ईद-उल-अजहा पर भाटपार रानी की जामा मस्जिद में उमड़ी अकीदत, मुल्क की सलामती और अमन-चैन के लिए मांगी गई दुआ

भाटपार रानी जामा मस्जिद में ईद-उल-अजहा की नमाज अदा करते नमाजी और रिपोर्टर इरफान अली लारी

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ईद-उल-अजहा पर भाटपार रानी की जामा मस्जिद में उमड़ी अकीदत

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया जिले के भाटपार रानी कस्बे में ईद-उल-अजहा का पर्व इस वर्ष भी पूरी अकीदत, भाईचारे और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। कस्बे की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में सुबह से ही नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ईद-उल-अजहा की नमाज दो अलग-अलग शिफ्टों में अदा की गई, जहां हजारों मुस्लिम भाइयों ने अल्लाह की बारगाह में सजदा कर देश की खुशहाली, अमन-चैन और तरक्की के लिए दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।

सुबह सात बजे पहली शिफ्ट में अदा हुई नमाज

जामा मस्जिद में पहली शिफ्ट की नमाज सुबह ठीक 7 बजे अदा की गई। इस नमाज की इमामत जामा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज व कारी मुजीब अहमद रजा ने की। नमाज शुरू होने से पहले उन्होंने अपने बयान में ईद-उल-अजहा और कुर्बानी की अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस्लाम में कुर्बानी सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि अल्लाह की राह में अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान करने की सीख है। उन्होंने हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम और हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी का जिक्र करते हुए कहा कि अल्लाह अपने बंदों के ईमान और सब्र का इम्तिहान लेता है।

हाफिज मुजीब अहमद रजा ने कहा कि जब अल्लाह ने अपने नेक नबी हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को ख्वाब में अपनी सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने का आदेश दिया, तब उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम को अल्लाह की राह में कुर्बान करने का फैसला किया। जब वह अल्लाह के हुक्म को पूरा करने जा रहे थे, तभी अल्लाह ने उनकी सच्ची मोहब्बत और ईमानदारी को देखकर हजरत इस्माइल की जगह एक दुम्बा भेज दिया। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि ईद-उल-अजहा पर हर मुसलमान अल्लाह की राह में कुर्बानी देकर अपने ईमान और समर्पण का प्रदर्शन करता है।

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दूसरी शिफ्ट में भी बड़ी संख्या में पहुंचे नमाजी

पहली नमाज के बाद भी मस्जिद परिसर में लोगों की भीड़ बनी रही। इसके बाद सुबह 8 बजे दूसरी शिफ्ट की नमाज अदा की गई, जिसकी इमामत मौलाना जिलानी रजा ने की। दूसरी शिफ्ट में भी बड़ी संख्या में नमाजी शामिल हुए। नमाज के दौरान लोगों ने मुल्क की सलामती, समाज में भाईचारे और इंसानियत की बेहतरी के लिए दुआ मांगी। उलेमाओं ने अपने बयान में कहा कि ईद-उल-अजहा हमें त्याग, सेवा और इंसानियत का संदेश देती है। त्योहार का असली मकसद जरूरतमंदों की मदद करना और समाज में प्रेम और भाईचारा कायम रखना है।

सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

ईद की नमाज को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। जामा मस्जिद और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भाटपार रानी के उपजिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारी शिव प्रताप सिंह स्वयं मौके पर मौजूद रहे। इसके अलावा भाटपार रानी थाना प्रभारी देवेंद्र प्रताप सिंह भी भारी पुलिस बल के साथ मस्जिद परिसर में तैनात रहे। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया गया कि नमाजियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

बच्चों और युवाओं में दिखा खास उत्साह

ईद-उल-अजहा को लेकर बच्चों और युवाओं में भी खास उत्साह देखने को मिला। नमाज के बाद बच्चे एक-दूसरे से गले मिलते और ईदी लेते नजर आए। बाजारों में भी सुबह से ही चहल-पहल बनी रही। मिठाइयों और सेवइयों की दुकानों पर लोगों की भीड़ दिखाई दी। कई परिवारों ने अपने घरों में विशेष पकवान तैयार किए और रिश्तेदारों व परिचितों के घर जाकर ईद की बधाई दी।

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भाईचारे और सौहार्द का दिया संदेश

भाटपार रानी में ईद-उल-अजहा का त्योहार आपसी भाईचारे और सौहार्द के वातावरण में संपन्न हुआ। विभिन्न समुदायों के लोगों ने मुस्लिम समाज को ईद की शुभकामनाएं दीं। त्योहार के दौरान प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से पूरे क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी रही। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर मोहब्बत और इंसानियत का संदेश दिया।

FAQ

भाटपार रानी में ईद-उल-अजहा की नमाज कितनी शिफ्ट में हुई?

जामा मस्जिद में ईद-उल-अजहा की नमाज दो शिफ्ट में अदा की गई।

पहली नमाज की इमामत किसने की?

पहली शिफ्ट की नमाज की इमामत हाफिज व कारी मुजीब अहमद रजा ने की।

नमाज के दौरान किसके लिए दुआ मांगी गई?

नमाज के दौरान मुल्क की सलामती, अमन-चैन और खुशहाली के लिए दुआ मांगी गई।

ईद-उल-अजहा का मुख्य संदेश क्या है?

यह पर्व त्याग, कुर्बानी, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देता है।

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Author: यायावर

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