रिपोर्ट : इरफान अली लारी
कुशीनगर। तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में नारायणी नदी का उफान अब सिर्फ खेतों और रास्तों तक सीमित नहीं रह गया है। एपी तटबंध टूटने के बाद बाढ़ का पानी तेजी से आबादी की ओर बढ़ा और देखते ही देखते करीब 35 गांवों की जिंदगी को अपनी चपेट में ले लिया। जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक चूल्हे जल रहे थे, बच्चों की आवाजें गूंज रही थीं और परिवार अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त थे, वहां अब पानी और चिंता का कब्जा है।
बीती रात वीरवट कोहवलिया-जवही दयाल के पास एपी तटबंध टूटने के बाद नारायणी नदी का पानी आसपास के गांवों की ओर तेजी से फैल गया। पानी की रफ्तार और अचानक बदले हालात ने ग्रामीणों को संभलने तक का पूरा मौका नहीं दिया। कई परिवारों ने जो कुछ जरूरी समझा, उसे समेटा और सुरक्षित स्थानों की ओर निकल पड़े। किसी के सिर पर गठरी थी, किसी के हाथ में बच्चों का सामान, तो कोई अपने घर की बची-खुची गृहस्थी को किसी तरह सुरक्षित करने की कोशिश करता नजर आया।
यह सिर्फ बाढ़ की खबर नहीं है। यह उन परिवारों की कहानी है जिनके लिए एक रात में घर की चारदीवारी, अनाज, कपड़े, बिस्तर, जरूरी कागजात और वर्षों की मेहनत पानी के सामने असुरक्षित हो गई।
एक रात में बदल गई गांवों की तस्वीर
तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के वीरवट कोहवलिया-जवही दयाल के पास तटबंध टूटने की घटना के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ी। नारायणी नदी का पानी जवहीं दयाल एहतमाली, चैनपट्टी, घघवा जगदीश और जगलीपट्टी समेत अनेक गांवों में पहुंच गया। प्रशासनिक स्तर पर प्रभावित गांवों की संख्या और स्थिति का आकलन जारी है, लेकिन ग्रामीणों के लिए संकट की तस्वीर आंखों के सामने है।
पानी के गांवों में प्रवेश करते ही सबसे पहली चिंता घर बचाने की नहीं, बल्कि परिवार के लोगों को सुरक्षित निकालने की बन गई। जिन रास्तों से लोग रोज बाजार, स्कूल या खेतों तक जाते थे, वहां पानी का फैलाव हो गया। कई स्थानों पर आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों को ऊंचे स्थानों की तलाश करनी पड़ी।
ग्रामीणों के मुताबिक पानी बढ़ने की स्थिति ने उन्हें अचानक निर्णय लेने के लिए मजबूर कर दिया। घर में मौजूद सामान में से क्या बचाया जाए और क्या छोड़ दिया जाए, यह तय करने का समय भी कई परिवारों को नहीं मिला।
गृहस्थी सिर पर उठाकर निकलने की मजबूरी
बाढ़ आने के बाद सबसे मार्मिक तस्वीर उन परिवारों की है जो अपने घरों से निकलते समय सामान सिर पर रखकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते दिखाई दिए। वर्षों में धीरे-धीरे जुटाई गई गृहस्थी को कुछ गठरियों में समेटना किसी भी परिवार के लिए आसान नहीं होता।
किसी घर में अनाज था, किसी के पास जरूरी कपड़े और बिस्तर। कहीं बच्चों की किताबें थीं तो कहीं खेती-किसानी से जुड़े सामान। लेकिन पानी के बढ़ते स्तर के सामने प्राथमिकता सिर्फ इतनी रह गई कि परिवार के सदस्य सुरक्षित निकल सकें।
कई ग्रामीणों को बीती रात से खुले आसमान के नीचे समय गुजारना पड़ा। बारिश, पानी और असुरक्षा के बीच बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह स्थिति और कठिन हो गई है। जिन लोगों ने ऊंचे स्थानों पर शरण ली है, उनके सामने भी रहने और भोजन की समस्या बनी हुई है।
बाढ़ केवल घर की दीवारों को नहीं भिगोती, वह उस परिवार की पूरी दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर देती है। घर से निकलने के बाद सबसे बड़ा सवाल होता है कि अगली रात कहां गुजरेगी और अगले दिन भोजन का इंतजाम कैसे होगा।
पानी के साथ बढ़ती चिंता
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी का फैलाव बढ़ने के साथ ग्रामीणों की चिंताएं भी बढ़ी हैं। घरों में पानी घुसने के बाद जरूरी सामान को सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया है। जिन परिवारों ने किसी तरह सामान निकाल लिया, उनके सामने उसे रखने और सुरक्षित रखने की समस्या है।
कई परिवारों के लिए घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि उनकी पूरी आर्थिक व्यवस्था का केंद्र होता है। घर में रखा अनाज, कपड़े, घरेलू सामान और खेती से जुड़ी वस्तुएं उनके लिए संपत्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। बाढ़ के पानी के बीच इन सामानों को बचाने की कोशिश ग्रामीणों के लिए एक अलग संघर्ष बन गई है।
सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों को लेकर है जिनके साथ छोटे बच्चे, बुजुर्ग या बीमार लोग हैं। ऐसे लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।
खुले आसमान के नीचे रात काटने की पीड़ा
बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद कई परिवारों ने रात खुले आसमान के नीचे गुजारी। यह स्थिति किसी भी परिवार के लिए बेहद कठिन है। दिन में पानी और रात में अंधेरा—दोनों मिलकर खतरे और असुरक्षा की भावना को बढ़ा देते हैं।
ग्रामीणों के लिए तत्काल जरूरत सुरक्षित आश्रय, भोजन, पीने का पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की है। लंबे समय तक पानी में फंसे रहने पर संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और राहत टीमों के सामने इसलिए सिर्फ लोगों को निकालने की चुनौती नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के बाद भोजन, पेयजल, चिकित्सा और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी जिम्मेदारी है।
प्रशासन, एसडीआरएफ और पीएसी राहत कार्य में जुटे
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने तथा जरूरतमंद परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
तटबंध टूटने के बाद स्थिति तेजी से बदली है, इसलिए राहत कार्य में समय बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशासन की टीमें प्रभावित गांवों की स्थिति पर नजर रख रही हैं और जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।
बाढ़ जैसी आपदा में स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी के साथ ग्रामीणों की आपसी मदद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई बार पड़ोसी ही सबसे पहले एक-दूसरे के घर पहुंचते हैं और बच्चों, बुजुर्गों तथा महिलाओं को सुरक्षित निकालने में मदद करते हैं।
खेतों पर भी मंडराया संकट
बाढ़ का असर केवल आबादी तक सीमित नहीं रहता। ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार खेती है और पानी के फैलाव से खेत भी प्रभावित हुए हैं। जिन किसानों की फसलें पानी की चपेट में आई हैं, उनके सामने आर्थिक नुकसान का संकट खड़ा हो गया है।
किसानों के लिए फसल सिर्फ खेत में खड़ी हरियाली नहीं होती, बल्कि उसमें बीज, खाद, सिंचाई, श्रम और उम्मीद—सब कुछ लगा होता है। अचानक आई बाढ़ उस पूरी मेहनत को प्रभावित कर सकती है।
इसी वजह से बाढ़ के तत्काल राहत कार्य के साथ फसलों के नुकसान का आकलन भी महत्वपूर्ण है। प्रभावित किसानों को नुकसान के आधार पर समय पर सहायता मिलना उनके लिए बड़ी जरूरत होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा
बाढ़ की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावित लोगों को राहत सामग्री वितरित की और अधिकारियों को जरूरतमंदों तक हर संभव सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्थानीय विधायक डॉ. असीम राय से भी क्षेत्र में चिकित्सा शिविर लगाने को कहा। डॉ. राय पेशे से चिकित्सक भी हैं। बाढ़ के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत को देखते हुए चिकित्सा शिविरों को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ से जिन लोगों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
यह घोषणा उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके घर बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए हैं और जिनके लिए संकट सिर्फ आज की रात तक सीमित नहीं है। पानी उतरने के बाद भी उनके सामने घर की मरम्मत या पुनर्निर्माण की चुनौती बनी रहेगी।
पानी उतरने तक कम्युनिटी किचन चलाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में पानी उतरने तक कम्युनिटी किचन संचालित करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य बाढ़ में घरों से बाहर रहने वाले लोगों को भोजन उपलब्ध कराना है।
आपदा के समय भोजन की नियमित व्यवस्था राहत कार्य का अहम हिस्सा होती है। जिन परिवारों के घर पानी में घिरे हैं या जो सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं, उनके लिए रोज भोजन की उपलब्धता तत्काल आवश्यकता बन जाती है।
प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत व्यवस्था लगातार सक्रिय रखी जाए और जरूरत के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
युद्धस्तर पर बंधों की मरम्मत का निर्देश
एपी तटबंध टूटने के बाद मुख्यमंत्री ने बंधों की मरम्मत युद्धस्तर पर कराने के निर्देश दिए हैं। तटबंधों की स्थिति बाढ़ नियंत्रण के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। टूटे हिस्से की मरम्मत के साथ अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी निगरानी जरूरी है, ताकि पानी के फैलाव को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा सकें।
प्रशासन के सामने चुनौती दोहरी है—एक ओर पहले से प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना और दूसरी ओर आगे पानी के फैलाव को रोकने के लिए तटबंध तथा जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना।
फसल नुकसान का सर्वे और मुआवजे के निर्देश
मुख्यमंत्री ने नष्ट हुई फसलों का जल्द सर्वे कराने और किसानों को अतिशीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए यह राहत प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
सर्वे के दौरान वास्तविक नुकसान का आकलन और प्रभावित किसानों तक सहायता पहुंचाना चुनौतीपूर्ण काम हो सकता है। ग्रामीणों की अपेक्षा है कि नुकसान का आकलन जमीन पर वास्तविक स्थिति के आधार पर हो और राहत प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी निर्देश
बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। पानी में लंबे समय तक रहने, दूषित पानी के इस्तेमाल और सांप-बिच्छू जैसे जीवों के खतरे के कारण चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री ने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी वेनम इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों की सक्रियता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
यह व्यवस्था इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बाढ़ के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का सामान्य स्वास्थ्य तंत्र बाधित हो सकता है और छोटी स्वास्थ्य समस्या भी समय पर उपचार न मिलने पर गंभीर रूप ले सकती है।
बिजली व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने बिजली व्यवस्था दुरुस्त रखने तथा बिजली उपलब्ध न होने की स्थिति में जेनरेटर की व्यवस्था करने को कहा है।
रात के समय बिजली की अनुपलब्धता बाढ़ प्रभावित परिवारों की मुश्किलें और बढ़ा सकती है। अंधेरे में सुरक्षित आवाजाही, राहत कार्य और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में वैकल्पिक रोशनी की व्यवस्था राहत कार्य का जरूरी हिस्सा बन जाती है।
पानी उतरने के बाद भी खत्म नहीं होगी मुश्किल
बाढ़ का पानी उतरना राहत की शुरुआत हो सकता है, लेकिन प्रभावित परिवारों की वास्तविक परीक्षा उसके बाद शुरू होती है। घरों की सफाई, क्षतिग्रस्त सामान का निपटारा, पीने के पानी की व्यवस्था, बीमारी से बचाव और खेतों की स्थिति—इन सभी मोर्चों पर ग्रामीणों को लंबे समय तक जूझना पड़ सकता है।
जिन परिवारों ने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण ली है, उनके लिए घर वापसी भी आसान नहीं होगी। यदि मकान क्षतिग्रस्त हैं तो रहने की व्यवस्था अलग चुनौती होगी। वहीं जिन किसानों की फसल प्रभावित हुई है, उनके लिए अगली खेती की तैयारी आर्थिक दबाव के बीच करनी होगी।
इसलिए राहत केवल कुछ दिनों का अभियान नहीं, बल्कि बाढ़ के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण तक चलने वाली प्रक्रिया है।
प्रकृति की मार के बीच उम्मीद का सवाल
तमकुहीराज के बाढ़ प्रभावित गांवों में इस समय सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा का है। लोग अपना घर छोड़ चुके हैं, कई परिवारों ने जरूरी सामान तक नहीं बचा पाया और बहुत से लोग खुले आसमान के नीचे हैं। उनके लिए प्रशासन की राहत टीमें इस समय उम्मीद का सबसे बड़ा सहारा हैं।
बाढ़ की तस्वीरों में पानी दिखाई देता है, लेकिन उस पानी के भीतर डूबी हुई चीजें सिर्फ दीवारें और सामान नहीं हैं। उसमें परिवारों की छोटी-बड़ी बचत, किसानों की मेहनत, बच्चों की किताबें, महिलाओं की गृहस्थी और वर्षों की जमा पूंजी भी शामिल है।
प्रकृति की मार किसी को अवसर नहीं देती कि वह पहले अपनी जिंदगी समेट ले और फिर संकट का सामना करे। पानी जब अचानक घर में घुसता है तो आदमी के सामने सबसे पहले अपने परिवार को बचाने का सवाल खड़ा होता है। बाकी सब कुछ पीछे छूट जाता है।
तमकुहीराज के गांवों में इस समय भी यही कहानी दोहराई जा रही है—लोग घरों से निकल रहे हैं, सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे हैं और अपने पीछे छूटती गृहस्थी को देखते हुए यह उम्मीद कर रहे हैं कि पानी जल्द उतरेगा।
किसी के लिए यह एक बाढ़ है, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए यह जिंदगी को फिर से शुरू करने की चुनौती है। उन्हें सिर्फ राहत सामग्री नहीं, बल्कि सुरक्षित आश्रय, स्वास्थ्य सुविधा, भोजन, बिजली, क्षतिग्रस्त घरों के पुनर्निर्माण और फसल नुकसान की भरपाई की जरूरत होगी।
नारायणी के पानी ने जिन गांवों को घेरा है, वहां अब प्रशासन की तत्परता और राहत कार्य की गति ही तय करेगी कि इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों को कितनी जल्दी सहारा मिल पाता है। फिलहाल ग्रामीणों की नजर आसमान, नदी और प्रशासन—तीनों पर है।













