रिपोर्ट: दुर्गा प्रसाद शुक्ला
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव की तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को छह और प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए। इससे एक दिन पहले समाजवादी पार्टी (सपा) ने सभी 11 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। दोनों प्रमुख दलों की ओर से प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद अब चुनावी मुकाबले का मैदान और उसमें उतरने वाले प्रमुख चेहरे तय हो गए हैं।
विधान परिषद की इन सीटों के लिए मंगलवार से नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर निर्धारित है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रत्याशियों की ओर से नामांकन दाखिल करने, चुनाव प्रचार की रणनीति बनाने और अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षक तथा स्नातक मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने का दौर तेज होने की संभावना है।
भाजपा ने छह सीटों पर घोषित किए प्रत्याशी
भाजपा ने मंगलवार को शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए छह नामों की घोषणा की। पार्टी ने वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह को उम्मीदवार बनाया है। मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में दिनेश गोयल को प्रत्याशी बनाया गया है, जबकि इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से अशोक कुमार राठौर चुनाव मैदान में होंगे।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा ने वाराणसी शिक्षक सीट से प्रमोद मिश्रा को टिकट दिया है। आगरा शिक्षक सीट पर इंजीनियर हरि किशोर त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से घ्रुव त्रिपाठी को पार्टी ने प्रत्याशी घोषित किया है।
भाजपा इससे पहले पांच प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी थी। इस तरह पार्टी की ओर से अब सभी 11 सीटों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान पूरा हो गया है। प्रत्याशियों की घोषणा के साथ भाजपा ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में संगठनात्मक तैयारी को भी चुनावी दिशा देने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
सपा ने पहले ही घोषित कर दिए थे सभी 11 उम्मीदवार
समाजवादी पार्टी ने भाजपा से एक दिन पहले सोमवार को विधान परिषद चुनाव के लिए अपने सभी 11 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए थे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रत्याशियों का परिचय कराते हुए चुनाव में उन्हें समर्थन देने की अपील की।
सपा ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मिर्जापुर-वाराणसी शिक्षक खंड से मौजूदा एमएलसी लाल बिहारी यादव को उम्मीदवार बनाया है। लखनऊ खंड शिक्षक क्षेत्र से सुशील कुमार, आगरा खंड शिक्षक क्षेत्र से प्रकाशचंद्र गुप्ता, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक क्षेत्र से कमलेश यादव और मुरादाबाद-बरेली शिक्षक क्षेत्र से दानिश अख्तर को प्रत्याशी बनाया गया है। मेरठ खंड शिक्षक क्षेत्र से नितिन तोमर सपा के उम्मीदवार होंगे।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सपा ने वाराणसी खंड स्नातक क्षेत्र से मौजूदा एमएलसी आशुतोष सिन्हा को मैदान में उतारा है। झांसी स्नातक क्षेत्र से डॉ. मान सिंह, आगरा खंड स्नातक क्षेत्र से शशांक यादव, मेरठ खंड स्नातक क्षेत्र से परमिंदर भाटी और लखनऊ स्नातक क्षेत्र से कांति सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है।
इस तरह दोनों दलों ने शिक्षक और स्नातक मतदाताओं वाले निर्वाचन क्षेत्रों में अपने-अपने उम्मीदवार उतारकर चुनावी तैयारियों को औपचारिक रूप से आगे बढ़ा दिया है।
11 सीटों के लिए शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया
विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव के लिए मंगलवार से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई। प्रत्याशियों के पास नामांकन दाखिल करने के लिए 6 अक्टूबर तक का समय है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया होगी, जिसके बाद चुनाव मैदान में बचे उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर सामने आएगी।
शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इन क्षेत्रों में निर्धारित श्रेणी के मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दलों के साथ-साथ शिक्षक संगठनों, कर्मचारी समूहों और संबंधित सामाजिक संगठनों की भूमिका भी इन चुनावों में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रत्याशियों के चयन के बाद अब दोनों प्रमुख दल अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में मतदाता संपर्क अभियान को धार देने की तैयारी में जुटेंगे। स्थानीय स्तर पर संगठन की सक्रियता, प्रत्याशी की व्यक्तिगत पहुंच और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं के बीच उसका संपर्क चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहेगा।
राज्यसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक हलचल
विधान परिषद चुनाव के प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों का ध्यान राज्यसभा की आगामी चुनावी गणित की ओर भी बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है। उपलब्ध विधानसभा संख्या के आधार पर भाजपा के सात और सपा के दो उम्मीदवारों के निर्वाचन की स्थिति अपेक्षाकृत स्पष्ट बताई जा रही है। हालांकि अतिरिक्त सीटों के लिए दोनों दलों को दूसरे दलों के विधायकों के समर्थन या क्रॉस वोटिंग की जरूरत पड़ सकती है।
मंगलवार को भाजपा की ओर से आठ और सपा की ओर से दो नामांकन पत्र खरीदे जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि पर्चा खरीदना अपने आप में अंतिम उम्मीदवार घोषित होने का प्रमाण नहीं है। वास्तविक तस्वीर नामांकन और उसके बाद होने वाली राजनीतिक गतिविधियों से अधिक स्पष्ट होगी।
सपा के वोटों का गणित क्या कहता है?
राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में सपा की संभावित रणनीति को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। पार्टी के मौजूदा विधायकों की संख्या को लेकर अलग-अलग राजनीतिक गणित सामने आ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सपा के पास विधानसभा में 101 विधायक हैं, लेकिन इनमें से छह विधायक ऐसे बताए जाते हैं जिन्होंने पिछले राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से अलग जाकर मतदान किया था।
इसी आधार पर सपा के प्रभावी वोटों की संख्या 95 के आसपास मानी जा रही है। इसके बाद महाराजी प्रजापति के सपा के साथ आने की स्थिति में यह संख्या 96 और पल्लवी पटेल के समर्थन की स्थिति में 97 तक पहुंचने का गणित प्रस्तुत किया जा रहा है।
इसके अलावा कांग्रेस के दो विधायक इंडिया गठबंधन के घटक के तौर पर सपा के साथ बताए जा रहे हैं। इनका समर्थन मिलने पर संख्या 99 तक पहुंच सकती है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के दो विधायकों के समर्थन को भी सपा के संभावित गणित में जोड़ा जा रहा है। इस आधार पर सपा के पक्ष में लगभग 101 वोट होने का दावा किया जा रहा है।
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि पिछले चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले कुछ अन्य विधायक इस बार सपा के पक्ष में जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो सपा के संभावित वोटों का आंकड़ा और बढ़ सकता है। हालांकि इन संभावित समर्थन समीकरणों को अंतिम परिणाम या पक्के राजनीतिक गठजोड़ के रूप में नहीं देखा जा सकता। वास्तविक स्थिति मतदान के समय ही स्पष्ट होगी।
एक राज्यसभा सीट के लिए 37 वोट का गणित
राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से एक उम्मीदवार के निर्वाचन के लिए 37 विधायकों के मतों की आवश्यकता होने का गणित सामने रखा जा रहा है। इस हिसाब से दो उम्मीदवारों के लिए 74 वोट पर्याप्त होंगे। उपलब्ध संख्या के आधार पर सपा के पास दो उम्मीदवारों को निर्वाचित कराने के बाद भी अतिरिक्त विधायक बचने की स्थिति बनती है।
इसी अतिरिक्त संख्या को देखते हुए सपा की ओर से तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की संभावनाओं पर राजनीतिक चर्चा हो रही है। यदि ऐसा होता है तो राज्यसभा चुनाव में मुकाबला बहुकोणीय हो सकता है और दोनों प्रमुख दलों के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना महत्वपूर्ण हो जाएगा।
हालांकि तीसरे उम्मीदवार को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व की रणनीति और नामांकन प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसी तरह भाजपा की ओर से भी अतिरिक्त सीट के लिए राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की जा सकती है।
एमएलसी चुनाव के बाद राज्यसभा पर निगाहें
उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधान परिषद और राज्यसभा के आगामी चुनाव एक-दूसरे से अलग चुनावी प्रक्रियाएं हैं, लेकिन दोनों को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां समानांतर रूप से चल रही हैं। एमएलसी चुनाव में शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच प्रभाव बढ़ाने की चुनौती है, जबकि राज्यसभा चुनाव में विधानसभा के भीतर संख्या बल और संभावित समर्थन समीकरण महत्वपूर्ण होंगे।
विधान परिषद चुनाव में भाजपा और सपा दोनों ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। अब प्रत्याशियों के नामांकन, चुनाव प्रचार और मतदाता संपर्क अभियान पर ध्यान केंद्रित होगा। 6 अक्टूबर तक नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी मुकाबले की औपचारिक तस्वीर और स्पष्ट होगी।
वहीं राज्यसभा चुनाव में भी दोनों दलों के बीच संभावित रणनीतिक कदमों पर नजर रहेगी। खास तौर पर अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने की स्थिति में समर्थन जुटाने, सहयोगी दलों के रुख और विधायकों के मतदान व्यवहार को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश की शिक्षक और स्नातक सीटों पर भाजपा तथा सपा के घोषित प्रत्याशियों के बीच मुकाबला आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगा। फिलहाल दोनों दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के जरिए चुनावी मैदान तैयार कर दिया है और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही विधान परिषद चुनाव की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।













