16 अक्टूबर 2026 4:43 अपराह्न

फरार मॉडल के दावों से उलझी मौत की गुत्थी, अब सामने आएंगे शिवा कांड के अनकहे राज!

जनगणदूत के रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान की तस्वीर के साथ शिवा शर्मा मौत मामले का प्रतीकात्मक कोलाज, जिसमें मॉडल, अपार्टमेंट, एसयूवी और पुलिस जांच से जुड़े दृश्य शामिल हैं।

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रिपोर्ट: चुन्नीलाल प्रधान
जनगणदूत | अपराध एवं जांच रिपोर्ट

लखनऊ: राजधानी में कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार नए सवाल खड़े कर रहा है। इस प्रकरण में आरोपी बनाई गई मॉडल श्रद्धा दुबे फरार है, लेकिन अब उसने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखने की कोशिश की है। श्रद्धा ने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया कि वह पुलिस के सामने पेश होकर पूरी घटना की सच्चाई बताना चाहती है। उसने यह भी कहा कि शिवा की हत्या नहीं हुई थी, बल्कि उसने आत्महत्या की थी। हालांकि, यह श्रद्धा का दावा है और इसकी पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी।

शिवा शर्मा की मौत के बाद सामने आए घटनाक्रम, अपार्टमेंट से मिली आपत्तिजनक वस्तुओं, कथित धमकी भरे ऑडियो और आरोपी मॉडल की तलाश ने इस मामले को चर्चा में ला दिया है। पुलिस ने श्रद्धा की तलाश में कई टीमें लगाई हैं। इस बीच नेपाल सीमा के निकट बहराइच जिले के रुपईडीहा क्षेत्र में उसकी बताई जा रही एसयूवी बरामद होने से फरारी के घटनाक्रम की जांच को नया आधार मिला है। अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि घटना वाली रात वास्तव में क्या हुआ और मौत के पीछे की परिस्थितियां क्या थीं।

वीडियो जारी कर निर्दोष होने का दावा

बुधवार देर रात सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में श्रद्धा दुबे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया। उसने लोगों से अपील की कि उसके नाम को किसी नेता या अधिकारी से जोड़कर अफवाहें न फैलाई जाएं। उसका कहना था कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति से जुड़ाव होने भर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसके साथ कोई निजी संबंध या विशेष संपर्क है।

श्रद्धा ने वीडियो में यह भी कहा कि वह पुलिस के पास जाकर घटना से जुड़ी पूरी जानकारी देना चाहती है। उसने शिवा शर्मा की मौत को आत्महत्या बताते हुए हत्या की आशंका पर सवाल उठाया, लेकिन कथित आत्महत्या के कारणों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। उसके इस बयान के बाद मामले में कई सवाल फिर से चर्चा में आ गए हैं। यदि वह वास्तव में जांच में शामिल होती है, तो पुलिस उसके दावों, घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों का आमना-सामना कराकर उनकी सत्यता की पड़ताल कर सकती है।

चौथी मंजिल से गिरकर हुई थी कारोबारी की मौत

मामले की शुरुआत लखनऊ के बालू अड्डा स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट में हुई उस घटना से हुई, जिसमें चिकन कारोबार और कैफे संचालन से जुड़े शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, शिवा अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए थे। उनका शव केवल अंडरवियर में मिला था। वह अलीगंज के कपूरथला क्षेत्र में रहते थे और करीब एक वर्ष से श्रद्धा दुबे के साथ लिव-इन संबंध में रह रहे थे।

घटना के बाद पुलिस ने संबंधित फ्लैट की जांच की। वहां से सेक्स टॉयज, शक्तिवर्धक बताई गई दवाएं और अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं मिलने की बात सामने आई। इन वस्तुओं की मौजूदगी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हुईं, लेकिन किसी वस्तु की बरामदगी अपने आप में हत्या या आत्महत्या का निर्णायक प्रमाण नहीं होती। मामले में इनकी वास्तविक भूमिका, उपयोग और घटना से संबंध का निर्धारण जांच तथा फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।

मां ने लगाए गंभीर आरोप, दर्ज हुआ मुकदमा

शिवा की मां रंजना ने श्रद्धा दुबे पर अपने बेटे को झूठे मुकदमे में फंसाने, सिगरेट से जलाने और प्रताड़ित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी शिकायत के आधार पर श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों को अदालत में प्रमाणित होना अभी बाकी है। सभी आरोपियों की भूमिका का निर्धारण पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होगा।

परिवार की शिकायत ने इस मामले को केवल संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि शिवा के निजी जीवन और श्रद्धा के साथ उसके संबंधों की परिस्थितियों को भी जांच के दायरे में ला दिया है। पुलिस के लिए यह जानना जरूरी होगा कि दोनों के बीच किसी प्रकार का विवाद था या नहीं, घटना से पहले क्या बातचीत हुई और क्या किसी प्रत्यक्षदर्शी अथवा तकनीकी साक्ष्य से घटना की परिस्थितियों पर रोशनी पड़ती है।

कथित धमकी भरे ऑडियो ने बढ़ाए सवाल

शिवा शर्मा को कथित तौर पर धमकाने वाला एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस ऑडियो में सिगरेट लेने गए शिवा के देर से लौटने पर श्रद्धा नाराजगी जताती सुनाई देती है। बातचीत में जेल भेजने और किसी अधिकारी से शिकायत करने जैसी बातें होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित मीडिया रिपोर्ट में भी इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि से इनकार किया गया है।

ऐसे में ऑडियो की आवाज, उसकी मूल रिकॉर्डिंग, संपादन की संभावना और बातचीत के संदर्भ की जांच अहम होगी। केवल सोशल मीडिया पर किसी रिकॉर्डिंग के प्रसारित होने से उसे अंतिम साक्ष्य नहीं माना जा सकता। पुलिस को यह स्थापित करना होगा कि रिकॉर्डिंग वास्तविक है या नहीं और यदि वास्तविक है, तो उसका घटना से क्या संबंध है।

शिवा की मां ने यह भी बताया है कि उनका बेटा डायरी लिखता था। उनके मुताबिक, उस डायरी में श्रद्धा से जुड़े विवादों और कथित गतिविधियों के बारे में जानकारी हो सकती है। उन्होंने पुलिस से डायरी की सामग्री की जांच कर उसे विवेचना में शामिल करने की मांग की है। यदि डायरी पुलिस के कब्जे में आती है, तो उसकी लिखावट, प्रविष्टियों की तारीखों और अन्य साक्ष्यों से मिलान कर यह समझने की कोशिश की जा सकती है कि उसमें दर्ज बातों का कितना महत्व है।

नेपाल सीमा के पास पार्किंग में मिली एसयूवी

श्रद्धा की तलाश के दौरान पुलिस को बहराइच जिले के रुपईडीहा क्षेत्र में नेपाल सीमा के निकट एक पार्किंग स्थल पर एसयूवी खड़ी मिली। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वाहन 10 अक्टूबर को पार्किंग में खड़ा किया गया था। बताया गया कि दो महिलाएं और दो पुरुष वाहन से वहां पहुंचे थे। निर्धारित पार्किंग अवधि समाप्त होने के बाद भी वाहन लेने कोई नहीं आया। बाद में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और वाहन के पंजीकरण विवरण के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

रिपोर्टों में कहा गया है कि श्रद्धा अपनी बहन रश्मि, एक ड्राइवर और एक दोस्त के साथ बहराइच पहुंची थी। वाहन की बरामदगी के बाद लखनऊ पुलिस की टीम भी रुपईडीहा पहुंची। हालांकि, कार का नेपाल सीमा के निकट मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि सभी संबंधित व्यक्ति नेपाल चले गए हैं। उनकी वास्तविक लोकेशन और यात्रा के उद्देश्य का पता लगाने के लिए पुलिस को सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, टोल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करनी होगी।

पुलिस की कई टीमें तलाश में जुटीं

मामले में श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दस टीमें लगाए जाने और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां फरारी के रास्ते, संभावित ठिकानों और उसके साथ मौजूद बताए जा रहे लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं। पुलिस के लिए यह भी जरूरी होगा कि घटना के समय और उसके बाद की गतिविधियों का क्रम तैयार किया जाए, ताकि अलग-अलग बयानों और तकनीकी साक्ष्यों का मिलान किया जा सके।

कॉल डिटेल की जांच में राजधानी के कुछ चर्चित लोगों के नंबर मिलने की बात भी रिपोर्टों में कही गई है। इसी आधार पर श्रद्धा के बिल्डरों, नेताओं और अधिकारियों से संपर्क होने संबंधी चर्चाएं सामने आईं। लेकिन किसी व्यक्ति का फोन नंबर कॉल रिकॉर्ड में मिलना अपने आप में किसी अपराध में उसकी संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। संपर्कों की प्रकृति, बातचीत का समय और घटना से उनका संबंध स्थापित करना जांच का विषय है।

ओवरस्पीडिंग के चालान भी चर्चा में

नेपाल सीमा के निकट बरामद एसयूवी को लेकर परिवहन विभाग के रिकॉर्ड की जानकारी भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी-32-क्यूक्यू-0111 नंबर वाले इस वाहन का पंजीकरण श्रद्धा दुबे के नाम पर है। वाहन के तीन ओवरस्पीडिंग चालान लंबित होने की बात कही गई है। इनमें यमुना एक्सप्रेसवे पर 14 अप्रैल 2026 और 8 अगस्त 2026 को किए गए चालान का उल्लेख है। दोनों मामलों में दो-दो हजार रुपये के जुर्माने की जानकारी दी गई है।

बताया गया है कि संबंधित मार्ग पर अधिकतम निर्धारित गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जबकि वाहन की गति 123 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज हुई थी। ये यातायात संबंधी रिकॉर्ड हैं। इनका शिवा शर्मा की मौत से सीधा संबंध है या नहीं, यह अलग जांच का विषय है। हालांकि, वाहन की आवाजाही और उसके इस्तेमाल की समयरेखा तैयार करने में परिवहन तथा अन्य तकनीकी रिकॉर्ड उपयोगी हो सकते हैं।

अब जांच के सामने सबसे अहम सवाल

शिवा शर्मा मौत मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अपार्टमेंट में घटना के समय वास्तव में क्या हुआ था। क्या शिवा की मौत दुर्घटना, आत्महत्या या किसी अन्य परिस्थिति में हुई? क्या मौके से मिले भौतिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच किसी स्पष्ट निष्कर्ष की ओर संकेत करते हैं? कथित ऑडियो, डायरी और मोबाइल रिकॉर्ड इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हैं या नहीं? इन प्रश्नों के उत्तर केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि प्रमाणों की व्यवस्थित जांच से मिलेंगे।

श्रद्धा दुबे का वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखने का दावा इस प्रकरण का नया घटनाक्रम जरूर है, लेकिन उसके बयान को अंतिम सच मानना जल्दबाजी होगी। इसी तरह, परिवार की शिकायत में लगाए गए आरोपों को भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना है। यदि श्रद्धा पुलिस के सामने पेश होती है, तो उसके बयान की उपलब्ध साक्ष्यों से तुलना महत्वपूर्ण होगी। यदि वह फरार रहती है, तो उसकी तलाश और घटनाक्रम से जुड़े दूसरे लोगों से पूछताछ जांच की दिशा तय कर सकती है।

फिलहाल इस मामले में सार्वजनिक चर्चाओं से अधिक महत्व पुलिस की निष्पक्ष विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया का है। शिवा की मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होने और जिम्मेदार लोगों की भूमिका प्रमाणित होने के बाद ही इस प्रकरण का पूरा सच सामने आ सकेगा।

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