इरफान अली लारी की रिपोर्ट
बस्ती/भाटापार रानी। पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब और पैदाइश की खुशी में भाटपार की रानी गणतंत्र में जश्ने ईद मिलादुन्नबी जलसे का भव्य आयोजन किया गया। निर्मल हॉल में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने अध्ययन किया। देर तक चली महफिल में नात-ए-पाक, तकरीर और धार्मिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं और उनके जीवन संदेश को याद किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पूरा मराठा धार्मिक उल्लास और भाईचारे से सराबोर नजर आया। जलसे में शामिल लोगों ने नात-ए-पाक को पूरे सम्मान और उत्साह के साथ सुना। कार्यक्रम के दौरान समय-समय पर धार्मिक नारियों से लेकर डेरे हॉल का माहौल गूंजता रहा।
हाफिज व कारी मुजीब अहमद रजा के नेतृत्व में हुआ आयोजन
जश्ने ईद मिलादुन्नबी कार्यक्रम का आयोजन भाटपार रानी जामा मस्जिद से जुड़े हाफिज एवं कारी मुजीब अहमद रजा के मुख्य मार्गदर्शन और नेतृत्व में किया गया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश की खुशी मनाने के साथ-साथ उनके बताए इंसानियत, रहम, प्रेम, भाईचारे और सद्भाव के संदेश को लोगों तक पहुंचाना था।
कार्यक्रम में धार्मिक विद्वानों और नात-ए-पाक पढ़ने वाले कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। वक्ताओं ने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जीवन और उनकी शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए इंसानियत की सेवा, जरूरतमंदों की मदद, आपसी भाईचारे और समाज में शांति बनाए रखने पर जोर दिया।
नात-ए-पाक से भाव-विभोर हुए लोग
जश्ने ईद मिलादुन्नबी की महफिल में अलग-अलग स्थानों से आए नात-ए-पाक पढ़ने वालों ने अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का ध्यान आकर्षित किया। जामा मस्जिद भाटपार रानी से हाफिज व कारी मुजीब अहमद रजा, बड़के गांव से हाफिज जिलानी साहब तथा दुबौली से आए हाफिज एवं कारी साहब ने कार्यक्रम में धार्मिक प्रस्तुतियां दीं।
इसके अलावा नात-ए-पाक पढ़ने वाले खुर्शीद अहमद और किछौछा शरीफ से आए नातख्वां ने भी अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से महफिल में मौजूद लोगों को भाव-विभोर किया। नात और शेरो-शायरी के दौरान लोगों ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
महफिल में मौजूद लोगों के बीच धार्मिक नारों की आवाज भी सुनाई देती रही। विशेष रूप से “सरकार की आमद मरहबा”, “दिलदार की आमद मरहबा” और “आका की आमद मरहबा” जैसे नारों से कार्यक्रम स्थल का माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।
युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने भी लिया हिस्सा
जश्ने ईद मिलादुन्नबी के इस आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में नौजवानों के साथ महिलाएं और बच्चे भी मौजूद रहे। आयोजकों ने कार्यक्रम के दौरान धार्मिक और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया।
लोगों ने नात-ए-पाक और धार्मिक तकरीरें सुनीं तथा पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जीवन से जुड़े संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजन समाज में भाईचारे, आपसी प्रेम और सद्भाव की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
धार्मिक संदेशों के साथ भाईचारे पर दिया गया जोर
जश्ने ईद मिलादुन्नबी के दौरान वक्ताओं ने धार्मिक शिक्षाओं के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जीवन मानवता, दया, करुणा और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देता है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़ा होना चाहिए और आपसी मतभेदों को भुलाकर शांति एवं भाईचारे को मजबूत करना चाहिए।
जलसे में यह संदेश भी दिया गया कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना भी है। वक्ताओं ने युवाओं से विशेष रूप से शिक्षा, अनुशासन, अच्छे आचरण और सामाजिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने की अपील की।
कमेटी के सदस्यों ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी
जश्ने ईद मिलादुन्नबी के सफल आयोजन में आयोजन कमेटी के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को संभालने और महफिल को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में कमेटी से जुड़े लोगों ने सहयोग किया।
इवेंट कमेटी में मोहम्मद उमर रिसर्चर, मोहम्मद हीरो रिसर्चर, मोहम्मद आबिद हुसैन, अख्तर रिसर्चर, हनीफ रिसर्चर, अकबर रिसर्चर, यासीन आलम, सैफ रिसर्चर, मोहम्मद उमर अस्सुक, मोहम्मद अरमान, मोहम्मद अख्तर, अफजल अली, अरशद अली, मास्टर अफजल अली, उस्मान अली, साहिल रिसर्चर, समीउल्लाह रिसर्चर, फैजान रिसर्चर, सलमान रिसर्चर और रहमत अख्तर समेत अन्य लोग शामिल रहे।
समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम में आने वाले लोगों की सुविधाओं और व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने प्रतिभागियों के प्रोजेक्ट की खोज की।
देर रात तक धार्मिक मोनालिन जारी जलसा
निर्मल हॉल में आयोजित जश्ने ईद मिलादुन्नबी का धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। नात-ए-पाक और तकरीरों के बीच लोगों ने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश की खुशियां साझा कीं। कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए व्हाट्सएप में मानवता और समानता भाईचारे को प्रमुखता से बताया गया।
आयोजकों ने कार्यक्रम में सहयोग करने वाले सभी लोगों को शामिल किया और इसमें शामिल होने वाले सभी लोगों को इसमें शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि समाज में शांति, अलगाव और सांप्रदायिक प्रेम की भावना को मजबूत करने वाले आयोजनों की जरूरत हमेशा बनी रहती है।
भाटापार रानी में यह जश्ने ईद मिलादुन्नबी स्थानीय स्तर पर धार्मिक और सामाजिक स्तुति का प्रमुख आयोजन हो रहा है। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने धार्मिक उत्साह के साथ महफिल में हिस्सा लिया और नात-ए-पाक का आनंद उठाया। पूरी महफ़िल के दौरान धार्मिक नारियों और प्रस्तुतियों से वातावरण भक्तिमय हो रहा है।

























