रही है।

स्कूलों में आज भी अवकाश

बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कक्षा एक से आठ तक के सभी स्कूलों में मंगलवार को भी बच्चों के लिए अवकाश घोषित किया गया है। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी रंजना शुक्ला ने बताया कि विद्यार्थियों के लिए स्कूल बंद रहेंगे, जबकि शिक्षक और अन्य स्टाफ निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचकर विभागीय कार्य करेंगे।

कई जिलों में भी बाढ़ का संकट

बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर कई अन्य जिलों में भी देखने को मिल रहा है। फर्रुखाबाद में गंगा चेतावनी बिंदु से 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। अमृतपुर क्षेत्र में जलस्तर घटने के बाद गांवों से बाढ़ का पानी उतरने लगा है, लेकिन खेतों में पानी जमा रहने से फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोग बुखार और त्वचा संबंधी समस्याओं से भी परेशान हैं।

बांदा में केन नदी का जलस्तर घटा है, जबकि यमुना में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई रपटों पर आवागमन बंद है। अगस्त में 400.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसने पिछले आठ वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। हमीरपुर में यमुना और बेतवा का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है।

संभावित दौरे से बाढ़ पीड़ितों को राहत की उम्मीद

फर्रुखाबाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संभावित दौरा तीन सितंबर को प्रस्तावित बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से संकेत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इटावा-बरेली हाईवे पर रामगंगा पुल और डबरी गांव के बीच कार्यक्रम स्थल के लिए प्रस्तावित जगह का जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया।

इसके बाद करीब 12 बुलडोजर और 100 से अधिक कर्मचारियों को कार्यक्रम स्थल तैयार करने में लगाया गया। यहां हेलीपैड और लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर जनसभा स्थल बनाया जा रहा है। हेलीपैड से जनसभा स्थल तक खड़ंजा बिछाकर रास्ता तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के संभावित दौरे से बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत और प्रशासनिक मदद की उम्मीद बढ़ी है।

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बाढ़ ने बदला जलप्रपात का भूगोल

बारिश के बाद उफनाई त्रिवेणी नदी ने रानीपुर टाइगर रिजर्व के प्रसिद्ध तुलसी जलप्रपात का प्राकृतिक स्वरूप भी बदल दिया है। शरभंग, कालीबराह और अमरावती नदियों के तेज बहाव ने जलप्रपात क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाई गई रेलिंग, सीसी सड़क और बैठने के स्थान पानी के तेज बहाव में बह गए।

पानी उतरने के बाद सामने आया मंजर बाढ़ की भयावहता को साफ तौर पर बयां कर रहा है। कई चट्टानों के खिसकने से जलप्रपात क्षेत्र में हादसे का खतरा भी बढ़ गया है।

तुलसी जलप्रपात रविवार को भी तेज वेग से बहता रहा। हालांकि जलप्रपात के पास बनाया गया प्रदेश का पहला स्काई ग्लास ब्रिज सुरक्षित बताया जा रहा है, लेकिन उसके आसपास का सुरक्षा ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।

रानीपुर टाइगर रिजर्व के मारकुंडी वन क्षेत्राधिकारी ब्रजेंद्र प्रताप सिंह ने सुरक्षा को देखते हुए जलप्रपात क्षेत्र में पर्यटकों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी है। उनका कहना है कि जलप्रवाह सामान्य होने के बाद क्षतिग्रस्त रेलिंग, रास्तों और अन्य सुरक्षा इंतजामों की मरम्मत कराई जाएगी। इसके बाद ही पर्यटकों को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जलप्रपात क्षेत्र में पानी का बहाव सामान्य होने और सुरक्षा व्यवस्था बहाल होने तक जाने से बचें।

राहत और पुनर्वास की बड़ी चुनौती

लगातार बाढ़ और बारिश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्राकृतिक आपदा के बाद प्रभावित परिवारों को सामान्य जीवन में लौटाने की चुनौती कितनी बड़ी है। घर, दुकान, सड़क, पेयजल व्यवस्था और पर्यटन ढांचे को हुए नुकसान के बाद अब राहत और पुनर्वास की जरूरत बढ़ गई है।

सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है जिनके घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। उनके लिए तत्काल भोजन, सुरक्षित आश्रय, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं जरूरी हैं। वहीं टूटे संपर्क मार्गों को बहाल करना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।

मंदाकिनी का जलस्तर फिलहाल घटने लगा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले पानी को देखते हुए खतरा पूरी तरह टला नहीं है। ऐसे में नदी किनारे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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Author: यायावर

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