दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा सत्र के बीच सत्तारूढ़ भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा पीडीए की नई व्याख्या को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का पीडीए कोई स्थायी राजनीतिक अवधारणा नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार बदलने वाला ऐसा राजनीतिक प्रयोग है, जिसकी परिभाषा समय-समय पर बदलती रहती है।
उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी जनता को भ्रमित करने के लिए लगातार नए राजनीतिक नारे गढ़ रही है, लेकिन प्रदेश की जनता अब इन नारों के पीछे की वास्तविकता समझ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव ही नहीं, बल्कि आने वाले लंबे समय तक प्रदेश की जनता भाजपा के विकास और सुशासन के साथ खड़ी रहेगी।
पीडीए की बदलती परिभाषा पर उठाए सवाल
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी द्वारा प्रस्तुत पीडीए की परिभाषा लगातार बदलती रही है। कभी इसका अर्थ पिछड़ा वर्ग बताया जाता है, कभी पीड़ित वर्ग और अब इसमें पंडित को भी शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बदलती राजनीतिक शब्दावली से स्पष्ट होता है कि विपक्ष के पास कोई स्पष्ट नीति या स्थायी विचारधारा नहीं है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वास्तव में यह पीडीए “परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी” का प्रतीक बन चुका है, जिसका केंद्र केवल एक परिवार और उसका राजनीतिक हित है। उनका कहना था कि समाजवादी पार्टी की राजनीति प्रदेश के व्यापक विकास की बजाय सीमित राजनीतिक हितों के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
2027 और 2047 को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा
उपमुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में भी भाजपा को जनता का समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ब्राह्मण, पिछड़े, दलित और अन्य वर्ग अब जातीय नारों के बजाय विकास, सुरक्षा और सुशासन के आधार पर निर्णय ले रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी केवल नारों की राजनीति करती है, जबकि भाजपा ने पिछले वर्षों में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, गरीब कल्याण और विकास योजनाओं पर लगातार कार्य किया है। उनके अनुसार यही कारण है कि प्रदेश की जनता भाजपा के साथ मजबूती से खड़ी है।
समाजवादी पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप
केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर कानून-व्यवस्था को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का इतिहास अपराध, माफिया तत्वों और दंगों की राजनीति से जुड़ा रहा है। उनका कहना था कि भाजपा सरकार ने प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है और कानून का राज स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि अब प्रदेश की जनता पहले जैसी राजनीति स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। जनता विकास, पारदर्शिता और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है और यही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है।
राम मंदिर और विपक्ष के विरोध पर प्रतिक्रिया
संसद परिसर में राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर विपक्ष द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन पर भी उपमुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार भगवान राम और सनातन आस्था से जुड़े विषयों पर राजनीति करता रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जो दल पहले राम मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे, वे अब जनता के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं। उनके अनुसार प्रदेश की जनता इन राजनीतिक प्रयासों को अच्छी तरह समझती है और अब ऐसे मुद्दों पर भ्रमित होने वाली नहीं है।
संभल हिंसा की रिपोर्ट का किया उल्लेख
उपमुख्यमंत्री ने विधानसभा में पेश की गई संभल हिंसा से संबंधित रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद प्रदेश की जनता को पूरी जानकारी मिलेगी कि हिंसा के दौरान क्या परिस्थितियां बनी थीं।
उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट से कई ऐसे तथ्य सामने आएंगे, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि हिंसा के दौरान किन परिस्थितियों में घटनाएं हुईं और किस प्रकार कुछ राजनीतिक दलों पर दंगाइयों का संरक्षण देने के आरोप लगाए गए। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित विपक्षी दलों की ओर से अलग-अलग समय पर अपना पक्ष भी रखा जाता रहा है।
विधानसभा में विपक्ष के व्यवहार पर जताई नाराजगी
उपमुख्यमंत्री ने विधानसभा के भीतर समाजवादी पार्टी के सदस्यों के व्यवहार की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सदन लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां गंभीर मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष ने हंगामा कर सदन की गरिमा को प्रभावित किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन के दौरान जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं था। उन्होंने ऐसे आचरण की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जनता लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा करती है।
सुरेश खन्ना ने भी साधा विपक्ष पर निशाना
प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने भी समाजवादी पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान पूरा प्रदेश विपक्ष का रवैया देख रहा था। उनके अनुसार यदि विपक्ष वास्तव में चर्चा करना चाहता तो सदन में बहस करता, लेकिन प्रदर्शन और प्लेकार्ड के माध्यम से केवल राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मुद्दों पर सार्थक चर्चा सबसे प्रभावी माध्यम है, जबकि सदन में व्यवधान उत्पन्न करना जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
ब्राह्मण सम्मेलन और पीडीए पर भी टिप्पणी
सुरेश खन्ना ने समाजवादी पार्टी के ब्राह्मण सम्मेलन और पीडीए की नई व्याख्या पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पहले पीडीए को पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग का मंच बताया जाता था, लेकिन अब इसमें पंडित शब्द जोड़ दिया गया है।
उन्होंने इसे राजनीतिक अवसरवाद बताते हुए कहा कि यह लगातार बदलती रणनीति दर्शाती है। उनके अनुसार सकारात्मक राजनीति करने वाले दल जनता के बीच विश्वास अर्जित करते हैं, जबकि केवल राजनीतिक समीकरण बदलने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता।
प्रदेश की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। दोनों दल एक-दूसरे की नीतियों, राजनीतिक रणनीतियों और जनाधार को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
एक ओर भाजपा सरकार विकास, कानून-व्यवस्था और सुशासन को अपनी उपलब्धि बताकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी विभिन्न सामाजिक वर्गों को साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति और अधिक गर्म होने के संकेत मिल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पीडीए को लेकर शुरू हुई बहस अब केवल एक राजनीतिक नारे तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच वैचारिक और चुनावी संघर्ष का प्रमुख मुद्दा बनती जा रही है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के ताजा बयान इस बात का संकेत हैं कि आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक दल सामाजिक समीकरणों, विकास और वैचारिक मुद्दों पर जनता के बीच अपनी-अपनी रणनीति को और अधिक आक्रामक तरीके से पेश करेंगे।

























