संत राम बी.ए. के विचार आज भी सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव, 38वें परिनिर्वाण दिवस पर लिया गया जनजागरण का संकल्प
जाति-पांति के बंधनों को तोड़ने और महिला शिक्षा को बढ़ावा देने वाले महान समाज सुधारक को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
लखनऊ। समाज में समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय की अलख जगाने वाले महान समाज सुधारक श्रद्धेय संत राम बी.ए. के 38वें परिनिर्वाण दिवस पर राजधानी लखनऊ में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संत राम बी.ए. जन चेतना समिति के तत्वावधान में हरिहर नगर, इंदिरा नगर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, महिलाओं और युवाओं ने भाग लेकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम केवल एक श्रद्धांजलि सभा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे सामाजिक जागरूकता और जनचेतना के अभियान के रूप में भी देखा गया। वक्ताओं ने संत राम बी.ए. के जीवन, उनके संघर्षों और समाज सुधार के लिए किए गए योगदान को याद करते हुए उनके विचारों को वर्तमान समय में और अधिक प्रासंगिक बताया।
माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत श्रद्धेय संत राम बी.ए. के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा उनके द्वारा दिखाए गए सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर वातावरण पूरी तरह श्रद्धा और सम्मान से ओत-प्रोत दिखाई दिया। कार्यक्रम स्थल पर संत राम बी.ए. के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों और उनके विचारों को प्रदर्शित किया गया, जिससे युवाओं को उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को समझने का अवसर मिला।
सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे संत राम बी.ए.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समझदार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक सतीश चंद्र प्रजापति ने कहा कि संत राम बी.ए. केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि एक सशक्त विचारधारा के प्रतिनिधि थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक विषमताओं को समाप्त करने और समाज में समानता स्थापित करने के लिए समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि संत राम बी.ए. ने ऐसे समय में सामाजिक सुधार की मशाल जलाई, जब जातिगत भेदभाव समाज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था। उन्होंने न केवल इन कुरीतियों का विरोध किया, बल्कि लोगों को जागरूक कर सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव भी रखी।
सतीश चंद्र प्रजापति ने कहा कि आज जब समाज आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, तब भी कई स्थानों पर जातीय भेदभाव और सामाजिक असमानता देखने को मिलती है। ऐसे में संत राम बी.ए. के विचार नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं।
महिला शिक्षा को लेकर दूरदर्शी सोच रखते थे संत राम बी.ए.
कार्यक्रम में वक्ताओं ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि संत राम बी.ए. ने महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष किया। उन्होंने यह समझ लिया था कि यदि महिलाओं को शिक्षा और अवसर मिलेंगे, तभी समाज का वास्तविक विकास संभव होगा।
वक्ताओं ने कहा कि आज देश में महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण को लेकर जो सकारात्मक माहौल दिखाई देता है, उसमें ऐसे समाज सुधारकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संत राम बी.ए. ने वर्षों पहले जिस विचार को समाज के सामने रखा था, वह आज विकास की मुख्य धारा बन चुका है।
उन्होंने महिलाओं को केवल परिवार तक सीमित रखने की सोच का विरोध किया और उन्हें शिक्षा, आत्मनिर्भरता तथा सामाजिक भागीदारी के लिए प्रेरित किया। यही कारण है कि उन्हें महिला शिक्षा के प्रबल समर्थकों में गिना जाता है।
‘जाति-पांति बंधन तोड़ा’ अभियान बना सामाजिक चेतना का प्रतीक
सभा में वक्ताओं ने संत राम बी.ए. द्वारा चलाए गए सामाजिक अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को जातिगत संकीर्णताओं से ऊपर उठाने के लिए निरंतर प्रयास किए। उनका प्रसिद्ध संदेश ‘जाति-पांति बंधन तोड़ा’ केवल एक नारा नहीं था, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का व्यापक आंदोलन था।
उनके प्रयासों का उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि मानवता किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय से बड़ी होती है। उन्होंने सामाजिक एकता, भाईचारे और समान अवसरों की वकालत की तथा समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनेक प्रयास किए।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में भी सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए संत राम बी.ए. के विचार अत्यंत उपयोगी साबित हो सकते हैं।
नई पीढ़ी तक पहुंचाए जाएंगे संत राम बी.ए. के विचार
कार्यक्रम में उपस्थित समिति के सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संत राम बी.ए. के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को उनके जीवन संघर्ष, सामाजिक योगदान और सुधारवादी दृष्टिकोण से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में विभिन्न जनजागरण कार्यक्रम, विचार गोष्ठियां और सामाजिक अभियान आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से संत राम बी.ए. के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके विचारों को व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान होगा।
बड़ी संख्या में शामिल हुए सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक
कार्यक्रम में श्याम लाल प्रजापति, बलिराम प्रजापति, राम अचल प्रजापति, राम आधार सहित समिति के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा स्थानीय नागरिकों, महिलाओं, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के दौरान समाज सुधार, शिक्षा, समानता और सामाजिक एकजुटता जैसे विषयों पर चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।
संत राम बी.ए. की विरासत आज भी प्रेरणा का स्रोत
38वें परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण बना कि संत राम बी.ए. के विचार आज भी समाज में जीवंत हैं। उनके द्वारा दिखाया गया मार्ग केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
समानता, शिक्षा, सामाजिक न्याय और मानवता के मूल्यों पर आधारित उनकी सोच आज भी समाज को दिशा देने की क्षमता रखती है। कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण और सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित लोगों ने संत राम बी.ए. के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।







