अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला : रिमांड में आरोपी से कई अहम सुराग, रकम के बंटवारे और निवेश की परतें खंगाल रही पुलिस
रिपोर्ट: कमलेश कुमार चौधरी
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस रिमांड पर लिए गए मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ के दौरान ऐसे कई अहम तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर जांच एजेंसियां पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी द्वारा दी गई प्रत्येक जानकारी का दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि जांच निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित रहे।
शुक्रवार सुबह पुलिस टीम अविनाश शुक्ला को रिमांड पर लेकर कौशलपुरी स्थित एक योगा सेंटर सहित कई अन्य स्थानों पर पहुंची। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने नकदी के साथ कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए हैं। अधिकारियों के अनुसार बरामद सामग्री की गहन जांच की जा रही है और उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन की भी पड़ताल शुरू कर दी गई है।
जिले के बाहर गिनी जाती थी रकम, कई स्तरों पर हो रहा था सत्यापन
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में संकेत मिले हैं कि मंदिर के दानपात्र से कथित रूप से निकाली गई रकम को सीधे उपयोग में नहीं लाया जाता था। पहले उसे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाता और फिर सप्ताह में एक दिन अयोध्या जिले के बाहर पूरी राशि की गिनती की जाती थी। इसके बाद कथित तौर पर संबंधित लोगों के बीच धन का बंटवारा किया जाता था।
पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि रकम के उपयोग के लिए अलग-अलग माध्यम अपनाए जाते थे। जमीन की खरीद, वाहन लेने और अन्य निवेश संबंधी लेनदेन विभिन्न तरीकों से किए जाते थे, जिससे आर्थिक गतिविधियां सामान्य दिखाई दें और किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न न हो। हालांकि इन सभी तथ्यों की अभी जांच जारी है और पुलिस प्रत्येक पहलू का साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन कर रही है।
14 कोसी परिक्रमा मार्ग के पास बताया बंटवारे का स्थान
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी अविनाश शुक्ला ने उस स्थान की भी पहचान कराई, जहां कथित तौर पर चोरी की रकम का बंटवारा किया जाता था। पुलिस के अनुसार यह स्थान 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के आसपास बताया गया है। जांच में सामने आए नामों के आधार पर पुलिस कई लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
जांच के दौरान अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, कमलेश पांडेय और टीनू यादव सहित कुल आठ लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि इन सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी। आरोपी की निशानदेही पर संबंधित स्थान से कुछ महत्वपूर्ण सामग्री भी बरामद की गई है, जिसे फोरेंसिक और तकनीकी जांच के लिए भेजा जा रहा है।
प्रतापगढ़ तक पहुंची जांच की कड़ी
रिमांड के दौरान आरोपी ने प्रतापगढ़ जिले के महेशगंज थाना क्षेत्र के बाबूपुर नरियावा गांव में खरीदी गई एक मोटरसाइकिल के संबंध में भी जानकारी दी। इसके बाद अयोध्या पुलिस की टीम वहां पहुंची और वाहन की बरामदगी के साथ उससे जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन का सत्यापन शुरू कर दिया।
अधिकारियों का कहना है कि जांच केवल बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि कथित रूप से चोरी की गई रकम का उपयोग किन-किन माध्यमों से किया गया और क्या उससे कोई संपत्ति या अन्य सामान खरीदा गया था।
20 लाख रुपये नकद और विदेशी मुद्रा बरामद
पुलिस के मुताबिक आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से करीब 20 लाख रुपये नकद तथा 1121 अमेरिकी डॉलर बरामद किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कौशलपुरी स्थित एक आवास पर कथित तौर पर धन के बंटवारे से जुड़ी गतिविधियां संचालित होती थीं।
एंटी करप्शन कोर्ट ने विवेचक की ओर से प्रस्तुत आवेदन पर आरोपी की 24 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की थी। इसी अवधि में पुलिस ने कई स्थानों पर जाकर साक्ष्य जुटाने और आरोपी से पूछताछ का सिलसिला जारी रखा। अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान मिली जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आर्थिक गतिविधियों और सोशल मीडिया पर भी नजर
जांच एजेंसियां अब आरोपी के बैंक खातों, आर्थिक लेनदेन, चल-अचल संपत्तियों और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी गहन जांच कर रही हैं। प्रतापगढ़ के महेशगंज क्षेत्र में स्थानीय पुलिस आरोपी के गांव पहुंचकर उसके पुराने रिकॉर्ड और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी एकत्र कर रही है।
इसके साथ ही सोशल मीडिया पर नोटों के बंडलों के साथ वायरल हुए एक वीडियो की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो कब बनाया गया, उसमें दिखाई गई नकदी का स्रोत क्या था और उसका इस मामले से कोई संबंध है या नहीं।
साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच प्रारंभिक चरण में है और किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आरोपी द्वारा पूछताछ में दी गई जानकारी का स्वतंत्र साक्ष्यों, दस्तावेजों और तकनीकी जांच के माध्यम से सत्यापन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। वहीं इस बहुचर्चित मामले में आगे और भी खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।









