जनगणना-2027 में लापरवाही पड़ी भारी : शिक्षक का वेतन रोका, 24 घंटे में मांगा जवाब
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायदों में शामिल जनगणना-2027 को लेकर शासन और प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ तैयारियों में जुटा हुआ है। ऐसे समय में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा रही है। देवरिया जिले में जनगणना कार्य से जुड़ा ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के लिए नियुक्त एक शिक्षक द्वारा कार्यभार ग्रहण न करने और आदेशों की अवहेलना करने पर जिला प्रशासन ने कठोर रुख अपनाया है। जिला जनगणना अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) रामशंकर ने संबंधित शिक्षक का वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
जनगणना कार्य में बरती गई लापरवाही
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जनगणना-2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और शिक्षकों को प्रगणक एवं पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है, ताकि निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा कराया जा सके।
इसी क्रम में विकास खंड भाटपाररानी क्षेत्र के कम्पोजिट विद्यालय बनकटा शंभू में कार्यरत सहायक अध्यापक अजीत प्रताप सिंह को एचएलबी संख्या-115 के लिए प्रगणक नियुक्त किया गया था। प्रशासन का आरोप है कि नियुक्ति के बाद भी उन्होंने न तो जनगणना संबंधी दायित्वों का कार्यभार ग्रहण किया और न ही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इससे संबंधित क्षेत्र में जनगणना की तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका उत्पन्न हो गई।
राष्ट्रीय महत्व के कार्य में बाधा मान रहा प्रशासन
जिला प्रशासन का मानना है कि जनगणना केवल एक सांख्यिकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण, सामाजिक-आर्थिक नीतियों और भविष्य की प्रशासनिक रणनीतियों का आधार होती है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही को सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता।
अपर जिलाधिकारी रामशंकर ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण न करना और विभागीय निर्देशों की अनदेखी करना शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही की श्रेणी में आता है। इससे न केवल निर्धारित कार्य प्रभावित होता है बल्कि पूरी प्रक्रिया की समयबद्धता पर भी असर पड़ सकता है।
वेतन रोकने के दिए गए निर्देश
मामले की समीक्षा के बाद जिला जनगणना अधिकारी ने संबंधित शिक्षक के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए उनका वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने का निर्देश जारी किया है। प्रशासन का मानना है कि जब तक मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती और संबंधित कर्मचारी अपना पक्ष स्पष्ट नहीं करता, तब तक वेतन भुगतान रोकना आवश्यक है।
वेतन रोकने की कार्रवाई को प्रशासनिक अनुशासन लागू करने की दिशा में एक सख्त कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो अन्य कर्मचारियों में भी आदेशों की अवहेलना की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
24 घंटे में मांगा गया स्पष्टीकरण
प्रशासन ने संबंधित शिक्षक को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। नोटिस में उन्हें 24 घंटे के भीतर अपना तथ्यात्मक और साक्ष्ययुक्त स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
जारी नोटिस में यह स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि नियुक्ति के बावजूद उन्होंने जनगणना कार्य का दायित्व क्यों नहीं संभाला और विभागीय आदेशों का पालन क्यों नहीं किया। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि उनका उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके विरुद्ध विधिक एवं विभागीय कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
जनगणना अधिनियम-1948 के तहत हो सकती है कार्रवाई
प्रशासन ने नोटिस में जनगणना अधिनियम-1948 की धारा-11 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार जनगणना कार्य में नियुक्त कर्मचारी को सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन करना अनिवार्य होता है। यदि कोई कर्मचारी बिना उचित कारण कार्य से अनुपस्थित रहता है या आदेशों का पालन नहीं करता, तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ अधिनियम के तहत दंडात्मक प्रावधान भी लागू किए जा सकते हैं।
जनगणना-2027 की तैयारियों पर प्रशासन का फोकस
भारत में होने वाली आगामी जनगणना को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें व्यापक स्तर पर तैयारी कर रही हैं। जनगणना के माध्यम से देश की जनसंख्या, आवासीय स्थिति, सामाजिक संरचना, शिक्षा, रोजगार, आवास और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों का संग्रह किया जाता है।
इसी प्रक्रिया के तहत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का चरण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह आगे होने वाले विस्तृत जनगणना सर्वेक्षण की आधारशिला तैयार करता है। इसलिए प्रशासन चाहता है कि इस चरण में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।
कर्मचारियों को दिया गया स्पष्ट संदेश
देवरिया प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले के सभी विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में किसी भी प्रकार की उदासीनता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि जनगणना केवल सरकारी औपचारिकता नहीं बल्कि विकास योजनाओं के लिए आवश्यक आधारभूत आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया है। इसलिए इसमें नियुक्त प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
भविष्य में और सख्ती की संभावना
जिला जनगणना अधिकारी रामशंकर ने स्पष्ट किया है कि जनगणना-2027 के कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। यदि किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या प्रगणक द्वारा आदेशों की अनदेखी की जाती है या कार्य में लापरवाही बरती जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने दायित्वों का समयबद्ध और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से निर्वहन करें। जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम की सफलता सभी की सहभागिता और अनुशासन पर निर्भर करती है।
देवरिया में हुई यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि जनगणना-2027 को लेकर प्रशासन किसी भी स्तर की लापरवाही को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में जनगणना कार्यों की गति बढ़ने के साथ निगरानी और जवाबदेही भी और अधिक सख्त होने की संभावना है।








