देवरिया

कस्तूरबा विद्यालय में जलजमाव पर भड़कीं एसडीएम, छुट्टियों से पहले इंटरलॉकिंग पूरी करने के दिए सख्त निर्देश

पीटीएम में शामिल होकर छात्राओं और अभिभावकों से की सीधी बातचीत, खर्चों के बिलों के सत्यापन के लिए बीईओ को सौंपा जिम्मा

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

सलेमपुर(देवरिया)। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और छात्राओं के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। इसी क्रम में शनिवार को उपजिलाधिकारी (एसडीएम) दिशा श्रीवास्तव ने सलेमपुर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर में जलजमाव और अव्यवस्था देखकर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

एसडीएम के अचानक विद्यालय पहुंचने से विद्यालय प्रशासन और कर्मचारियों में हलचल मच गई। निरीक्षण के दौरान उन्होंने केवल भवन और परिसर का जायजा ही नहीं लिया, बल्कि छात्राओं और उनके अभिभावकों से भी संवाद कर विद्यालय की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि छात्राओं को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पीटीएम में पहुंचकर लिया व्यवस्थाओं का फीडबैक

शनिवार को विद्यालय में अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) आयोजित की जा रही थी। इसी दौरान एसडीएम दिशा श्रीवास्तव विद्यालय पहुंचीं और बैठक में शामिल होकर छात्राओं तथा उनके अभिभावकों से सीधे बातचीत की। उन्होंने छात्राओं से पढ़ाई की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, भोजन की गुणवत्ता, छात्रावास की व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

एसडीएम ने अभिभावकों से भी बातचीत कर यह जानने की कोशिश की कि उन्हें विद्यालय की व्यवस्थाओं से कितनी संतुष्टि है और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता महसूस होती है। इस दौरान कई अभिभावकों ने विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना की, वहीं कुछ ने आधारभूत सुविधाओं को और बेहतर बनाने की आवश्यकता बताई।

परिसर में जलजमाव देख नाराज हुईं एसडीएम

निरीक्षण के दौरान सबसे अधिक चिंता का विषय विद्यालय परिसर में जमा पानी रहा। विद्यालय के कई हिस्सों में जलजमाव की स्थिति देखकर एसडीएम ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में इस प्रकार की स्थिति छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बन सकती है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और परिसर को समतल बनाने के लिए तत्काल आवश्यक कार्य शुरू किए जाएं। उनका कहना था कि विद्यालय जैसे संवेदनशील संस्थान में गंदगी और जलभराव की समस्या किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।

कायाकल्प योजना के तहत राबिश डलवाने का आदेश

एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर की स्थिति सुधारने के लिए कायाकल्प योजना के अंतर्गत आवश्यक कार्य कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सबसे पहले परिसर में राबिश डलवाकर जमीन को समतल किया जाए ताकि वर्षा का पानी एकत्र न हो और जलजमाव की समस्या समाप्त हो सके।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए। एसडीएम ने कहा कि यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो बरसात के दौरान स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है, जिससे छात्राओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

विद्यालय खुलने से पहले पूरा हो इंटरलॉकिंग कार्य

एसडीएम ने विद्यालय परिसर में इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि वर्तमान में चल रही गर्मी की छुट्टियों का पूरा उपयोग करते हुए विद्यालय खुलने से पहले इंटरलॉकिंग का कार्य हर हाल में पूरा कर लिया जाए।

उन्होंने कहा कि जब छात्राएं विद्यालय लौटें तो उन्हें साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण मिले। बारिश के मौसम में कीचड़ और जलभराव के बीच छात्राओं का आवागमन किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। इसलिए निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों सुनिश्चित की जाएं।

छात्राओं की सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष जोर

निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने छात्रावास, भोजनालय, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि स्वच्छता संबंधी मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए।

उन्होंने कहा कि आवासीय विद्यालयों में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। परिसर में नियमित सफाई, स्वच्छ पेयजल, बेहतर भोजन व्यवस्था और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। एसडीएम ने यह भी कहा कि छात्राओं को किसी प्रकार की समस्या होने पर उसकी शिकायत तत्काल सुनी जाए और उसका समाधान समयबद्ध तरीके से किया जाए।

खर्चों के बिलों की जांच के लिए बीईओ को निर्देश

विद्यालय में कराए गए विकास और रखरखाव कार्यों पर हुए खर्च की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एसडीएम ने खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) अमित कुमार सिंह को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने निर्देश दिया कि विद्यालय में प्रस्तुत किए गए सभी बिलों और खर्चों का भौतिक सत्यापन किया जाए।

एसडीएम ने कहा कि केवल कागजी औपचारिकताओं के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं की जानी चाहिए, बल्कि मौके पर जाकर यह देखा जाए कि जिन कार्यों का भुगतान दिखाया गया है, वे वास्तव में किए गए हैं या नहीं।

उन्होंने बीईओ को जल्द से जल्द विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए ताकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी

निरीक्षण के दौरान एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार द्वारा पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ऐसे में कार्यों में ढिलाई या अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि छात्राओं के हितों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लें और सभी विकास कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराएं।

प्रशासन की सक्रियता से बढ़ी उम्मीदें

एसडीएम के इस औचक निरीक्षण को स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने सकारात्मक कदम बताया है। उनका मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की नियमित निगरानी से विद्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार आएगा और छात्राओं को बेहतर शैक्षिक माहौल उपलब्ध हो सकेगा।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि आवासीय विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की गुणवत्ता सीधे तौर पर छात्राओं की शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। ऐसे में समय-समय पर होने वाले निरीक्षण न केवल जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं बल्कि विकास कार्यों को गति भी प्रदान करते हैं।

विद्यालय प्रशासन अब एसडीएम द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में आवश्यक तैयारियों में जुट गया है। उम्मीद की जा रही है कि विद्यालय खुलने से पहले परिसर में जलजमाव की समस्या दूर हो जाएगी और इंटरलॉकिंग सहित अन्य आवश्यक कार्य भी पूर्ण कर लिए जाएंगे, जिससे छात्राओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।

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