अपराध

ट्रक ड्राइवर से बना यूपी का मोस्ट वॉन्टेड डॉन, आखिर कौन है बदन सिंह ‘बद्दो’?

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में कई ऐसे नाम रहे हैं जिन्होंने वर्षों तक पुलिस और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की। लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जो अपराध के साथ-साथ रहस्य का भी पर्याय बन जाते हैं। बदन सिंह उर्फ ‘बद्दो’ ऐसा ही एक नाम है।

हत्या, रंगदारी, अवैध कब्जे, गैंगवार और हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर आरोपों से घिरा बदन सिंह बद्दो पिछले कई वर्षों से फरार है। उसके सिर पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित है, लेकिन इसके बावजूद वह पुलिस की पकड़ से बाहर है। यही वजह है कि आज भी उसका नाम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित अपराधियों में गिना जाता है।

पंजाब से मेरठ तक का सफर

बदन सिंह मूल रूप से पंजाब का रहने वाला बताया जाता है। करीब तीन दशक पहले वह मेरठ आकर बस गया था। परिवार का मुख्य व्यवसाय ट्रक संचालन था और घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। बद्दो भी ट्रक चलाकर परिवार की मदद करता था। हालांकि वह जल्दी अमीर बनना चाहता था। इसी महत्वाकांक्षा ने उसे अपराध की दुनिया की ओर धकेल दिया।

शुरुआत में उसने शराब तस्करी के जरिए अतिरिक्त कमाई करनी शुरू की। कुछ समय बाद यह अवैध कारोबार बढ़ता गया और वह संगठित अपराध से जुड़ गया। यहीं से उसके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल गई।

पहला हत्या कांड और अपराध की दुनिया में पहचान

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बद्दो का नाम पहली बार वर्ष 1988 में एक हत्या के मामले में सामने आया। मेरठ में जमीन विवाद के दौरान हुई इस घटना ने उसे अपराध जगत में पहचान दिलाई।

इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। धीरे-धीरे उसका नाम हत्या, रंगदारी, अवैध कब्जे और आपराधिक षड्यंत्र जैसे मामलों में सामने आने लगा। समय के साथ उसका नेटवर्क मेरठ से निकलकर दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड तक फैल गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसका प्रभाव लगातार बढ़ता गया।

एक थप्पड़ का बदला बना हत्या की वजह

बदन सिंह बद्दो के आपराधिक इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में वर्ष 1996 का वकील हत्याकांड शामिल है। 10 अगस्त 1996 को मेरठ के टीपी नगर क्षेत्र में वकील रविंद्र सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया जाता है कि यह वारदात एक दिन पहले हुए विवाद और अपमान का बदला लेने के लिए की गई थी।

इस मामले ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने बद्दो को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। यह उसके खिलाफ ऐसा प्रमुख मामला बना जिसमें उसे न्यायालय से सजा मिली।

कैसे बढ़ा बद्दो का दबदबा?

1990 के दशक के बाद बद्दो का प्रभाव तेजी से बढ़ने लगा। अपराध से अर्जित धन और बढ़ते नेटवर्क ने उसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा नाम बना दिया।

भूमि कारोबार, विवादित संपत्तियों पर कब्जा और रंगदारी वसूली के मामलों में उसका नाम अक्सर चर्चा में रहने लगा। उसके पास धन, संसाधन और प्रभाव तीनों बढ़ते गए।

इसी दौर में उसने आलीशान जीवनशैली अपनाई। महंगी गाड़ियां, बड़े ठिकाने और प्रभावशाली लोगों से संपर्क उसे अन्य अपराधियों से अलग पहचान देने लगे। कई लोग उसे अपराधी कम और किसी बड़े कारोबारी की तरह देखते थे। हालांकि उसके खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ती रही।

गैंगवार और खूनी संघर्ष

अपराध की दुनिया में बढ़ते प्रभाव के साथ दुश्मन भी बढ़ते गए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वर्चस्व की लड़ाई के दौरान कई गैंगों के साथ उसका टकराव हुआ।

भूमि विवाद, केबल कारोबार और रंगदारी के नेटवर्क पर नियंत्रण को लेकर कई बार हिंसक संघर्ष हुए। इन गैंगवारों ने पूरे क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव का माहौल बनाए रखा। पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम कई चर्चित आपराधिक मामलों में सामने आया। यही वजह रही कि वह धीरे-धीरे कानून प्रवर्तन एजेंसियों की प्राथमिक सूची में शामिल हो गया।

केबल कारोबार में भी आया नाम

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में केबल नेटवर्क कारोबार को लेकर वर्षों तक संघर्ष चलता रहा। इस दौरान कई हिंसक घटनाएं हुईं। एक चर्चित हत्या कांड में भी बद्दो का नाम सामने आया था। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और अपराध जगत के गठबंधनों पर नए सवाल खड़े कर दिए थे। यह मामला लंबे समय तक चर्चा में बना रहा और जांच एजेंसियों की निगाहें बद्दो पर टिक गईं।

संजीव जीवा हत्याकांड के बाद बढ़ी मुश्किलें

साल 2023 में लखनऊ की अदालत परिसर में हुए संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। जांच के दौरान कई नए पहलुओं की पड़ताल की गई। इसी प्रकरण के बाद बद्दो का नाम एक बार फिर सुर्खियों में आया। पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी और उसके खिलाफ पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया। विभिन्न एजेंसियों ने कई राज्यों में अभियान चलाए, लेकिन वह हाथ नहीं आया।

बुलडोजर कार्रवाई से लगा बड़ा झटका

राज्य में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान बद्दो की संपत्तियां भी जांच के दायरे में आईं। प्रशासन ने उसके अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की। सार्वजनिक भूमि पर बने निर्माणों को ध्वस्त किया गया और कई भूखंडों को कब्जा मुक्त कराया गया। इस कार्रवाई को अपराध से अर्जित संपत्तियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा माना गया।

आखिर कहां है बदन सिंह बद्दो?

आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि बदन सिंह बद्दो आखिर कहां छिपा है? वर्षों से फरार चल रहे इस गैंगस्टर को पकड़ने के लिए कई बार विशेष अभियान चलाए गए। पुलिस ने देश के अलग-अलग हिस्सों में उसकी तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

समय-समय पर उसके विदेश में होने की भी चर्चाएं सामने आती रही हैं। कुछ रिपोर्टों में मलेशिया समेत अन्य देशों में उसके छिपे होने की आशंका जताई गई, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। यही रहस्य उसकी कहानी को और अधिक चर्चित बना देता है।

अपराध और फरारी की अनसुलझी कहानी

बदन सिंह बद्दो की कहानी केवल एक अपराधी की कहानी नहीं है। यह उस सफर की कहानी भी है जिसमें एक साधारण ट्रक चालक अपराध की दुनिया में प्रवेश कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा नाम बन गया। उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे, वर्षों की फरारी, करोड़ों की संपत्तियां और पुलिस की लगातार तलाश आज भी चर्चा का विषय हैं। सिर पर पांच लाख रुपये का इनाम होने के बावजूद उसका पकड़ा न जाना कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

जब तक बदन सिंह बद्दो गिरफ्तार नहीं होता, तब तक उसकी कहानी उत्तर प्रदेश के अपराध इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में गिनी जाती रहेगी।

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