रेंगते हुए शिक्षक व्यवस्था के आगे बेबस? सड़क पर घिसटते हुए मंत्री आवास पहुंचे अभ्यर्थी

रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी की तस्वीर के साथ 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का लखनऊ में सड़क पर रेंगते हुए प्रदर्शन दर्शाती फीचर इमेज।

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कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर सियासी और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है। मंगलवार 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली 31वीं सुनवाई से ठीक एक दिन पहले राजधानी लखनऊ की सड़कों पर ऐसा दृश्य दिखाई दिया, जिसने व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए।

भीषण गर्मी, तपती सड़क और सिर पर वर्षों का संघर्ष… इन्हीं परिस्थितियों के बीच हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों ने सोमवार को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव किया। कई अभ्यर्थी सड़क पर रेंगते हुए मंत्री आवास तक पहुंचे, तो कुछ दंडवत करते हुए न्याय की गुहार लगाते नजर आए।

यह प्रदर्शन केवल नियुक्ति की मांग नहीं था, बल्कि उन युवाओं की पीड़ा थी, जो वर्ष 2018 से शिक्षक बनने का सपना लेकर कोर्ट, सरकार और व्यवस्था के बीच फंसे हुए हैं।

तपती सड़क पर रेंगते अभ्यर्थी, आंखों में नौकरी की आस

लखनऊ के गौतमपल्ली स्थित मॉल एवेन्यू इलाके में सोमवार दोपहर का तापमान 40 डिग्री के आसपास था। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी सड़क पर रेंगते हुए आगे बढ़ रहे थे।

उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था — “हमें न्याय चाहिए”, “सही पैरवी करो”, “आठ साल का संघर्ष अब खत्म करो”। कई अभ्यर्थियों की आंखों में आंसू थे। कुछ युवतियां सड़क किनारे बैठकर रोती दिखीं। प्रदर्शन में शामिल OBC और SC वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना था कि उनकी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण समय इसी भर्ती के इंतजार में गुजर गया।

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“2018 में परीक्षा दी, 2026 में भी नियुक्ति नहीं”

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2018 में शिक्षक भर्ती परीक्षा दी थी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरक्षण और मेरिट विवाद के चलते मामला अदालत पहुंच गया। तब से लेकर आज तक अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। किसी ने नौकरी छोड़ दी, किसी ने शादी टाल दी, तो कई आर्थिक तंगी में जीवन गुजार रहे हैं।

एक अभ्यर्थी ने कहा, “हमारी उम्र निकलती जा रही है। परिवार वाले हर दिन पूछते हैं कि नौकरी कब मिलेगी, लेकिन हमारे पास कोई जवाब नहीं है।”

सरकार पर कमजोर पैरवी का आरोप

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में मामले की गंभीरता से पैरवी नहीं कर रही। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई बार सरकारी वकील समय पर कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए, जिससे मामले की सुनवाई प्रभावित हुई। उनका आरोप है कि यदि सरकार मजबूत तरीके से अपना पक्ष रखती, तो अब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी होती। अभ्यर्थियों ने मांग की कि सरकार वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सुप्रीम कोर्ट भेजे और 19 मई की सुनवाई में प्रभावी ढंग से पक्ष रखे।

31वीं सुनवाई पर टिकी हजारों युवाओं की उम्मीद

69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामला अब लाखों युवाओं की उम्मीदों और भविष्य से जुड़ चुका है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की 31वीं सुनवाई होनी है।

फरवरी 2026 में हुई पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक “मध्य रास्ता” निकालने का सुझाव दिया था। कोर्ट ने पूछा था कि क्या पहले से नियुक्त शिक्षकों को हटाए बिना आरक्षित वर्ग के लगभग 6800 अतिरिक्त अभ्यर्थियों को कहीं और समायोजित किया जा सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच के उस फैसले पर रोक लगा रखी है, जिसमें पूरी चयन सूची को रद्द कर नई मेरिट सूची तैयार करने का आदेश दिया गया था।

आंदोलन अब भावनात्मक रूप ले चुका

इस भर्ती विवाद ने अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक स्वरूप भी ले लिया है। प्रदर्शन में शामिल कई अभ्यर्थियों ने कहा कि वे पिछले आठ वर्षों से मानसिक तनाव झेल रहे हैं। कुछ अभ्यर्थियों ने बताया कि उनके माता-पिता अब बूढ़े हो चुके हैं और परिवार की उम्मीदें उन्हीं पर टिकी हैं।

एक महिला अभ्यर्थी ने कहा, “हमने पढ़ाई की, परीक्षा पास की, चयनित भी हुए, लेकिन आज भी सड़क पर हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा?”

विपक्ष को भी मिला सरकार पर हमला करने का मौका

शिक्षक भर्ती विवाद ने विपक्ष को भी सरकार पर निशाना साधने का अवसर दे दिया है। विपक्षी दल लगातार सरकार पर युवाओं की अनदेखी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी का आरोप लगाते रहे हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि इस मामले का जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

हजारों परिवारों का भविष्य दांव पर

69 हजार शिक्षक भर्ती मामला अब केवल अदालत की फाइल नहीं रह गया है। इसके साथ हजारों परिवारों की उम्मीदें, युवाओं का करियर और सामाजिक सम्मान जुड़ चुका है।

अब सबकी नजर मंगलवार 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि शायद इस बार उनके लंबे संघर्ष का कोई निर्णायक परिणाम सामने आए।

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