ब्यूरो रिपोर्ट
रायपुर। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व नहीं है, बल्कि यह रिश्तों की उस व्यापक भावना का भी प्रतीक है, जिसमें सुरक्षा, समर्पण और जिम्मेदारी के प्रति सम्मान जुड़ा हुआ है। इसी भावना को सार्थक रूप देने की एक सुंदर पहल रायपुर में देखने को मिली, जहां नन्हे बच्चों ने देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए अपने हाथों से राखियां तैयार कर उन्हें रक्षा सूत्र के रूप में भेजने की तैयारी की।
प्रत्युषा फाउंडेशन, रायपुर और रॉयल कॉन्वेंट हाई स्कूल, दीनदयाल उपाध्याय नगर, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पहल में स्कूली बच्चों ने बेहद उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव के साथ देश के सैनिक भाइयों के लिए सुंदर-सुंदर राखियां बनाईं। बच्चों ने केवल राखियां ही तैयार नहीं कीं, बल्कि सैनिकों के लिए तिलक करने के उद्देश्य से देश की मिट्टी, अक्षत और रोली भी पैकेट में रखी। इसके साथ ही मुंह मीठा कराने के लिए चॉकलेट भी भेजी गई।
अपने जेब खर्च से तैयार किया रक्षा सूत्र
इस पहल की सबसे खास और प्रेरणादायक बात यह रही कि बच्चों ने सैनिक भाइयों के लिए राखियां और अन्य सामग्री किसी औपचारिक आयोजन के तहत मिलने वाले संसाधनों से नहीं, बल्कि अपने जेब खर्च से तैयार की।
बच्चों ने अपनी छोटी-छोटी बचत को देश की रक्षा में जुटे जवानों के नाम समर्पित करते हुए यह संदेश दिया कि देश के सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना उम्र की मोहताज नहीं होती। उनके लिए राखियां बनाते समय बच्चों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। उन्होंने अपनी कल्पना और रचनात्मकता के माध्यम से राखियों को आकर्षक रूप दिया और उनमें अपने स्नेह की भावना भी जोड़ी।
यह पहल बच्चों के लिए महज राखी बनाने की गतिविधि नहीं थी, बल्कि उन्हें देश, सैनिकों और राष्ट्रीय जिम्मेदारी के प्रति संवेदनशील बनाने का माध्यम भी बनी।
‘आपकी वजह से घरों में मनती हैं त्योहार की खुशियां’
बच्चों ने सैनिक भाइयों के नाम अपने संदेशों में भावुक शब्दों के साथ उनके त्याग और कर्तव्यनिष्ठा के प्रति आभार व्यक्त किया। बच्चों ने कहा कि जब देशवासी अपने परिवार के साथ त्योहारों की खुशियां मनाते हैं, उस समय देश की सीमाओं पर तैनात जवान अपने परिवार से दूर रहकर राष्ट्र की सुरक्षा में डटे रहते हैं।
बच्चों की भावना थी कि देश के सैनिक भाई ही वह शक्ति हैं, जिनके कारण देश के नागरिक अपने घरों में सुरक्षित वातावरण के बीच त्योहारों की खुशियां मना पाते हैं। उन्होंने सैनिकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए उनके समर्पण को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
नन्हे बच्चों द्वारा लिखे गए ये संदेश उनके मन में सैनिकों के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता की भावना को स्पष्ट करते हैं। राखियों के साथ भेजे गए ये संदेश निश्चित रूप से उन जवानों तक बच्चों की भावनाओं को पहुंचाने का माध्यम बनेंगे।
सैनिकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी फाउंडेशन ने ली
बच्चों द्वारा तैयार की गई राखियों, देश की मिट्टी, अक्षत, रोली, चॉकलेट और संदेशों को प्रत्युषा फाउंडेशन को सौंपा गया। फाउंडेशन की संस्थापिका प्रीति दास मिश्रा ने इन रक्षा सूत्रों और बच्चों के संदेशों को देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ली है।
प्रीति दास मिश्रा ने बच्चों की इस पहल को देश के रक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का सुंदर माध्यम बताया। उनका मानना है कि जब बच्चों के मन में देश और जवानों के प्रति सम्मान की भावना बचपन से विकसित होती है, तो यह भविष्य में जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
रक्षाबंधन को मिला राष्ट्रप्रेम का भाव
रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। रायपुर के इन बच्चों ने इसी भावना को देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक विस्तार दिया। उन्होंने अपने हाथों से बनाई राखियों के माध्यम से उन जवानों को अपना भाई माना, जो देश के करोड़ों नागरिकों की सुरक्षा के लिए दिन-रात कर्तव्य निभाते हैं।
इस पहल ने रक्षाबंधन के पारंपरिक भाव को राष्ट्रप्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ दिया। बच्चों की ओर से भेजा गया रक्षा सूत्र इस बात का प्रतीक बना कि देश की रक्षा करने वाले जवान भले ही अपने परिवार से हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन देश के लोगों के दिलों में उनके लिए सम्मान और अपनापन हमेशा मौजूद है।
बच्चों को किया गया प्रोत्साहित
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के उत्साह और उनकी भावना को देखते हुए प्रत्युषा फाउंडेशन की ओर से सभी बच्चों को चॉकलेट देकर प्रोत्साहित किया गया। बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बनता था। उनके लिए यह अवसर देश के सैनिकों के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने के साथ-साथ एक यादगार अनुभव भी रहा।
कार्यक्रम में प्रत्युषा फाउंडेशन की संस्थापिका प्रीति दास मिश्रा, सांस्कृतिक उपाध्यक्ष अर्चना वोरा, रॉयल कॉन्वेंट स्कूल की संचालिका श्रीमती दीपिका सोनी, प्रभारी सुनीता सेन, शिक्षिका देवला दीवान और शिक्षिका रीना सेन सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं और सभी बच्चे उपस्थित रहे।
बच्चों की पहल बनी प्रेरणा
रायपुर में आयोजित यह पहल इस बात का उदाहरण है कि देशभक्ति और सामाजिक सरोकारों को बच्चों के जीवन से जोड़ने के लिए बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। छोटे-छोटे प्रयास भी समाज में बड़ा संदेश दे सकते हैं। बच्चों ने अपने जेब खर्च से राखियां तैयार कर यह साबित किया कि देश के जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए मन में सच्ची भावना होना सबसे जरूरी है।
रक्षाबंधन के अवसर पर तैयार किए गए ये रक्षा सूत्र केवल रंग-बिरंगे धागे नहीं हैं, बल्कि इनमें बच्चों का स्नेह, सैनिकों के प्रति सम्मान और देश की सुरक्षा के लिए उनके त्याग के प्रति कृतज्ञता समाहित है।
सीमा पर तैनात जवान जब इन राखियों और बच्चों के संदेशों को देखेंगे तो उन्हें यह अहसास भी होगा कि देश की जनता उनके साथ खड़ी है। त्योहार के अवसर पर परिवार से दूर रहकर राष्ट्र की रक्षा करने वाले सैनिकों के लिए बच्चों की यह छोटी-सी पहल निश्चित रूप से भावनात्मक रूप से बड़ी मायने रखती है।
रायपुर के इन नन्हे हाथों से निकला रक्षा सूत्र अब देश की सीमाओं तक पहुंचकर उन वीर जवानों की कलाई सजाएगा, जिनकी सतर्कता और साहस की बदौलत देशवासी अपने घरों में सुरक्षित होकर त्योहारों की खुशियां मना पाते हैं।

























