गंगा स्नान बना काल : कलश यात्रा की खुशियां मातम में बदलीं, दो मासूमों की मौत से गांव में पसरा सन्नाटा
अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
हरदोई जिले के बिलग्राम क्षेत्र में आयोजित भागवत कथा की कलश यात्रा उस समय दर्दनाक हादसे में बदल गई, जब गंगा स्नान के दौरान पांच बच्चे अचानक गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आ गए। श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के माहौल में निकली यात्रा कुछ ही पलों में चीख-पुकार और मातम में तब्दील हो गई। इस हादसे में दो मासूम बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। गांव म्योरा में हर आंख नम है और परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बताया जा रहा है कि भागवत कथा के आयोजन के तहत कलश यात्रा निकाली गई थी। बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण श्रद्धा भाव से इसमें शामिल हुए थे। यात्रा के दौरान श्रद्धालु नोखेपुरवा गंगा घाट पहुंचे, जहां स्नान और पूजा-अर्चना का कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान कुछ बच्चे घाट के किनारे पानी में उतरे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि गंगा की धारा कितनी तेज और खतरनाक हो चुकी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्नान करते समय अचानक पांच बच्चे गहरे पानी में चले गए और तेज बहाव में फंस गए। बच्चों को डूबता देख घाट पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद लोगों ने बिना देर किए अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों को बचाने की कोशिश शुरू कर दी। ग्रामीणों की बहादुरी से तीन बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इनमें स्नेहा (12) पुत्री महेंद्र, सोनम (11) पुत्री सोनू और अंशी (14) पुत्री राकेश शामिल हैं। हालांकि संध्या पुत्री रविशंकर और ओमजी पुत्र राजेश गंगा की तेज धारा में बह गए।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थानीय पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और बचाव अभियान शुरू कराया गया। गोताखोरों की टीम को नदी में उतारा गया, जबकि आसपास के ग्रामीण भी लगातार तलाश में जुटे रहे। देर शाम तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान 14 वर्षीय संध्या का शव बरामद कर लिया गया, लेकिन ओमजी का कोई पता नहीं चल सका।
इसके बाद पूरी रात SDRF और गोताखोरों की टीम गंगा में तलाश करती रही। अंधेरा और तेज बहाव राहत कार्य में बड़ी बाधा बनता रहा, लेकिन टीम ने अभियान जारी रखा। बुधवार सुबह कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद SDRF टीम ने घटनास्थल से कुछ दूरी पर ओमजी का शव भी बरामद कर लिया। जैसे ही दोनों बच्चों की मौत की खबर गांव पहुंची, पूरा माहौल गमगीन हो उठा।
एक ही गांव म्योरा के दो मासूम बच्चों की मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। जिन घरों में कल तक खुशी और धार्मिक आयोजन की तैयारियां थीं, वहां अब चीख-पुकार और मातम का माहौल है। संध्या और ओमजी के शव जब गांव पहुंचे तो परिवारों का दर्द देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। मां-बाप बदहवास होकर अपने बच्चों को पुकारते रहे। गांव की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा घाट पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। यदि प्रशासन की ओर से पहले से सतर्कता बरती जाती और घाट के खतरनाक हिस्सों को चिन्हित किया जाता, तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था। लोगों ने घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और धार्मिक आयोजनों के दौरान अतिरिक्त निगरानी की मांग उठाई है।
उधर पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला हादसे का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि नदी, तालाब और अन्य जलाशयों में स्नान करते समय विशेष सावधानी बरतें और बच्चों को अकेले पानी के पास न जाने दें।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक आयोजनों और भीड़भाड़ वाले घाटों पर सुरक्षा इंतजाम कितने जरूरी हैं। अक्सर श्रद्धा और उत्साह के बीच लोग खतरे को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा मासूम जानों को भुगतना पड़ता है। बिलग्राम का यह हादसा पूरे क्षेत्र के लिए ऐसी पीड़ा छोड़ गया है, जिसे शायद लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकेगा।








