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संदिग्ध मौत, दहेज प्रताड़ना और धमकियों का सनसनीखेज आरोप ; पति की मौत के बाद महिला ने ससुराल पक्ष पर लगाया हत्या का आरोप

रूबी की गुहार : “पति को मार डाला, अब हमें भी खत्म करने की मिल रही धमकी”

संतोष कुमार सोनी की रिपोर्ट

बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक विवाहिता द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। महिला ने अपने पति की संदिग्ध मौत को आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या बताते हुए ससुराल पक्ष के कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि दहेज प्रताड़ना, मारपीट और लगातार धमकियों के चलते उसका वैवाहिक जीवन पहले से ही तनावपूर्ण था और अब उसके पति की मौत के पीछे भी उसी परिवार का हाथ है। पीड़िता ने अपने और अपने मासूम बेटे की जान को खतरा बताते हुए प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की मांग की है।

2020 में हुई थी शादी, दो साल का बेटा भी

प्रार्थना पत्र के अनुसार, बांदा शहर के हरदौली घाट रोड निवासी रूबी की शादी 2 मार्च 2020 को हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार मनोज पुत्र कालीचरन के साथ हुई थी। शादी के बाद दंपति को एक पुत्र हुआ, जिसकी उम्र वर्तमान में करीब दो वर्ष बताई जा रही है। महिला का आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे थे। आए दिन मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था।

पीड़िता का कहना है कि जब प्रताड़ना हद से ज्यादा बढ़ गई तो उसने वर्ष 2023 में अपने ससुराल पक्ष के खिलाफ थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था। बाद में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया और महिला अपने पति के साथ दोबारा ससुराल चली गई।

प्रधानमंत्री आवास योजना की रकम बनी विवाद की वजह

महिला ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसे मकान निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये मिले थे। आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोग उसी रकम पर कब्जा करना चाहते थे। महिला का कहना है कि उसके पति मनोज पर परिवार के लोग लगातार दबाव बना रहे थे कि वह आवास योजना की रकम उन्हें सौंप दे।

प्रार्थना पत्र में महिला ने आरोप लगाया कि उसके ससुर, चाचा ससुर, देवर और अन्य रिश्तेदारों ने मिलकर उसे और उसके पति को धमकी दी थी कि यदि 50 हजार रुपये नहीं दिए गए तो मनोज की हत्या कर दी जाएगी। महिला का दावा है कि परिवार के कुछ लोग पहले से ही आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और उनके खिलाफ क्षेत्र में भय का माहौल है।

बैंक से निकाले 49 हजार रुपये

पीड़िता ने बताया कि 30 मार्च 2026 की सुबह करीब 10 बजे वह अपने पति की जान बचाने के लिए आर्यावर्त बैंक शाखा महोखरपुरवा कनवारा, बांदा से 49 हजार रुपये निकालकर लाई थी। उसका कहना है कि वह रकम लेकर जब घर पहुंची तो वहां कोई मौजूद नहीं था। बाद में आसपास के लोगों ने उसे बताया कि उसके पति ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है।

महिला का आरोप है कि जब वह जिला अस्पताल पहुंची तो उसके पति का शव वहां मौजूद था। उसने दावा किया कि उसके पति की हत्या की गई और बाद में उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने इलाके में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

“रुपये भी छीन लिए गए” — महिला का आरोप

रूबी ने आरोप लगाया कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी उसे प्रताड़ित किया गया। उसने कहा कि सास और परिवार के अन्य सदस्यों ने उसके साथ अभद्रता की और वह रकम भी छीन ली, जो वह बैंक से निकालकर लाई थी। महिला ने कहा कि उसे लगातार धमकाया जा रहा है कि यदि उसने पुलिस या प्रशासन से शिकायत की तो उसे और उसके बेटे को जान से मार दिया जाएगा।

प्रार्थना पत्र में महिला ने यह भी कहा है कि आरोपित लोग इतने दबंग हैं कि कोई भी व्यक्ति उनके खिलाफ गवाही देने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि वह खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।

पिता को भी धमकी देने का आरोप

महिला ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि उसके पिता को भी गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जा रही है। उसने कहा कि आरोपी खुलेआम कह रहे हैं कि यदि शिकायत वापस नहीं ली गई तो पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा। इन धमकियों से महिला और उसका परिवार भयभीत है।

पीड़िता ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उसके पति की मौत की सच्चाई सामने लाई जाए। साथ ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि उसे और उसके बेटे को सुरक्षा मिल सके।

पुलिस जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

इस मामले में फिलहाल पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन प्रार्थना पत्र मिलने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि महिला के आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो यह मामला दहेज हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और धमकी जैसी गंभीर धाराओं में बदल सकता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के मामलों में कई बार महिलाएं समझौते के दबाव में वापस ससुराल चली जाती हैं, लेकिन बाद में हालात और गंभीर हो जाते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन की संवेदनशीलता और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी होती है।

समाज के लिए बड़ा सवाल

यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर दहेज और पारिवारिक लालच की मानसिकता कब खत्म होगी। सरकारी योजनाओं का लाभ गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने के लिए होता है, लेकिन कई बार यही योजनाएं पारिवारिक विवाद और अपराध का कारण बन जाती हैं।

बांदा में सामने आया यह मामला केवल एक परिवार का विवाद नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी उस कड़वी सच्चाई का आईना है, जिसमें लालच, हिंसा और भय का माहौल रिश्तों को खत्म कर रहा है। अब सबकी नजर पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

(नोट : समाचार, पीड़िता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र और आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच जारी है। आधिकारिक जांच के बाद ही अंतिम तथ्य स्पष्ट हो पाएंगे।)

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