इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। “चिंता मत करो, बहनों की शादी मैं करवाऊंगा।” यह भरोसा दिलाने वाला 22 वर्षीय अभिषेक निषाद अब इस दुनिया में नहीं रहा। जिस भाई ने परिवार की आर्थिक परेशानियां दूर करने और अपनी बहनों की शादी कराने का सपना देखा था, उसकी जिंदगी रूस-यूक्रेन युद्ध की बमबारी ने छीन ली। रक्षा बंधन से ठीक पहले अभिषेक का पार्थिव शरीर जब देवरिया जिले के गौरी बाजार थाना क्षेत्र स्थित उसके पैतृक गांव करमेल पहुंचा तो परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं।
करीब एक महीने तक परिवार अभिषेक के सकुशल लौटने की उम्मीद लगाए बैठा रहा। लेकिन सोमवार, 24 अगस्त 2026 को उसका पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही वह उम्मीद हमेशा के लिए टूट गई। अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। घर से लेकर गांव की गलियों तक हर तरफ चीख-पुकार और गम का माहौल दिखाई दिया।
परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ उठाने विदेश गया था अभिषेक
करमेल गांव निवासी अभिषेक निषाद आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखता था। उसके पिता कौशल निषाद किसान-मजदूर हैं। परिवार की जरूरतें सीमित आमदनी में पूरी करना आसान नहीं था। ऐसे हालात में अभिषेक ने कम उम्र में ही परिवार का सहारा बनने का फैसला किया।
बताया गया कि अभिषेक रोजगार की तलाश में विदेश गया था और यूक्रेन में चालक के रूप में काम कर रहा था। वह एक पानी वाले जहाज पर ड्यूटी करता था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में मेहनत कर अभिषेक आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगा और धीरे-धीरे बहनों की शादी सहित घर की दूसरी जिम्मेदारियां पूरी करेगा।
परिवार के मुताबिक अभिषेक अपने भविष्य से ज्यादा घर के भविष्य को लेकर चिंतित रहता था। बहनों की शादी उसके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में शामिल थी। इसी भरोसे के साथ परिवार उसकी ओर देख रहा था।
युद्ध क्षेत्र में हुई बमबारी ने छीन ली जिंदगी
यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच हुए बमबारी के एक हादसे में अभिषेक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। युद्ध क्षेत्र से हजारों किलोमीटर दूर उसका परिवार लगातार उसके स्वस्थ होने की प्रार्थना करता रहा, लेकिन अंततः उन्हें बेटे की मौत की खबर मिली।
22 साल की उम्र में अभिषेक की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। जिस उम्र में युवक अपने सपनों और भविष्य की नींव तैयार करता है, उसी उम्र में अभिषेक ने परिवार के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी और अंततः विदेश की धरती पर उसकी सांसें थम गईं।
बेटे की मौत से मां का रो-रोकर बुरा हाल
अभिषेक की मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। मां बेटे को याद कर लगातार रो रही हैं। पिता कौशल निषाद के सामने एक साथ कई जिम्मेदारियां खड़ी हो गई हैं। बेटे की मौत के साथ परिवार ने अपना आर्थिक सहारा भी खो दिया है।
पिता का कहना है कि अभिषेक परिवार की उम्मीद था। वह घर की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहता था और बहनों की शादी की जिम्मेदारी उठाने का भरोसा देता था। बेटे के चले जाने के बाद अब परिवार को भविष्य की चिंता सताने लगी है।
अभिषेक की मौत केवल एक सदस्य की कमी नहीं है, बल्कि परिवार के उस सपने का भी टूटना है जिसमें एक बेटा मेहनत करके अपने माता-पिता और बहनों के जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा था।
पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो उमड़ पड़ा जनसैलाब
24 अगस्त को अभिषेक का पार्थिव शरीर जैसे ही करमेल गांव पहुंचा, बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए पहुंच गए। युवाओं और ग्रामीणों की भीड़ ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया।
घर के बाहर लोगों की भीड़ लगातार जुटी रही। हर कोई परिजनों को ढांढस बंधाने की कोशिश करता नजर आया। अभिषेक के अंतिम दर्शन के दौरान कई लोगों की आंखें नम थीं। युवाओं ने उसके सम्मान में नारे भी लगाए।
पुलिस की मौजूदगी में पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। इस दौरान गांव में शोक और भावुकता का माहौल बना रहा।
प्रशासन ने परिवार से मिलकर ली जानकारी
अभिषेक की मौत की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने भी परिवार से मुलाकात की थी। जिलाधिकारी मकसूदन हुल्गी और पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर ने परिवार से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और परिजनों से बातचीत की।
सोमवार को देवरिया सदर के एसडीएम भी मौके पर पहुंचे। इसके अलावा रुद्रपुर तहसील प्रशासन के अधिकारी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। एसडीएम रुद्रपुर जितेंद्र गुप्ता और तहसीलदार ने भी परिवार की स्थिति की जानकारी ली।
प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से परिवार को यह उम्मीद है कि उनकी मांगों और समस्याओं को शासन तक पहुंचाया जाएगा।
सरकार से मदद और बहन को नौकरी देने की मांग
अभिषेक के पिता ने सरकार से परिवार के लिए आर्थिक सहायता की मांग की है। उनका कहना है कि बेटे की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में सरकार परिवार की मदद करे, ताकि बेटियों की शादी और घर के भरण-पोषण की जिम्मेदारी संभाली जा सके।
परिवार की ओर से अभिषेक को शहीद का दर्जा देने की मांग भी की गई है। इसके साथ ही पिता ने अपनी बेटी को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी है, ताकि परिवार को भविष्य में आर्थिक सहारा मिल सके।
परिजनों का कहना है कि अभिषेक परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गया था। उसकी मौत के बाद परिवार को मदद की बेहद जरूरत है। ऐसे में सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता उनके लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
रक्षा बंधन से पहले बहनों से छिन गया भाई
अभिषेक की कहानी का सबसे भावुक पहलू उसकी बहनों से जुड़ा है। रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के रिश्ते और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस बार अभिषेक की बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के बजाय उसकी तस्वीर और यादों के सहारे रह गईं।
जिस भाई ने बहनों को उनकी शादी की चिंता न करने का भरोसा दिया था, वही भाई अब हमेशा के लिए उनसे दूर हो गया। परिवार के लिए यह दर्द शायद शब्दों में बयान करना आसान नहीं है।
करमेल से लेकर आसपास के गांवों तक शोक की लहर
अभिषेक की मौत की खबर से करमेल गांव ही नहीं, आसपास के इलाकों में भी शोक की लहर है। ग्रामीणों के मुताबिक अभिषेक मेहनती और परिवार के प्रति जिम्मेदार युवक था। कम उम्र में विदेश जाकर काम करना और परिवार के भविष्य के लिए मेहनत करना उसके संघर्ष की कहानी बताता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध की भयावहता ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि युद्ध का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। हजारों किलोमीटर दूर बैठे परिवार भी उसकी कीमत चुकाते हैं। देवरिया के करमेल गांव का यह परिवार भी अब उसी त्रासदी का दर्द झेल रहा है।
अभिषेक अपने पीछे माता-पिता, बहनों और रिश्तेदारों के लिए ऐसी यादें छोड़ गया है, जिन्हें समय भी शायद आसानी से मिटा नहीं पाएगा। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश से लौटकर वह बहनों की शादी कराएगा, घर की स्थिति सुधारेगा और माता-पिता का सहारा बनेगा। लेकिन रक्षा बंधन से पहले ही वह सपना हमेशा के लिए टूट गया।

























