नौ माह की बछिया बिना बच्चा दिए दे रही दूध, प्रकृति की अनोखी लीला से ग्रामीण हैरान

जौनपुर में नौ माह की बछिया बिना बच्चा दिए दूध देती हुई, पशुपालक और रिपोर्टर कीरत यादव के साथ फीचर इमेज

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कीरत यादव की रिपोर्ट

जौनपुर। जिले के महराजगंज थाना क्षेत्र के बसहरा कला गांव में इन दिनों एक असामान्य पशु व्यवहार चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां फूलचंद विश्वकर्मा की महज नौ माह की बछिया बिना बच्चा दिए दूध दे रही है। बछिया के थनों से नियमित रूप से दूध निकलने की जानकारी सामने आने के बाद न केवल पशुपालक बल्कि गांव और आसपास के लोग भी इसे लेकर हैरान हैं। ग्रामीणों के बीच यह मामला कौतूहल का विषय बना हुआ है और लोग बड़ी संख्या में बछिया को देखने पहुंच रहे हैं।

पशुपालक फूलचंद विश्वकर्मा के मुताबिक, करीब नौ माह पहले उनकी गाय ने इस बछिया को जन्म दिया था। जन्म के बाद से ही बछिया सामान्य रूप से विकसित होती रही। वह देखने में स्वस्थ और सुडौल है तथा शुरुआत से ही अपनी मां का दूध पीती रही है। परिवार के लोगों ने भी कभी यह नहीं सोचा था कि इतनी कम उम्र में बछिया के थनों से दूध निकलना शुरू हो जाएगा।

अचानक थनों से निकलने लगा दूध

पशुपालक के अनुसार, बछिया जब करीब नौ माह की हुई तो उसके शरीर में एक असामान्य बदलाव दिखाई देने लगा। उसके थनों में दूध भरने लगा और कुछ समय बाद दूध बाहर निकलता हुआ नजर आया। खास बात यह रही कि बछिया के किसी तरह के गर्भधारण या बच्चा देने का सवाल ही नहीं था। इसके बावजूद उसके थनों से दूध निकलने लगा।

परिवार के लोगों ने जब इस बदलाव को देखा तो पहले उन्हें भी विश्वास नहीं हुआ। बाद में बछिया के बैठने के दौरान भी उसके थनों से दूध निकलने लगा। इसके बाद पशुपालक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पशु चिकित्सक से संपर्क किया और बछिया की स्थिति के बारे में जानकारी दी।

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पशु चिकित्सक की सलाह पर निकाला जा रहा दूध

पशुपालक ने बताया कि पशु चिकित्सक को जानकारी देने के बाद उनकी सलाह के अनुसार बछिया के थनों से सुबह और शाम दूध निकाला जा रहा है। परिवार के मुताबिक, बछिया से प्रतिदिन लगभग तीन लीटर दूध प्राप्त हो रहा है।

यह मात्रा सामान्य तौर पर इतनी कम उम्र की बछिया के लिए लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बनी हुई है। पशुपालक का कहना है कि दूध निकालने के दौरान बछिया को किसी विशेष परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। वह सामान्य रूप से भोजन कर रही है और सक्रिय भी दिखाई देती है।

63 रुपये लीटर बिक रहा बछिया का दूध

पशुपालक के मुताबिक, बछिया से प्राप्त दूध को स्थानीय डेयरी पर करीब 63 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जा रहा है। इस तरह बछिया से रोजाना प्राप्त होने वाला दूध परिवार के लिए अतिरिक्त आय का साधन भी बन गया है।

हालांकि, परिवार के लिए आर्थिक पहलू से ज्यादा यह घटना अपने आप में हैरानी का कारण बनी हुई है। ग्रामीणों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि बिना बच्चा दिए इतनी कम उम्र में बछिया के थनों से दूध कैसे निकल रहा है।

खुद मां का दूध भी पी रही बछिया

इस पूरे मामले में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। दूध देने वाली नौ माह की बछिया अभी भी अपनी मां का दूध पी रही है। यानी एक तरफ बछिया के थनों से दूध निकाला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वह खुद अपनी मां के दूध पर निर्भर है।

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पशुपालक के अनुसार, बछिया की मां भी दोनों समय मिलाकर करीब 14 लीटर दूध देती है। मां और बछिया दोनों के दूध देने की स्थिति ने इस घटना को और अधिक असामान्य बना दिया है। परिवार के लोग बछिया की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं।

गांव में कौतूहल, देखने पहुंच रहे लोग

बसहरा कला गांव में बछिया के दूध देने की जानकारी फैलने के बाद लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। आसपास के ग्रामीण भी इसे देखने के लिए फूलचंद विश्वकर्मा के घर पहुंच रहे हैं। कोई इसे प्रकृति का अनोखा चमत्कार बता रहा है तो कोई इसके पीछे पशु शरीर में होने वाले किसी जैविक बदलाव की संभावना व्यक्त कर रहा है।

ग्रामीणों के लिए यह घटना इसलिए भी असामान्य है क्योंकि आम तौर पर गाय-बछिया में दूध उत्पादन को प्रसव और स्तन ग्रंथियों में होने वाले प्राकृतिक हार्मोनल बदलावों से जोड़ा जाता है। ऐसे में बिना बच्चा दिए नौ माह की बछिया में दूध का आना लोगों की जिज्ञासा बढ़ा रहा है।

चिकित्सकीय जांच से ही सामने आएगा वास्तविक कारण

हालांकि ग्रामीण इसे प्रकृति की अनोखी लीला के रूप में देख रहे हैं, लेकिन ऐसी स्थिति के वास्तविक कारण के बारे में अंतिम निष्कर्ष पशु चिकित्सकीय जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। किसी पशु में सामान्य उम्र से पहले या बिना प्रसव के दूध जैसा स्राव दिखाई देने के पीछे अलग-अलग जैविक या हार्मोनल कारण हो सकते हैं। इसलिए पशुपालक के लिए जरूरी है कि वह विशेषज्ञ पशु चिकित्सक की निगरानी में बछिया के स्वास्थ्य की जांच कराता रहे।

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बछिया के दूध देने की घटना को लेकर फिलहाल गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन पशुपालक का कहना है कि उनकी प्राथमिकता बछिया के स्वास्थ्य और सामान्य विकास पर नजर रखना है। परिवार का कहना है कि यदि पशु चिकित्सक की ओर से आगे कोई विशेष जांच या सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है तो उसका पालन किया जाएगा।

प्रकृति के रहस्यों ने फिर चौंकाया

बसहरा कला की यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि पशु जगत में कई ऐसे जैविक बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिनकी वजह आम लोगों के लिए आसानी से समझना संभव नहीं होता। नौ माह की बछिया का बिना बच्चा दिए दूध देना फिलहाल ग्रामीणों के लिए कौतूहल और चर्चा का विषय है।

पशुपालक फूलचंद विश्वकर्मा के परिवार के लिए यह अनुभव जितना अप्रत्याशित है, उतना ही गांव के लोगों के लिए भी हैरान करने वाला। बछिया की उम्र, उसका सामान्य रूप से स्वस्थ रहना, अपनी मां का दूध पीना और इसके बावजूद स्वयं दूध देना इस पूरे मामले को असामान्य बना रहा है।

फिलहाल बसहरा कला गांव में लोग इस बछिया को कौतूहल की नजर से देख रहे हैं। वहीं, पशुपालक परिवार पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार उसकी देखभाल कर रहा है। इस असामान्य घटना का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या है, यह विशेषज्ञ जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। तब तक नौ माह की यह बछिया ग्रामीणों के बीच प्रकृति की एक अनोखी और हैरान करने वाली घटना बनी हुई है।

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Author: यायावर

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