बधिरता अब बाधा नहीं, आधुनिक उपचार से बच्चों के लिए खुल रही उम्मीद की नई राह

VIDYA-SHRI ENT & LASER CENTRE की Cochlear Implant प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिकित्सकों और अतिथियों के साथ संवाददाता जगदम्बा उपाध्याय की तस्वीर

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जगदम्बा उपाध्याय की रिपोर्ट

आजमगढ़ । जन्मजात अथवा गंभीर श्रवण-बाधिता से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों के लिए समय पर पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सकीय मूल्यांकन और आधुनिक उपचार उम्मीद की नई किरण बन सकते हैं। श्रवण क्षमता में गंभीर कमी केवल आवाज सुनने तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव बच्चे के भाषा-विकास, बोलने की क्षमता, शिक्षा, आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता पर भी पड़ सकता है। ऐसे में Cochlear Implant जैसी आधुनिक तकनीक चयनित मरीजों के लिए सुनने और संवाद की दुनिया से जुड़ने की महत्वपूर्ण संभावना प्रस्तुत करती है।

इसी विषय को लेकर VIDYA-SHRI ENT & LASER CENTRE, आजमगढ़ में 13 अगस्त को विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से श्रवण-बाधिता, उसकी समय रहते पहचान और Cochlear Implant जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। पहल का उद्देश्य आमजन को यह समझाना है कि गंभीर श्रवण-बाधिता के मामलों में समस्या की पहचान और उपचार के लिए अनावश्यक देरी बच्चे के विकास पर असर डाल सकती है।

श्रवण-बाधिता का असर सुनने की क्षमता से कहीं आगे

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे के समग्र विकास में सुनने की क्षमता की अहम भूमिका होती है। बच्चा अपने आसपास की आवाजों, माता-पिता की बातचीत और सामाजिक वातावरण से बहुत कुछ सीखता है। यदि उसे पर्याप्त रूप से सुनाई नहीं देता, तो भाषा और संवाद कौशल के विकास में कठिनाई आ सकती है।

यही वजह है कि माता-पिता को बच्चे की सुनने की क्षमता से संबंधित संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि बच्चा आवाज पर प्रतिक्रिया नहीं देता, नाम पुकारने पर सामान्य प्रतिक्रिया नहीं करता अथवा बोलने और भाषा सीखने में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाई देती, तो विशेषज्ञ से श्रवण परीक्षण और चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।

समय पर जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि श्रवण-बाधिता किस स्तर की है और बच्चे के लिए कौन-सा उपचार या intervention उपयुक्त रहेगा।

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क्या है Cochlear Implant?

Cochlear Implant एक आधुनिक electronic hearing device है, जिसका उपयोग गंभीर sensorineural hearing loss वाले चयनित मरीजों में किया जा सकता है, विशेषकर तब जब hearing aids से पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा हो।

हालांकि Cochlear Implant को केवल एक सर्जिकल प्रक्रिया समझना उचित नहीं है। इसके लिए मरीज का विस्तृत मूल्यांकन, उपयुक्त चयन, परिवार की counselling और उपचार के बाद लंबे समय तक rehabilitation की आवश्यकता होती है। प्रत्येक मरीज के लिए implant की आवश्यकता और उपयुक्तता अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अंतिम निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सकीय एवं audiological मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया में सामान्यतः hearing evaluation, विस्तृत audiological assessment, patient selection, counselling, Cochlear Implant surgery, implant activation एवं mapping तथा auditory और speech rehabilitation जैसे चरण शामिल होते हैं।

केवल ऑपरेशन नहीं, पूरी प्रक्रिया है महत्वपूर्ण

Cochlear Implant के बाद बच्चे को केवल उपकरण लगा देना उपचार का अंतिम चरण नहीं होता। Implant activation और mapping के बाद बच्चे को आवाजों को समझने और उनका अर्थ ग्रहण करने की दिशा में प्रशिक्षण की आवश्यकता हो सकती है।

Auditory और speech rehabilitation इस पूरी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नियमित follow-up के माध्यम से बच्चे की प्रगति का आकलन किया जाता है और आवश्यकता के अनुसार rehabilitation programme में बदलाव किया जा सकता है।

इसलिए परिवारों के लिए यह समझना आवश्यक है कि Cochlear Implant का परिणाम केवल surgery पर निर्भर नहीं करता। सही patient selection, विशेषज्ञों की टीम, उचित mapping, नियमित follow-up और दीर्घकालिक rehabilitation भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

बच्चों में Early Intervention क्यों जरूरी?

बच्चों में श्रवण-बाधिता की जितनी जल्दी पहचान होती है, उतनी जल्दी आवश्यक intervention और rehabilitation की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। प्रारंभिक अवस्था में उचित सहायता मिलने से बच्चे को auditory और speech development के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

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माता-पिता को यह सोचकर इंतजार नहीं करना चाहिए कि बच्चा उम्र बढ़ने के साथ स्वयं सुनने या बोलने लगेगा। यदि सुनने से संबंधित कोई संदेह है तो विशेषज्ञ से जांच कराना अधिक सुरक्षित और व्यावहारिक कदम है।

विशेषज्ञ मूल्यांकन के बाद यह तय किया जा सकता है कि बच्चे को hearing aid से लाभ मिल सकता है अथवा वह Cochlear Implant के लिए उपयुक्त उम्मीदवार है। प्रत्येक बच्चे की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी उपचार का निर्णय व्यक्तिगत चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद ही किया जाना चाहिए।

पूर्वांचल के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण पहल

VIDYA-SHRI ENT & LASER CENTRE, आजमगढ़ की पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि पूर्वांचल क्षेत्र के मरीजों को आधुनिक ENT और hearing care की सुविधाओं के बारे में उनके नजदीकी क्षेत्र में जानकारी और चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किया जाए।

अक्सर गंभीर श्रवण-बाधिता से संबंधित उपचार के लिए मरीजों और उनके परिवारों को बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर आधुनिक ENT care, audiology assessment, patient counselling और rehabilitation से संबंधित सुविधाओं की उपलब्धता मरीजों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

Cochlear Implant के क्षेत्र में surgery के साथ audiology, mapping और long-term auditory एवं speech rehabilitation को समान महत्व दिया जाना आवश्यक है। इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ मरीजों और उनके परिवारों को उपचार की पूरी प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना इस पहल का अहम उद्देश्य है।

माता-पिता के लिए उम्मीद का संदेश

किसी माता-पिता के लिए यह क्षण अत्यंत भावुक और आनंददायक हो सकता है, जब उनका बच्चा उनकी आवाज सुनने, पहचानने और धीरे-धीरे अपनी बात शब्दों में व्यक्त करने की दिशा में आगे बढ़ता है। श्रवण-बाधिता के कारण संवाद की दुनिया से दूर रहने वाले बच्चे के लिए उचित उपचार और rehabilitation नई संभावनाओं का द्वार खोल सकते हैं।

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Cochlear Implant को इसी संदर्भ में केवल एक medical device के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उपयुक्त मरीज में यह सुनने और संवाद की दुनिया से जुड़ने की एक महत्वपूर्ण चिकित्सा संभावना हो सकती है। हालांकि इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा सही मूल्यांकन और उपचार के बाद निरंतर rehabilitation जरूरी है।

सही जानकारी और समय पर उपचार पर जोर

VIDYA-SHRI ENT & LASER CENTRE की ओर से दिए गए संदेश का मूल भाव यही है कि उद्देश्य केवल ऑपरेशन करना नहीं, बल्कि श्रवण-बाधित बच्चे को सुनने, समझने और अपनी बात कहने का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में समग्र प्रयास करना है।

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर diagnosis, उचित medical intervention और comprehensive rehabilitation को एक साथ लेकर चलना जरूरी है। परिवार यदि शुरुआती संकेतों को पहचानकर समय रहते विशेषज्ञ की सलाह लेते हैं तो बच्चे के लिए उपलब्ध उपचार विकल्पों का उचित मूल्यांकन किया जा सकता है।

आजमगढ़ में आयोजित यह पहल इसी व्यापक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। इसका संदेश स्पष्ट है—श्रवण-बाधिता को अनदेखा करने के बजाय समय रहते उसकी पहचान और विशेषज्ञ उपचार की ओर बढ़ना चाहिए। आधुनिक चिकित्सा तकनीक, विशेषज्ञ देखभाल और निरंतर rehabilitation के समन्वय से श्रवण-बाधित बच्चों के बेहतर भविष्य की संभावनाओं को मजबूत किया जा सकता है।

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Author: यायावर

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