बबीता को किसका फोन आया था? 29 मई की रात के बाद आखिर कहां गायब हो गई MBA छात्रा, रहस्य बरकरार
चुन्नीलाल प्रधान की खास रिपोर्ट
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से सामने आया एक रहस्यमय मामला पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। दयारा बुग्याल ट्रेकिंग पर गई 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे 29 मई की रात से लापता है। कई दिनों से लगातार चल रहे व्यापक सर्च ऑपरेशन के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इस घटना ने न केवल प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि परिवार और स्थानीय लोगों के मन में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर 29 मई की रात बबीता को किसका फोन आया था और उस फोन कॉल के बाद ऐसा क्या हुआ कि वह टेंट से बाहर निकली और फिर कभी वापस नहीं लौटी?ट्रेकिंग के लिए निकली थी बबीता
जानकारी के अनुसार, बबीता पांडे अपने दो साथियों के साथ उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल क्षेत्र में ट्रेकिंग के लिए गई थी। 25 मई को शुरू हुई यह यात्रा सामान्य पर्यटन कार्यक्रम की तरह थी। दयारा बुग्याल समुद्र तल से लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है और रोमांच पसंद युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय माना जाता है। परिवार को उम्मीद थी कि ट्रेक पूरा करने के बाद बबीता सुरक्षित घर लौट आएगी, लेकिन 29 मई की रात के बाद से उसकी कोई खबर नहीं मिली। देखते ही देखते यह यात्रा एक रहस्यमयी गुमशुदगी में बदल गई।आखिरी बार कब और कहां देखी गई थी?
बताया जाता है कि 29 मई की रात बबीता अपने दोनों साथियों के साथ गोई नामक स्थान पर बने टेंट में रुकी हुई थी। रात के समय उसके मोबाइल पर किसी का फोन आया। साथियों के अनुसार, कॉल आने के बाद बबीता कुछ देर तक बातचीत करती रही और फिर टेंट से थोड़ी दूरी पर चली गई। उस समय किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह बातचीत इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन जाएगी। दोस्तों का कहना है कि बातचीत के बाद वे दोनों सो गए। जब सुबह करीब चार बजे उनकी आंख खुली तो बबीता टेंट में मौजूद नहीं थी। पहले उन्हें लगा कि वह आसपास होगी, लेकिन काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला।बैग टेंट में मिला, लेकिन मोबाइल और बबीता गायब
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बबीता का बैग और अन्य सामान टेंट में ही मिला। यदि वह कहीं दूर जाने की योजना बनाकर गई होती तो संभवतः अपना सामान भी साथ ले जाती। लेकिन यहां स्थिति अलग थी। सामान टेंट में मौजूद था, जबकि बबीता और उसका मोबाइल फोन दोनों गायब थे। उसके नंबर पर लगातार कॉल किए गए, लेकिन फोन बंद मिला। यही तथ्य जांच एजेंसियों को लगातार उलझा रहा है।फोन कॉल बना जांच का केंद्र
अब पूरी जांच उस रहस्यमय फोन कॉल के इर्द-गिर्द घूम रही है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि कॉल किसने किया था, बातचीत कितनी देर चली थी और उसमें ऐसा क्या कहा गया था जिसने बबीता को देर रात टेंट से बाहर जाने के लिए मजबूर किया। जांच एजेंसियां कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से उस व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जिसने आखिरी बार बबीता से संपर्क किया था। हालांकि अभी तक पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।कई एजेंसियां चला रही हैं सर्च ऑपरेशन
बबीता की तलाश के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर अभियान छेड़ रखा है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्थानीय पुलिस, वन विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों की टीमें लगातार क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। खड़ी पहाड़ियों, गहरी खाइयों, जंगलों, चट्टानी इलाकों और जलस्रोतों की बार-बार जांच की जा रही है। ड्रोन और आधुनिक उपकरणों का भी उपयोग किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित सुराग को नजरअंदाज न किया जाए। बचाव दल टेंट के आसपास के क्षेत्रों को कई बार खंगाल चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है।अनहोनी की आशंका भी जांच के दायरे में
पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रेकिंग के दौरान दुर्घटनाओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि जांच टीम हर पहलू पर काम कर रही है। आसपास मौजूद गहरे गड्ढों, ढलानों और जलभराव वाले स्थानों की भी तलाशी ली गई है। कई स्थान ऐसे हैं जहां रात के समय फिसलन या रास्ता भटकने का खतरा बना रहता है। हालांकि अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे किसी दुर्घटना की पुष्टि हो सके। यही वजह है कि पुलिस किसी भी संभावना को खारिज नहीं कर रही है।परिवार के सामने भी खड़े हुए कई सवाल
जांच के दौरान एक और तथ्य सामने आया जिसने मामले को और जटिल बना दिया। परिजनों का कहना है कि बबीता ने घर से निकलते समय बताया था कि वह अपनी दो महिला मित्रों के साथ घूमने जा रही है। लेकिन बाद में पता चला कि वह दो पुरुष साथियों के साथ ट्रेकिंग पर गई थी। अब यह सवाल भी जांच का हिस्सा बन गया है कि आखिर बबीता ने परिवार को वास्तविक जानकारी क्यों नहीं दी थी। क्या इसके पीछे कोई निजी कारण था या कोई और वजह? पुलिस इस पहलू की भी गहराई से पड़ताल कर रही है।हर गुजरते दिन के साथ बढ़ रही बेचैनी
समय बीतने के साथ परिवार की चिंता और बढ़ती जा रही है। कई दिनों से चल रहे सर्च ऑपरेशन के बावजूद कोई ठोस सुराग नहीं मिलने से परिजन बेहद परेशान हैं। वहीं स्थानीय प्रशासन का कहना है कि तलाश अभियान में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है और उपलब्ध सभी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।अब भी अनुत्तरित हैं कई सवाल
इस पूरे मामले में अभी भी कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब नहीं मिले हैं।- बबीता को फोन किसका आया था?
- फोन पर क्या बातचीत हुई थी?
- वह रात में टेंट से बाहर क्यों निकली?
- उसका मोबाइल फोन कहां है?
- क्या वह किसी दुर्घटना का शिकार हुई या फिर इसके पीछे कोई दूसरा कारण है?
बबीता पांडे लापता मामला: सवाल-जवाब
बबीता पांडे कौन हैं?
बबीता पांडे 24 वर्षीय एमबीए छात्रा हैं, जो उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल क्षेत्र में ट्रेकिंग के दौरान लापता हो गईं।
बबीता कब से लापता हैं?
बबीता पांडे 29 मई की रात से लापता बताई जा रही हैं। सुबह करीब चार बजे उनके साथी जागे तो वह टेंट में मौजूद नहीं थीं।
29 मई की रात क्या हुआ था?
साथियों के अनुसार, रात में बबीता के मोबाइल पर किसी का फोन आया था। वह बात करते हुए टेंट से थोड़ी दूर गईं और उसके बाद वापस नहीं लौटीं।
क्या बबीता का सामान मिला है?
बबीता का बैग और अन्य सामान टेंट में मिला है, लेकिन उनका मोबाइल फोन और वह खुद अब तक नहीं मिली हैं।
तलाश अभियान कौन चला रहा है?
बबीता की तलाश में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग और अन्य एजेंसियां लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
पुलिस जांच का मुख्य बिंदु क्या है?
जांच का मुख्य बिंदु वह रहस्यमय फोन कॉल है, जो बबीता को लापता होने से पहले आया था। पुलिस कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।
अब तक बबीता का कोई सुराग मिला है?
अब तक बबीता पांडे का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। प्रशासन लगातार तलाश अभियान जारी रखे हुए है।








