बारिश के बीच डीएम का औचक निरीक्षण, पीएचसी और कस्तूरबा विद्यालय की व्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी

देवरिया के भाटपाररानी में जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का निरीक्षण करते हुए, साथ में संवाददाता इरफान अली लारी की तस्वीर।

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया। जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने शुक्रवार की सुबह भाटपाररानी क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया। लगातार हो रही बारिश के बीच जिलाधिकारी सबसे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भाटपाररानी पहुंचे और वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं, कर्मचारियों की उपस्थिति, दवा वितरण व्यवस्था तथा मरीजों को मिलने वाली सेवाओं का गहन निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय पहुंचकर छात्राओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य सुविधाओं का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं और जनसेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जिम्मेदारी के साथ कार्य करते हुए जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अभिलेखों और व्यवस्थाओं की जांच

जिलाधिकारी सुबह करीब आठ बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भाटपाररानी पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले उपस्थिति पंजिका का अवलोकन किया और उसके बाद दवा वितरण रजिस्टर, ओपीडी रजिस्टर, वार्ड व्यवस्था तथा अन्य प्रशासनिक अभिलेखों की जांच की।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया और अधिकारियों को निर्देशित किया कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिलाधिकारी ने अस्पताल परिसर का भ्रमण करते हुए मरीजों एवं उनके परिजनों से भी बातचीत की और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कर्मचारियों को निर्देश दिया कि मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाया जाए तथा उपचार प्रक्रिया को और अधिक सरल एवं प्रभावी बनाया जाए।

अधिकांश स्वास्थ्य कर्मियों की अनुपस्थिति पर जताई कड़ी नाराजगी

निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर स्थिति कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर सामने आई। जिलाधिकारी ने पाया कि कई स्वास्थ्य कर्मी तथा संविदा कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं थे। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम भी निरीक्षण के समय अनुपस्थित मिली।

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इस स्थिति पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित समय पर अपने कार्यस्थल पर उपस्थित रहें और जनता को सेवाएं प्रदान करें।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगली बार निरीक्षण में स्थिति में स्पष्ट सुधार दिखाई देना चाहिए। यदि लापरवाही दोबारा सामने आई तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

गर्भवती महिला के एमसीपी कार्ड में मिली कमी

निरीक्षण के दौरान एक गर्भवती महिला प्रसव संबंधी सेवाएं प्राप्त करने के लिए अस्पताल पहुंची थी। उसके साथ एक आशा कार्यकर्ता भी मौजूद थी। जिलाधिकारी ने जब महिला का मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन (एमसीपी) कार्ड देखा तो उसमें कई आवश्यक जानकारियां अधूरी पाई गईं।

इस पर उन्होंने आश्चर्य और नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े दस्तावेजों का सही और पूर्ण रूप से भरा जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि एमसीपी कार्ड ही अधूरा रहेगा तो गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य निगरानी और उपचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

जिलाधिकारी ने इस स्थिति को आशा कार्यकर्ताओं के अपर्याप्त प्रशिक्षण तथा निगरानी व्यवस्था की कमजोरी से जोड़ते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

तीन दिन में मांगा गया स्पष्टीकरण

निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया कि अनुपस्थित पाए गए कर्मचारियों से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित नोडल अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा प्रभारी चिकित्सा अधिकारी क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी अनुश्रवण सुनिश्चित करें।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल निरीक्षण के समय व्यवस्थाएं सुधारना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित रूप से सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए अधिकारियों को निरंतर निगरानी करनी होगी और समय-समय पर समीक्षा भी करनी होगी।

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में छात्राओं से किया संवाद

स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भाटपाररानी पहुंचे। यहां उन्होंने छात्राओं से सीधे संवाद स्थापित कर विद्यालय की वास्तविक स्थिति को समझने का प्रयास किया।

उन्होंने छात्राओं से पढ़ाई, भोजन, छात्रावास व्यवस्था, शिक्षण गतिविधियों और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। छात्राओं से बातचीत के दौरान उन्होंने उनकी शैक्षणिक प्रगति और विद्यालय के वातावरण के बारे में भी प्रश्न पूछे।

जिलाधिकारी ने कहा कि कस्तूरबा गांधी विद्यालय ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं के लिए महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान हैं। इसलिए यहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने पर दिया जोर

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय में नामांकन और वास्तविक उपस्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नामांकित छात्राओं की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं।

उन्होंने कहा कि केवल नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्राओं का नियमित रूप से विद्यालय आना और शिक्षा प्राप्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए शिक्षकों और विद्यालय प्रशासन को अभिभावकों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखना चाहिए।

अभिभावक-शिक्षक बैठक को बनाया अनिवार्य

जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में नियमित रूप से अभिभावक-शिक्षक बैठक आयोजित कराई जाए।

उन्होंने कहा कि अभिभावकों की भागीदारी से शिक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होती है। ऐसी बैठकों के माध्यम से अभिभावकों को छात्राओं की प्रगति की जानकारी मिलती है और वे विद्यालय की गतिविधियों से भी जुड़ते हैं।

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इसके साथ ही अभिभावकों को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न शैक्षिक एवं कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जा सकती है, जिससे योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचेगा।

पठन-पाठन की गुणवत्ता परखी

विद्यालय निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने छात्राओं से पाठ्यक्रम से संबंधित प्रश्न पूछे और उनकी शैक्षणिक समझ का आकलन किया। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि छात्राओं को केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा न देकर व्यवहारिक और गुणवत्तापूर्ण ज्ञान भी उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं बल्कि व्यक्तित्व विकास और ज्ञानवर्धन भी है। इसलिए विद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

टूटी टाइल्स और मरम्मत कार्य के निर्देश

निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर के शौचालयों में लगी कई टाइल्स टूटी और क्षतिग्रस्त पाई गईं। जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रस्ताव तैयार कर मरम्मत कार्य कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि छात्राओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। विद्यालय परिसर की आधारभूत सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।

जवाबदेही और अनुश्रवण पर दिया विशेष बल

निरीक्षण के समापन पर जिलाधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों ही क्षेत्र समाज के विकास की नींव हैं। इन क्षेत्रों में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नियमित निरीक्षण, अनुश्रवण और समीक्षा के माध्यम से व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाए।

जिलाधिकारी के इस औचक निरीक्षण से स्पष्ट संकेत मिला है कि प्रशासन अब स्वास्थ्य केंद्रों और शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली पर लगातार नजर बनाए हुए है। इससे न केवल कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी बल्कि आम जनता और छात्राओं को बेहतर सुविधाएं भी मिल सकेंगी।

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Author: यायावर

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