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ट्रक की भीषण टक्कर से उजड़ गया परिवार : मां-बेटे की मौत, पति और दो मासूम बेटियां घायल

बधाई समारोह में शामिल होने जा रहे थे परिवार के लोग, कालिंजर थाना क्षेत्र में दर्दनाक हादसे से पसरा मातम

संतोष कुमार सोनी की रिपोर्ट

बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया। कालिंजर थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से बाइक सवार मां और मासूम बेटे की मौत हो गई, जबकि पति और दो बेटियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। परिवार हमीरपुर जिले में रिश्तेदारी में पुत्र जन्म की खुशी में “अंगनी” यानी बधाई बजाने जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही यह भयावह हादसा हो गया।

हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरैनी पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने महिला और उसके मासूम बेटे को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।

खुशियों भरी यात्रा मातम में बदली

जानकारी के अनुसार कालिंजर थाना क्षेत्र के कटरा कालिंजर निवासी 40 वर्षीय कमल कुमार बसोर अपनी पत्नी सुनीता और तीन बच्चों के साथ बाइक से हमीरपुर जिले के निवाइच गांव जा रहे थे। परिवार में रिश्तेदारी में बेटे के जन्म की खुशी थी और सभी लोग बधाई कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उत्साह के साथ निकले थे।

बताया जा रहा है कि रविवार शाम लगभग साढ़े चार बजे जैसे ही परिवार गांव के रास्ते से निकलकर बांदा-सतना मुख्य मार्ग पर पहुंचा, तभी सतना की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को सामने से जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रक की रफ्तार काफी तेज थी और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका।

टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार पूरा परिवार सड़क पर दूर जा गिरा। हादसे के दौरान ट्रक सुनीता और मासूम शिवांश को रौंदते हुए आगे निकल गया। डेढ़ वर्षीय शिवांश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सुनीता गंभीर रूप से घायल हो गईं।

सड़क पर बिखर गईं खुशियां, मची चीख-पुकार

दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों और आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत घायलों को संभालने का प्रयास किया। किसी ने पुलिस को सूचना दी तो कुछ लोग घायलों को पानी पिलाने और बच्चों को संभालने में जुट गए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसा इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। मासूम बच्चों की चीखें सुनकर हर कोई विचलित हो उठा।

सूचना मिलते ही कालिंजर थाना पुलिस के सिपाही यादवेंद्र सिंह और आदर्श मिश्रा मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने मानवता का परिचय देते हुए सभी घायलों को सरकारी जीप से तत्काल सीएचसी नरैनी पहुंचाया।

अस्पताल में डॉक्टरों ने मां-बेटे को मृत घोषित किया

सीएचसी नरैनी में मौजूद चिकित्सक डॉ. माया ने जांच के बाद सुनीता और डेढ़ वर्षीय शिवांश को मृत घोषित कर दिया। वहीं घायल कमल कुमार और उनकी बेटियों शिवानी व शिवांगी का प्राथमिक उपचार किया गया।

तीनों की हालत को देखते हुए उन्हें एंबुलेंस से जिला अस्पताल बांदा रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार घायलों की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।

परिवार के लोगों के मुताबिक कमल कुमार बेहद साधारण परिवार से हैं और रिश्तेदारी में खुशी के कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएगा।

ट्रक चालक गिरफ्तार, पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

कालिंजर थाना प्रभारी ने बताया कि दुर्घटना के बाद ट्रक चालक को वाहन समेत पकड़ लिया गया है। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने मां और बेटे के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हादसे के बाद मृतकों के घर में कोहराम मचा हुआ है। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है।

सड़क हादसों पर फिर उठे सवाल

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर प्रदेश में तेज रफ्तार वाहनों और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बांदा-सतना मार्ग पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रही है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर स्पीड कंट्रोल के लिए सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और भारी वाहनों की निगरानी को लेकर अभी भी गंभीर कमी बनी हुई है। यही वजह है कि छोटी सी लापरवाही कई परिवारों की जिंदगी तबाह कर देती है।

मासूम की मौत से गांव में शोक

डेढ़ साल के शिवांश की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार परिवार बेहद खुश था और बधाई कार्यक्रम में जाने की तैयारी सुबह से चल रही थी। लेकिन कुछ ही घंटों में खुशियां मातम में बदल गईं।

मृतक महिला सुनीता के परिजन भी हादसे की खबर सुनते ही अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल परिसर में रोते-बिलखते परिजनों का दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो उठा। यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता की भी कहानी बन गया है।

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