साइबर ठगी के गिरोह का खुलासा, फर्जी सिम और खातों से जुटाते थे रकम; एफडी बनाकर लेते थे क्रेडिट कार्ड

साइबर ठगी के आरोपियों की पुलिस गिरफ्तारी के साथ रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान की तस्वीर और साइबर फ्रॉड से जुड़े दृश्य

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

गोंडा में साइबर थाना पुलिस ने साइबर ठगी के एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार राजस्थान से जुड़े होने का खुलासा हुआ है। पुलिस ने Cy-Vajra अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए राजस्थान के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी फर्जी सिम और बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम को खपाने का काम करते थे। ठगी से हासिल रकम को पहले बैंक खातों में जमा किया जाता था और इसके बाद उसे एफडी में बदलकर क्रेडिट कार्ड हासिल किए जाते थे। इन क्रेडिट कार्ड के जरिए महंगे आभूषण, फ्लाइट टिकट, होटल और रिसॉर्ट की बुकिंग तथा पार्टियों और ऐशो-आराम की चीजों पर रकम खर्च की जाती थी।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कमल खड़का निवासी जयपुर, राजस्थान और करण सिंह शेखावत निवासी सीकर, राजस्थान के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से एक आईफोन, एक वीवो मोबाइल, कई आधार कार्ड, पैन कार्ड और करीब एक लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस की जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन से कई बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड के डिजिटल संचालन से संबंधित जानकारी भी सामने आने की बात कही गई है।

बैंक खाते से निकाले गए थे 5.23 लाख रुपये

गोंडा में सामने आया यह साइबर ठगी का मामला मुख्यालय की आवास विकास कॉलोनी निवासी राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने साइबर थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि 4 मई 2026 की रात उनके बैंक खाते से उनकी जानकारी और सहमति के बिना 5 लाख 23 हजार 600 रुपये निकाल लिए गए।

शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी, एटीएम या बैंक पिन, पासवर्ड अथवा बैंकिंग से जुड़ी कोई गोपनीय जानकारी साझा नहीं की थी। इसके बावजूद उनके खाते से बड़ी रकम निकल गई। मामला सामने आने के बाद साइबर थाना पुलिस ने लेनदेन की तकनीकी जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि खाते से निकाली गई रकम से जुड़े सभी लेनदेन MakeMyTrip के माध्यम से किए गए थे। इसके बाद पुलिस ने लेनदेन की कड़ियों, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल शुरू की। इसी जांच के दौरान पुलिस आरोपियों तक पहुंची।

See also  लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़: 119 लोग हिरासत में, 100 लैपटॉप और 178 मोबाइल बरामद

अलग-अलग राज्यों में जाकर हासिल करते थे सिम

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने साइबर ठगी के लिए अपनाए जाने वाले तरीके के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। पुलिस का दावा है कि आरोपी अकेले नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह के तौर पर काम करते थे।

गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में जाकर मोबाइल सिम हासिल करते थे। इन सिम का इस्तेमाल विभिन्न बैंकों में डिजिटल खाते खुलवाने के लिए किया जाता था। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध से हासिल रकम को इन्हीं खातों में जमा कराया जाता था। इस तरह ठगी की रकम को मूल पीड़ित के बैंक खाते से निकालकर कई स्तरों वाले डिजिटल और बैंकिंग नेटवर्क में पहुंचाया जाता था।

जांच एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि साइबर अपराध से निकली रकम सीधे आरोपियों के व्यक्तिगत खाते में न जाकर अलग-अलग बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से घुमाई जाती है। गोंडा पुलिस की जांच में भी इसी तरह की गतिविधियों के संकेत मिलने की बात सामने आई है।

ठगी की रकम को एफडी में बदलकर लेते थे क्रेडिट कार्ड

पुलिस के अनुसार, गिरोह का तरीका केवल रकम निकालने तक सीमित नहीं था। साइबर ठगी से हासिल रकम को बैंक खातों में जमा करने के बाद उसे फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी में बदल दिया जाता था। इसके आधार पर आरोपियों को लगभग उतनी ही क्रेडिट लिमिट वाले क्रेडिट कार्ड हासिल हो जाते थे।

इस व्यवस्था के जरिए आरोपी कथित तौर पर ठगी की रकम को सीधे खर्च करने के बजाय उसे बैंकिंग उत्पादों के माध्यम से इस्तेमाल करते थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि इन क्रेडिट कार्डों से महंगे सामान और सेवाओं पर भुगतान किया जाता था।

See also  हनुमानगढ़ी विवाद पर बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान, नमाज के दावे को बताया पूरी तरह निराधार

तनिष्क के आभूषण से लेकर फ्लाइट और होटल बुकिंग तक

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने क्रेडिट कार्ड के जरिए महंगे आभूषणों की खरीदारी भी की। जांच में खास तौर पर तनिष्क के आभूषणों से जुड़े लेनदेन की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।

इसके अलावा फ्लाइट टिकट खरीदने, होटल और रिसॉर्ट की बुकिंग करने तथा रेस्टोरेंट में पार्टियां करने पर भी रकम खर्च की जाती थी। पुलिस का कहना है कि आरोपी साइबर ठगी से हासिल धन का इस्तेमाल अपने रहन-सहन और ऐशो-आराम को बनाए रखने के लिए करते थे।

इस पूरे मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि साइबर ठगी के गिरोह अब केवल बैंक खातों से रकम निकालकर उसे नकद में बदलने तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल बैंकिंग, एफडी, क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन बुकिंग और ई-कॉमर्स जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर रकम को अलग-अलग रास्तों से खपाने की कोशिश की जा सकती है।

आरोपियों के मोबाइल से कई बैंक खातों और कार्ड की जानकारी

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में करीब 6 से 7 बैंक खातों और लगभग इतने ही क्रेडिट कार्ड के डिजिटल संचालन से संबंधित जानकारी मिली है। इससे जांच टीम को गिरोह के नेटवर्क और साइबर ठगी से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों की आगे की पड़ताल में मदद मिलने की उम्मीद है।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन बैंक खातों और क्रेडिट कार्डों का इस्तेमाल किन-किन मामलों में किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह के नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा अलग-अलग राज्यों में बनाए गए बैंक खातों और मोबाइल सिम का इस्तेमाल कितने साइबर अपराधों में हुआ।

एसपी ने गठित की थीं विशेष टीमें

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने कार्रवाई के लिए विशेष टीमों का गठन किया। पुलिस के मुताबिक, अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी अजीत कुमार रजक के पर्यवेक्षण और सहायक पुलिस अधीक्षक अभिषेक दावच्यॉ के नेतृत्व में टीमों ने मामले की जांच आगे बढ़ाई।

See also  लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर चल रहा था अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क

तकनीकी जांच, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल गतिविधियों की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने बुधवार को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की गई, जिसमें कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में पहुंचाने और फिर एफडी तथा क्रेडिट कार्ड के जरिए खर्च करने का तरीका सामने आया।

बीएनएस और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई

गोंडा साइबर थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 319(2), 318(4) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस बरामद मोबाइल फोन, दस्तावेजों, बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।

जांच का दायरा बढ़ने के साथ पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है और साइबर ठगी से जुड़े अन्य मामलों में उनकी क्या भूमिका रही है। बैंक खातों तथा डिजिटल लेनदेन की जांच से गिरोह के अन्य सदस्यों और साइबर अपराध से जुड़ी रकम की आवाजाही के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।

साइबर ठगी के मामले में पुलिस की जांच जारी

गोंडा का यह मामला साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम को बैंकिंग और डिजिटल माध्यमों के जरिए वैध लेनदेन जैसा दिखाने की कोशिश की ओर भी इशारा करता है। फर्जी सिम, डिजिटल बैंक खाते, एफडी और क्रेडिट कार्ड के कथित इस्तेमाल से तैयार किया गया यह नेटवर्क पुलिस के लिए गंभीर जांच का विषय है।

फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर साइबर ठगी से जुड़े और मामलों के खुलासे तथा अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यायावर
Author: यायावर

यायावर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें