देवरिया

भीषण गर्मी में बिजली संकट से बेहाल जनता, सांसद रमाशंकर राजभर ने प्रमुख सचिव को लिखा पत्र

सलेमपुर, भाटपाररानी, बेल्थरा रोड समेत कई इलाकों में अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज से जनजीवन अस्त-व्यस्त

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया। उत्तर प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच पूर्वांचल के कई जिलों में बिजली संकट ने आम लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। खासकर सलेमपुर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सलेमपुर, भाटपाररानी, बांसडीह, सिकंदरपुर और बेल्थरा रोड समेत देवरिया और बलिया के अनेक क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती से लोग त्रस्त हैं। दिन हो या रात, कई-कई घंटे तक बिजली गुल रहने से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोग न तो ठीक से सो पा रहे हैं और न ही दैनिक कार्य सुचारु रूप से कर पा रहे हैं।

इसी गंभीर समस्या को लेकर सलेमपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर उर्फ विद्यार्थी ने उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर तत्काल समाधान की मांग की है। सांसद ने पत्र में कहा है कि भीषण गर्मी के इस दौर में लगातार हो रही बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या ने जनता का जीवन दूभर कर दिया है। उन्होंने सरकार से तत्काल प्रभाव से विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में सुधार करने और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने की मांग की है।

गर्मी और बिजली कटौती ने बढ़ाई लोगों की परेशानी

पूर्वांचल के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आती हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। लेकिन जब घरों में भी बिजली न हो तो लोगों की परेशानी और अधिक बढ़ जाती है। सलेमपुर संसदीय क्षेत्र के अनेक गांवों और कस्बों में रोजाना सात से आठ घंटे तक बिजली कटौती की शिकायत सामने आ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली कभी भी चली जाती है और कई घंटे तक वापस नहीं आती। रात के समय कटौती होने से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली विभाग की ओर से न तो कोई स्पष्ट सूचना दी जाती है और न ही कटौती का समय निर्धारित है। इससे लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

लो-वोल्टेज और फाल्ट की समस्या बनी बड़ी मुसीबत

केवल बिजली कटौती ही नहीं, बल्कि लो-वोल्टेज और लगातार हो रहे फाल्ट भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुके हैं। कई इलाकों में पंखे और कूलर नाम मात्र के लिए चल रहे हैं। पानी की मोटरें नहीं चल पाने से पेयजल संकट भी गहराने लगा है। किसानों और छोटे व्यापारियों को भी इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। ट्रांसफार्मरों पर अत्यधिक लोड और जर्जर लाइनें भी समस्या की प्रमुख वजह बन रही हैं। गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग भी बढ़ी है, लेकिन व्यवस्थाएं उसी अनुपात में मजबूत नहीं की गईं।

सांसद ने प्रमुख सचिव से की त्वरित कार्रवाई की मांग

सपा सांसद रमाशंकर राजभर ने उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव को भेजे गए पत्र में कहा कि जनता इस समय भीषण गर्मी से जूझ रही है और ऐसे में बिजली संकट ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। उन्होंने लिखा कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में घंटों बिजली कटौती हो रही है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।

सांसद ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि लो-वोल्टेज और बार-बार फाल्ट होने से आम लोगों के घरेलू उपकरण भी खराब हो रहे हैं। उन्होंने शासन से मांग की कि विद्युत विभाग के अधिकारियों को निर्देश देकर तत्काल विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में सुधार कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

अस्पतालों, दुकानों और छात्रों पर भी असर

बिजली संकट का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। छोटे अस्पतालों, क्लीनिकों और दवा दुकानों में भी बिजली कटौती से कार्य प्रभावित हो रहा है। कई जगहों पर इन्वर्टर और जनरेटर भी जवाब देने लगे हैं। वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र भी बिजली संकट के कारण परेशान हैं।

रात के समय बिजली न रहने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी बढ़ रही है। दुकानदारों का कहना है कि लगातार बिजली जाने से कारोबार पर असर पड़ रहा है। खासकर आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और डेयरी उत्पाद बेचने वाले व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ग्रामीण इलाकों में बढ़ रही नाराजगी

देवरिया और बलिया के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट को लेकर लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। कई गांवों में लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार बिजली आपूर्ति को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही और खराब प्रबंधन का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। कई इलाकों में ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद दिनों तक नहीं बदले जाते, जिससे लंबे समय तक अंधेरा छाया रहता है।

ऊर्जा संकट के बीच सरकार पर बढ़ा दबाव

प्रदेश में बढ़ती गर्मी और बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच ऊर्जा विभाग पर भी दबाव लगातार बढ़ रहा है। एक ओर सरकार 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विपक्षी दल भी बिजली संकट को लेकर सरकार पर हमलावर हैं।

सपा सांसद रमाशंकर राजभर का यह पत्र ऐसे समय आया है जब प्रदेश के कई जिलों से बिजली संकट की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है।

जनता को राहत मिलने की उम्मीद

सांसद द्वारा प्रमुख सचिव को पत्र भेजे जाने के बाद क्षेत्रीय लोगों को उम्मीद है कि शासन स्तर पर इस समस्या का संज्ञान लिया जाएगा और जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार होगा। लोगों की मांग है कि अघोषित कटौती पर रोक लगाई जाए, लो-वोल्टेज की समस्या दूर की जाए और फाल्ट की घटनाओं को कम करने के लिए तकनीकी व्यवस्था मजबूत की जाए।

भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि लोगों की बुनियादी जरूरत बन चुकी है। ऐसे में जनता चाहती है कि सरकार और बिजली विभाग संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित कार्रवाई करे, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

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