सौ वर्षों से जीवंत आस्था की परंपरा : चौरा माता मंदिर में वार्षिक गांव मद्दे पूजा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
ब्राह्मणपुर गांव में आयोजित हुआ भव्य धार्मिक आयोजन, हजारों श्रद्धालुओं ने मां चौरा का लिया आशीर्वाद
राम कीर्ति यादव की रिपोर्ट
जौनपुर जनपद के केराकत क्षेत्र अंतर्गत चंदवक थाना क्षेत्र के ब्राह्मणपुर गांव स्थित प्राचीन चौरा माता मंदिर में रविवार को आयोजित वार्षिक गांव मद्दे पूजा श्रद्धा, भक्ति और आस्था के अद्भुत संगम का साक्षी बनी। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण एवं आसपास के क्षेत्रों से आए भक्तों ने मंदिर पहुंचकर माता रानी के दर्शन किए और परिवार तथा गांव की सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा, जबकि शाम होते-होते भक्तों की भीड़ इतनी बढ़ गई कि परिसर पूरी तरह श्रद्धालुओं से भर गया।
यह धार्मिक आयोजन केवल एक पूजा कार्यक्रम नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है। लगभग एक शताब्दी से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है, जिस भावना से पूर्वजों ने इसकी शुरुआत की थी।
100 वर्षों से निभाई जा रही है आस्था की अनूठी परंपरा
स्थानीय बुजुर्गों और ग्रामीणों के अनुसार चौरा माता मंदिर में आयोजित होने वाली गांव मद्दे पूजा की परंपरा लगभग 100 वर्ष पुरानी है। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही यह धार्मिक विरासत आज भी लोगों के मन में गहरी आस्था का केंद्र बनी हुई है। गांव के लोग मानते हैं कि माता चौरा की कृपा से गांव में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है तथा किसी भी प्रकार की प्राकृतिक या सामाजिक विपत्ति से रक्षा होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि गांव के सामूहिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यही कारण है कि गांव से बाहर रहने वाले लोग भी इस अवसर पर अपने पैतृक गांव पहुंचने का प्रयास करते हैं ताकि इस विशेष पूजा में शामिल होकर परंपरा का निर्वहन कर सकें।
शाम छह बजे से शुरू हुआ पूजन, रात तक गूंजते रहे जयकारे
वार्षिक गांव मद्दे पूजा का शुभारंभ रविवार शाम लगभग छह बजे विधि-विधान के साथ किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। मंदिर परिसर में माता के जयकारों की गूंज लगातार सुनाई देती रही।
पूजा कार्यक्रम रात नौ बजे तक चला और लगभग तीन घंटे तक श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ अनुष्ठानों में सहभागी बने रहे। इस दौरान भक्तों ने माता चौरा के चरणों में नारियल, फूल, प्रसाद और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की।
पूजा के दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की विशेष भागीदारी देखने को मिली। कई परिवार अपने छोटे बच्चों के साथ मंदिर पहुंचे और उन्हें भी इस परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया।
दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु, मंदिर परिसर में उमड़ी भारी भीड़
इस वर्ष आयोजित पूजा में केवल ब्राह्मणपुर गांव ही नहीं बल्कि आसपास के अनेक गांवों और कस्बों से भी श्रद्धालु पहुंचे। जैसे-जैसे शाम का समय बढ़ता गया, मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही।
मंदिर परिसर में दर्शन और पूजा के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने अनुशासन और धार्मिक मर्यादा का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की। ग्रामीणों के सहयोग से व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखा गया, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।
भक्तों का मानना है कि माता चौरा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य पूरी होती है। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में लोग हर वर्ष इस पूजा में शामिल होते हैं।
ग्रामीणों और मंदिर समिति ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
पूजा कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर संचालक बृजेश यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके नेतृत्व में गांव के अनेक लोगों ने आयोजन की तैयारियों से लेकर व्यवस्थाओं के संचालन तक जिम्मेदारी निभाई।
कार्यक्रम में मदन भगत, पिंटू, संजय, रोहन, दिवाकर, लालजी, मनोहर, मनोज, दीपेश और दीपक सहित अनेक ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने मिलकर श्रद्धालुओं की सुविधा, पूजा व्यवस्था और आयोजन की गरिमा बनाए रखने के लिए सहयोग किया।
ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में एकजुटता की भावना मजबूत होती है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।
धार्मिक सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश
चौरा माता मंदिर में आयोजित वार्षिक गांव मद्दे पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस आयोजन के माध्यम से गांव के लोग एक मंच पर एकत्रित होकर सामूहिक सहभागिता का परिचय देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के पारंपरिक आयोजन सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे आपसी सहयोग, भाईचारा और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा मिलती है।
ब्राह्मणपुर गांव का यह आयोजन इस बात का उदाहरण है कि आधुनिकता के दौर में भी ग्रामीण समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों और धार्मिक परंपराओं को पूरी श्रद्धा के साथ संजोए हुए है।
आस्था, परंपरा और संस्कृति का जीवंत केंद्र बना चौरा माता मंदिर
रविवार को संपन्न हुई वार्षिक गांव मद्दे पूजा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि चौरा माता मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां होने वाला यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि गांव की सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करता है।
हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और ग्रामीणों के उत्साह ने इस आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया। श्रद्धा, विश्वास और सामुदायिक एकता का यह संगम आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी परंपराओं से जोड़ने का कार्य करता रहेगा।
चौरा माता मंदिर वार्षिक गांव मद्दे पूजा: सवाल-जवाब
चौरा माता मंदिर में कौन सा आयोजन हुआ?
ब्राह्मणपुर गांव स्थित प्राचीन चौरा माता मंदिर में वार्षिक गांव मद्दे पूजा का आयोजन किया गया।
यह पूजा कितनी पुरानी परंपरा मानी जाती है?
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह परंपरा लगभग 100 वर्षों से चली आ रही है।
पूजा कब से कब तक चली?
पूजा शाम 6 बजे शुरू हुई और रात 9 बजे तक लगभग तीन घंटे तक चली।
आयोजन में कितने श्रद्धालु शामिल हुए?
इस वार्षिक पूजा में हजारों श्रद्धालु और ग्रामीण शामिल हुए, जिससे मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहा।
इस आयोजन का मुख्य संदेश क्या रहा?
यह पूजा धार्मिक आस्था, प्राचीन परंपरा, सामाजिक एकता और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बनी।








