16 अक्टूबर 2026 6:00 अपराह्न

उत्तर प्रदेश में बारिश-तूफान का कहर: तीन दिन में 81 मौतें, 62 घायल, 2,254 मकान क्षतिग्रस्त

उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और जलभराव की तस्वीरों के साथ रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान की फीचर इमेज

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चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सितंबर के अंतिम दिनों में मौसम ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि भारी बारिश, आंधी, वज्रपात और जलभराव ने प्रदेश के कई हिस्सों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। 25 से 27 सितंबर के बीच सामने आए आंकड़ों के मुताबिक बारिश और इससे जुड़ी घटनाओं में प्रदेश में 81 लोगों की मौत हुई है, जबकि 62 लोग घायल हुए हैं। 154 पशुओं की भी जान गई और 2,254 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। प्रभावित जिलों से सूचनाएं जुटाए जाने के साथ इन आंकड़ों में बदलाव संभव है।

इससे पहले 25-26 सितंबर की अवधि में 56 मौत, 46 घायल, 107 पशुहानि और 1,021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना दी गई थी। इसके बाद 27 सितंबर को 25 और मौत, 16 घायल, 47 पशुहानि तथा 1,233 और मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना सामने आई। इस तरह तीन दिनों में बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं से हुए नुकसान की तस्वीर और गंभीर हो गई।

तीन दिनों की बारिश ने बदली तस्वीर

उत्तर प्रदेश में 25 से 27 सितंबर के दौरान बारिश सामान्य से कई गुना अधिक रही। 25 सितंबर की सुबह से 27 सितंबर की सुबह तक राज्य में 97.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि का संचयी सामान्य औसत 4.5 मिलीमीटर बताया गया है। यानी बारिश सामान्य से करीब 21 गुना रही। 25-26 सितंबर की अवधि में भी सामान्य से कई गुना अधिक बारिश दर्ज की गई थी।

27 सितंबर को भी बारिश का सिलसिला पूरी तरह नहीं थमा। इस दिन राज्य में 45.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने की सूचना है, जबकि सामान्य आंकड़ा 1.8 मिलीमीटर था। मौसम की इस असाधारण स्थिति ने कई जिलों में जलभराव, बाढ़ जैसे हालात और मकानों को नुकसान की स्थिति पैदा कर दी।

सीतापुर, लखीमपुर खीरी और बहराइच में अधिक जनहानि

25 और 26 सितंबर के दौरान उपलब्ध जिलावार आंकड़ों में सीतापुर में सात मौतें दर्ज की गईं। लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच मौतें हुईं। अयोध्या और गोरखपुर में चार-चार लोगों की मौत की सूचना थी। बारिश, आकाशीय बिजली, मकान अथवा दीवार गिरने और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जनहानि हुई।

27 सितंबर को स्थिति और गंभीर हुई। उपलब्ध तीन-दिवसीय रिपोर्ट के मुताबिक उस दिन अकेले 25 लोगों की मौत हुई। इनमें महाराजगंज में चार तथा बाराबंकी और हरदोई में तीन-तीन मौतों की सूचना है। इसके साथ तीन दिनों में प्रदेश की कुल बारिश-संबंधी मौतों का आंकड़ा 81 तक पहुंच गया।

हरदोई में सबसे ज्यादा मकानों को नुकसान

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बारिश और आंधी का असर केवल जनहानि तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीण और शहरी मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। 25-26 सितंबर की रिपोर्ट में हरदोई में 272 मकान, सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 तथा बहराइच में 44 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना थी।

27 सितंबर को 1,233 और मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना सामने आई। इस तरह तीन दिनों में कुल क्षतिग्रस्त मकानों की संख्या 2,254 बताई गई है। मकानों को हुए नुकसान के कारण अनेक परिवारों के सामने सुरक्षित रहने की जगह की समस्या भी पैदा हुई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।

बारिश की मार से पशुधन भी प्रभावित

आपदा में किसानों और पशुपालकों को भी नुकसान उठाना पड़ा है। 25-26 सितंबर के दौरान 107 पशुहानि की सूचना थी। इनमें हरदोई में 28, सीतापुर में 16 और कन्नौज में 14 पशुओं की मौत दर्ज की गई। बहराइच और कानपुर देहात में सात-सात तथा उन्नाव में छह पशुओं की हानि की सूचना सामने आई।

27 सितंबर को 47 और पशुओं की हानि दर्ज होने के बाद तीन दिनों का कुल आंकड़ा 154 तक पहुंच गया। पशुधन का नुकसान ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक चुनौती बन सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका खेती के साथ पशुपालन पर भी निर्भर रहती है।

घायलों में हरदोई आगे

भारी बारिश और आंधी से घायल लोगों की संख्या भी बढ़ी है। 25-26 सितंबर के आंकड़ों में कुल 46 लोगों के घायल होने की सूचना थी। इनमें हरदोई में सात, मैनपुरी, श्रावस्ती और बाराबंकी में पांच-पांच तथा सीतापुर और लखीमपुर खीरी में तीन-तीन घायल बताए गए थे।

27 सितंबर को 16 और लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई। इसके साथ तीन दिनों में कुल घायलों की संख्या 62 बताई गई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य जारी रखने और जरूरतमंद लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाने पर प्रशासन की ओर से जोर दिया गया है।

फर्रुखाबाद और कन्नौज में असाधारण बारिश

बारिश की तीव्रता का अंदाजा जिलों के सामान्य और वास्तविक वर्षा आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार फर्रुखाबाद में बारिश सामान्य से 7,385 प्रतिशत अधिक रही। कन्नौज में यह अंतर 5,664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4,408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4,240 प्रतिशत और महोबा में 4,100 प्रतिशत दर्ज किया गया।

बीते 24 घंटे के दौरान फर्रुखाबाद के कैंपियरगंज क्षेत्र में 320 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। गोरखपुर के बर्डघाट में 234.2 मिलीमीटर, खीरी के ढांगिनी में 195 मिलीमीटर, महाराजगंज के ट्रामोहानी घाट क्षेत्र में 186 मिलीमीटर और गोरखपुर में 179.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने की सूचना है। बरेली और मुरादाबाद के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश दर्ज हुई।

तराई और पूर्वांचल में खतरा बरकरार

भारी बारिश का असर खासतौर पर तराई और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में दिखाई दिया। नदियों और नालों में पानी बढ़ने तथा निचले इलाकों में जलभराव के कारण स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। राहत एजेंसियों की ओर से जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के प्रयास किए गए।

मौसम विभाग की ओर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई थी। ऐसे में पहले से जलभराव और क्षति झेल चुके इलाकों में स्थानीय प्रशासन की सतर्कता महत्वपूर्ण बनी हुई है।

फसल नुकसान का सर्वे शुरू

मौसम की मार से खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। प्रभावित जिलों में फसल क्षति का आकलन कराने के निर्देश दिए गए हैं। श्रावस्ती में कम से कम 87 हेक्टेयर फसल क्षेत्र के नुकसान की सूचना सामने आई है। अधिकारियों को किसानों की क्षति का सर्वे कर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया है।

फसल नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सर्वे पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बारिश से खेतों में पानी भरने, कटाई के लिए तैयार फसलों के प्रभावित होने और पशुधन के नुकसान का असर आने वाले दिनों में दिखाई दे सकता है।

राहत और बचाव अभियान जारी

राहत विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक अधिकारियों को सक्रिय रहने और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। जिन परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था और पात्र परिवारों को आवास योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया है। किसानों के नुकसान का सर्वे कर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश हैं।

जलभराव वाले क्षेत्रों में लोगों को अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है। नदी, नाले और तेज बहाव वाली जलधाराओं से दूर रहने को कहा गया है। प्रशासन ने आपात स्थिति में राहत आयुक्त कार्यालय की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करने की अपील की है।

आंकड़े बताते हैं आपदा की गंभीरता

25 से 27 सितंबर के बीच सामने आए आंकड़ों को देखें तो तीन दिनों में 81 मौतें, 62 घायल, 154 पशुहानि और 2,254 क्षतिग्रस्त मकान इस बारिश की गंभीरता को दर्शाते हैं। वहीं 25-26 सितंबर के शुरुआती आंकड़ों में ही 56 मौत और 1,021 मकानों की क्षति सामने आ गई थी। इसके बाद 27 सितंबर के आंकड़ों ने नुकसान की तस्वीर को और गंभीर कर दिया।

उत्तर प्रदेश में चालू मानसून सीजन के दौरान कुल बारिश दीर्घकालिक औसत से अधिक रही है, लेकिन हाल के कुछ दिनों में हुई अत्यधिक बारिश ने कई जिलों में स्थानीय स्तर पर असाधारण परिस्थितियां पैदा कर दीं। तराई, पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के अनेक हिस्सों में जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं।

अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है, वहीं दूसरी ओर फसल, पशुधन और मकानों की क्षति का सही आकलन कर प्रभावित लोगों तक नियमानुसार सहायता पहुंचानी है। मौसम पूरी तरह सामान्य होने तक निचले इलाकों और जलभराव वाले क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखना जरूरी होगा।

राहत हेल्पलाइन : 1070

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