16 अक्टूबर 2026 5:25 अपराह्न

चार छात्राओं ने संभाली एक दिन के डीएम की सांकेतिक भूमिका, जनसुनवाई से सीखी प्रशासन की कार्यप्रणाली

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट देवरिया, उत्तर प्रदेश

देवरिया। बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने, उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था से परिचित कराने और भविष्य में जिम्मेदार भूमिकाएं निभाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से मिशन शक्ति अभियान फेज-6 के तहत एक अनूठी पहल की गई। जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी की पहल पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, बैतालपुर की चार छात्राओं को एक दिन के लिए सांकेतिक रूप से जिलाधिकारी की भूमिका निभाने का अवसर मिला। कलेक्ट्रेट पहुंचीं इन छात्राओं ने न केवल प्रशासनिक कामकाज को करीब से समझा, बल्कि जनसुनवाई के दौरान आम नागरिकों की समस्याएं सुनने, शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाने और उनके समयबद्ध निस्तारण की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी हासिल की।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को यह समझने का अवसर देना था कि प्रशासनिक जिम्मेदारियां किस प्रकार निभाई जाती हैं और जनता की समस्याओं के समाधान में अधिकारियों की क्या भूमिका होती है। इस व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से छात्राओं को नेतृत्व, निर्णय क्षमता, जवाबदेही और जनसेवा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराया गया।

मिशन शक्ति अभियान के तहत मिला प्रशासनिक अनुभव

मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन तथा सशक्तीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसी दिशा में देवरिया जिला प्रशासन की ओर से बालिकाओं को प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जोड़ने की पहल की गई। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, बैतालपुर की छात्राओं को कलेक्ट्रेट में अधिकारियों के कामकाज को समझने का अवसर देकर यह संदेश दिया गया कि बालिकाएं भी भविष्य में प्रशासन, शिक्षा, विज्ञान, खेल और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा सकती हैं।

सांकेतिक रूप से एक दिन की जिलाधिकारी की भूमिका निभाने वाली छात्राओं में कक्षा सात की रानीका पाण्डे, कक्षा आठ की मानवी पटेल और पलक पटेल तथा कक्षा नौ की रागिनी यादव शामिल रहीं। इन छात्राओं के लिए यह अनुभव सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों से अलग था, क्योंकि उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय वास्तविक कार्यस्थल पर समझने का अवसर मिला।

कलेक्ट्रेट में आयोजित इस गतिविधि के दौरान छात्राओं को बताया गया कि जिलाधिकारी का दायित्व केवल सरकारी बैठकों में शामिल होने या अधिकारियों को निर्देश देने तक सीमित नहीं है। आम जनता की शिकायतों को गंभीरता से सुनना, संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना और समस्याओं के समाधान की प्रगति पर नजर रखना भी प्रशासनिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जनसुनवाई में शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया समझी

इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण जनसुनवाई की कार्यप्रणाली से छात्राओं को परिचित कराना रहा। जनसुनवाई प्रशासन और आम जनता के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके जरिए नागरिक अपनी समस्याएं, शिकायतें और मांगें अधिकारियों के सामने रखते हैं। इसके बाद शिकायत की प्रकृति के अनुसार उसे संबंधित विभाग या अधिकारी तक पहुंचाया जाता है, ताकि नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

छात्राओं को शिकायतों के पंजीकरण से लेकर उनके विभागीय प्रेषण, कार्रवाई की निगरानी और समयबद्ध निस्तारण तक की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। उन्हें समझाया गया कि किसी शिकायत का समाधान केवल उसे दर्ज कर लेने से पूरा नहीं होता, बल्कि उस पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करना और समस्या के निस्तारण की स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी है।

जनसुनवाई की प्रक्रिया को समझने से छात्राओं को यह जानने का अवसर मिला कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता का कितना महत्व है। नागरिकों की समस्याओं को सुनते समय उनकी परिस्थितियों को समझना और शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना सुशासन के महत्वपूर्ण आधार हैं।

इस दौरान छात्राओं ने प्रशासनिक कामकाज से संबंधित विभिन्न सवाल भी पूछे। अधिकारियों ने उनके सवालों के जवाब देकर जिज्ञासाओं का समाधान किया। इस संवाद से छात्राओं को सरकारी व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को समझने और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के प्रति अपनी जानकारी बढ़ाने का अवसर मिला।

आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करना जरूरी : जिलाधिकारी

जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने बालिकाओं के व्यक्तित्व विकास में व्यावहारिक अनुभव की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बालिकाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता विकसित करने के लिए उन्हें ऐसे अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है, जिनसे वे वास्तविक परिस्थितियों को समझ सकें।

उन्होंने बताया कि प्रशासनिक व्यवस्था से परिचित होने से छात्राओं को जनसेवा, पारदर्शिता, संवेदनशीलता और समयबद्ध कार्रवाई जैसे मूलभूत सिद्धांतों को समझने में मदद मिलती है। जब बालिकाएं अधिकारियों के कामकाज और जिम्मेदारियों को करीब से देखती हैं, तो उनके सामने भविष्य में अपने लिए विभिन्न संभावनाओं को तलाशने का अवसर भी खुलता है।

जिलाधिकारी के अनुसार, बालिकाओं की क्षमता को सही दिशा देने के लिए उन्हें केवल शिक्षा तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अपने विचार व्यक्त करने, सवाल पूछने, परिस्थितियों का विश्लेषण करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझने के अवसर भी मिलने चाहिए। ऐसे अनुभव उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना को मजबूत कर सकते हैं।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बालिकाएं शिक्षा, विज्ञान, खेल, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। उचित मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध होने पर वे हर क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

शिक्षा के साथ व्यावहारिक ज्ञान भी महत्वपूर्ण

छात्राओं को एक दिन की सांकेतिक जिलाधिकारी की भूमिका से जोड़ने की पहल यह दर्शाती है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना या परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है। शिक्षा के साथ व्यावहारिक ज्ञान, सामाजिक समझ और नेतृत्व क्षमता का विकास भी आवश्यक है।

जब विद्यार्थियों को सरकारी संस्थानों, प्रशासनिक कार्यालयों और जनहित से जुड़े कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिलता है, तो उनके ज्ञान का दायरा बढ़ता है। वे समझ पाते हैं कि समाज की समस्याओं का समाधान किस प्रकार संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाता है और सार्वजनिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए किन गुणों की आवश्यकता होती है।

विशेष रूप से किशोरावस्था में इस तरह के अनुभव बालिकाओं को अपने भविष्य के बारे में गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से देखने के बाद उनके मन में सिविल सेवा और अन्य जिम्मेदार पदों पर कार्य करने की इच्छा विकसित हो सकती है। हालांकि, इस कार्यक्रम का व्यापक महत्व केवल किसी एक करियर के प्रति आकर्षण पैदा करना नहीं, बल्कि बालिकाओं को यह विश्वास दिलाना भी है कि वे अपनी योग्यता और मेहनत के बल पर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं को मिला यह अवसर इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि इसमें विद्यालयी शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संवाद स्थापित किया गया। इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर सामाजिक संस्थाओं और सार्वजनिक सेवा की वास्तविक भूमिका समझने में सहायता करती हैं।

महिला सशक्तीकरण की दिशा में जागरूकता पर जोर

मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन तथा सशक्तीकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। महिला सशक्तीकरण का अर्थ केवल सुरक्षा संबंधी उपायों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा, रोजगार, नेतृत्व तथा निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी के लिए सक्षम बनाना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रशासनिक कामकाज से बालिकाओं को परिचित कराने जैसी पहल उन्हें सार्वजनिक संस्थाओं की भूमिका समझने और अपने अधिकारों तथा जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होने में मदद कर सकती है। इससे उनके भीतर समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने और भविष्य में सकारात्मक भूमिका निभाने की प्रेरणा मिल सकती है।

देवरिया जिला प्रशासन की इस पहल के माध्यम से छात्राओं को यह संदेश दिया गया कि नेतृत्व करने के लिए आत्मविश्वास, ज्ञान, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की समझ आवश्यक है। जनसुनवाई की प्रक्रिया को जानने से उन्हें यह भी समझने का अवसर मिला कि आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना प्रशासनिक व्यवस्था का केंद्रीय दायित्व है।

अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी हुई गतिविधि

इस अवसर पर मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) चंद्रेश कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. राम जियावन मौर्य, अपर उपजिलाधिकारी (एएसडीएम) अखिलेश सिंह यादव और नम्रता सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, बैतालपुर की चार छात्राओं को प्रशासनिक व्यवस्था को नजदीक से देखने और समझने का अवसर प्रदान किया। जनसुनवाई की प्रक्रिया, शिकायतों के निस्तारण की प्रणाली और अधिकारियों की जिम्मेदारियों से परिचित होकर छात्राओं ने शासन-प्रशासन के कामकाज से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की।

यह पहल बालिकाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने, अपने लक्ष्य निर्धारित करने और भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदार भूमिकाएं निभाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर प्रोत्साहन मिलने से बालिकाओं की प्रशासनिक समझ, सामाजिक जागरूकता और नेतृत्व क्षमता को विकसित करने में मदद मिल सकती है।

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