साइबर ठगी: 786 नंबर के नोट के बदले 14 लाख का झांसा, मजदूर से QR कोड स्कैन कराकर ऐंठे 10 हजार रुपये

रिपोर्टर रामकीर्ति यादव की तस्वीर के साथ साइबर ठगी का प्रतीकात्मक फीचर ग्राफिक, जिसमें 786 नंबर के नोट, यूपीआई क्यूआर कोड, एयरपोर्ट और साइबर अपराध को दर्शाया गया है।

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रामकीर्ति यादव की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के खेतासराय थाना क्षेत्र में साइबर ठगों ने 786 सीरियल नंबर वाले नोट की कथित ऊंची कीमत दिलाने का झांसा देकर एक मजदूर से 10 हजार रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने पहले 14 लाख रुपये देने का भरोसा दिलाया, फिर एयरपोर्ट पर फंसने की कहानी सुनाकर QR कोड स्कैन करवाया और रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा ली। जब बाद में आरोपियों ने 18 हजार रुपये और मांगे, तब पीड़ित को अपने साथ हुई साइबर ठगी का एहसास हुआ। मामले की शिकायत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज कराई गई है।

खेतासराय के मजदूर को बनाया साइबर गिरोह का निशाना

खेतासराय थाना क्षेत्र के जमदहाँ गांव निवासी इंदु बिन्द एक बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान पर मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। कुछ दिन पहले उनके मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि यदि किसी के पास 786 सीरियल नंबर वाला नोट है तो उसकी कीमत लाखों रुपये मिल सकती है।

उसने खुद को ऐसे नोटों का खरीदार बताते हुए कहा कि संग्रहकर्ताओं के बीच इनकी भारी मांग है। इंदु बिन्द ने बताया कि उनके पास ऐसा नोट मौजूद है। इसके बाद आरोपी ने 14 लाख रुपये में नोट खरीदने का प्रस्ताव दिया।

विश्वास जीतने के लिए एयरपोर्ट पहुंचने की बनाई कहानी

पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए ठग ने दोबारा फोन कर बताया कि वह हवाई जहाज से वाराणसी पहुंच चुका है और नोट खरीदने के लिए आ रहा था। उसने दावा किया कि एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान उसे रोक लिया गया है और कुछ औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही बाहर निकल पाएगा।

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अपनी बात को सच साबित करने के लिए आरोपी ने एयरपोर्ट का एक वीडियो भी भेजा। वीडियो देखने के बाद पीड़ित को लगा कि खरीदार वास्तव में वाराणसी पहुंच चुका है।

QR कोड स्कैन कराकर बैंक से ट्रांसफर कराए 10 हजार रुपये

इसके बाद आरोपी ने कहा कि एयरपोर्ट से बाहर आने के लिए तत्काल 10 हजार रुपये जमा कराने होंगे। उसने मोबाइल पर एक QR कोड भेजा और भरोसा दिलाया कि बाहर निकलते ही 14 लाख रुपये का भुगतान कर देगा।

इंदु बिन्द बैंक पहुंचे और पूरी बात बैंक के कैशियर को बताई। कैशियर ने अपने यूपीआई से QR कोड स्कैन कर 10 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।

18 हजार रुपये और मांगने पर खुली ठगी की पोल

रुपये भेजने के बाद पीड़ित पूरे दिन इंतजार करता रहा, लेकिन कोई खरीदार नहीं पहुंचा। शाम को दोबारा फोन करने पर आरोपी ने कहा कि अब प्रक्रिया पूरी करने के लिए 18 हजार रुपये और भेजने होंगे। इस पर पीड़ित को संदेह हुआ और उसने पूरी घटना दुकान मालिक को बताई।

दुकान मालिक ने इसे साइबर ठगी बताते हुए तुरंत और पैसे भेजने से रोका तथा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।

साइबर पुलिस कर रही जांच

शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। साइबर थाना प्रभारी तारिक ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम किस खाते में ट्रांसफर हुई।

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पुलिस की अपील: लालच में आकर ऑनलाइन भुगतान न करें

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के झांसे में आकर QR कोड स्कैन न करें और न ही यूपीआई के माध्यम से कोई भुगतान करें। यदि कोई व्यक्ति किसी वस्तु के बदले असामान्य रूप से अधिक कीमत देने का दावा करे या पहले पैसे जमा कराने की शर्त रखे, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानें।

साइबर ठग अपना रहे हैं नए-नए तरीके

विशेषज्ञों के अनुसार साइबर अपराधी अब दुर्लभ नोट, पुराने सिक्के, एंटीक सामान, लॉटरी, निवेश और इनाम जैसी योजनाओं का लालच देकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे मामलों में अपराधी पहले विश्वास कायम करते हैं और फिर किसी बहाने अग्रिम भुगतान मांग लेते हैं।

यदि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें या www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन रिपोर्ट करें। समय पर शिकायत करने से ठगी गई रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

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Author: यायावर

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