23 अक्टूबर 2026 5:46 पूर्वाह्न

पढ़ाई के साथ पत्रकारिता के गुर सीख रहे बच्चे, उनके संपादन में निकला बाल अखबार ‘दुलरुआ’; सरकारी स्कूल में शिक्षा का अनूठा नवाचार

गोंडा के कंपोजिट विद्यालय इमरती विसेन में बाल अखबार ‘दुलरुआ’ का लोकार्पण करते अधिकारी और छात्राएं, साथ में रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान।

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

The specified slider id does not exist.

रिपोर्ट: चुन्नीलाल प्रधान

गोंडा: किताबों से मिलने वाला ज्ञान जब जीवन के व्यावहारिक अनुभवों से जुड़ता है, तो शिक्षा का उद्देश्य और भी व्यापक हो जाता है। बच्चे केवल पाठ याद करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने आसपास की घटनाओं को समझें, सवाल पूछें, विचार व्यक्त करें और अपनी रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाएं, तो विद्यालय वास्तव में सीखने की जीवंत प्रयोगशाला बन जाता है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक सरकारी विद्यालय में इसी सोच को साकार करने की अनूठी पहल सामने आई है। यहां कक्षा छह, सात और आठ के विद्यार्थियों ने मिलकर हिंदी का मासिक बाल अखबार ‘दुलरुआ’ शुरू किया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अखबार के लिए सामग्री जुटाने, खबरें लिखने, उनका संपादन करने और उन्हें आकर्षक रूप देने तक की जिम्मेदारी बच्चे स्वयं निभा रहे हैं।

यह पहल बताती है कि सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों और शिक्षकों के मार्गदर्शन का रचनात्मक उपयोग करके बच्चों को कितने उपयोगी अनुभव दिए जा सकते हैं। बाल अखबार ‘दुलरुआ’ केवल कागज पर समाचार प्रस्तुत करने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में भाषा, संवाद, अवलोकन, सहयोग और सामाजिक जागरूकता विकसित करने का एक अभिनव माध्यम भी बन सकता है। इस पहल के पहले अंक का लोकार्पण होने के साथ ही विद्यालय के विद्यार्थियों की मेहनत और उनकी कल्पनाशीलता को सार्वजनिक पहचान मिली है।

झंझरी के सरकारी विद्यालय में शिक्षा का नया प्रयोग

गोंडा जिले के शिक्षाक्षेत्र झंझरी में बहराइच रोड स्थित कंपोजिट विद्यालय इमरती विसेन में यह पहल शुरू की गई है। यहां पढ़ने वाले कक्षा छह, सात और आठ के छात्र-छात्राएं मिलकर बाल अखबार ‘दुलरुआ’ तैयार कर रहे हैं। विद्यालय की इस गतिविधि में बच्चों को अपनी रुचि, कल्पना और अभिव्यक्ति की क्षमता का उपयोग करने का अवसर मिल रहा है। सामान्य रूप से अखबार तैयार करने की प्रक्रिया में संवाददाता, संपादक और प्रस्तुति से जुड़े अलग-अलग लोगों की भूमिका होती है, लेकिन इस बाल अखबार में विद्यार्थियों को इन जिम्मेदारियों का व्यावहारिक अनुभव कराया जा रहा है।

विद्यालय की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ ऐसी गतिविधि से जोड़ना है, जिसमें वे स्वयं भाग लेकर सीख सकें। समाचार लिखने के लिए किसी घटना को ध्यान से देखना, जरूरी तथ्यों को पहचानना, जानकारी को क्रम में रखना और सरल भाषा में प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। इस पूरी प्रक्रिया से बच्चों को भाषा के व्यावहारिक प्रयोग का अवसर मिलता है। साथ ही, वे यह भी समझ सकते हैं कि किसी सूचना को दूसरों तक पहुंचाने से पहले उसकी स्पष्टता और प्रासंगिकता पर ध्यान देना क्यों जरूरी है।

यूनिसेफ की शिक्षा अधिकारी और बीएसए ने किया लोकार्पण

बाल अखबार ‘दुलरुआ’ के प्रथम अंक का लोकार्पण यूनिसेफ की उत्तर प्रदेश की शिक्षा अधिकारी तृप्ति कौर और गोंडा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर बच्चों के प्रयास को सराहा गया। अधिकारियों ने इस प्रकार की गतिविधियों को विद्यार्थियों की रचनात्मकता और व्यक्तित्व विकास के लिए उपयोगी बताया।

विद्यालय में बाल अखबार का शुभारंभ विद्यार्थियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर है। जब बच्चों की तैयार की गई सामग्री को शिक्षक और शिक्षा से जुड़े अधिकारी देखते हैं, तो उन्हें अपने काम के प्रति प्रोत्साहन मिलता है। इससे उनमें आगे और बेहतर करने की प्रेरणा भी पैदा हो सकती है। ऐसी गतिविधियां विद्यालय की शैक्षिक प्रक्रिया को कक्षा की चारदीवारी से आगे ले जाकर वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ने में मदद करती हैं।

पहले अंक में बालिका शिक्षा को बनाया गया प्रमुख विषय

‘दुलरुआ’ के पहले अंक की विषयवस्तु बालिका शिक्षा पर केंद्रित है। इसमें किशोरियों और युवतियों के प्रेरणादायक कार्यों तथा उपलब्धियों से संबंधित समाचारों की कतरनें शामिल की गई हैं। इस चयन के माध्यम से विद्यार्थियों ने बालिका शिक्षा के महत्व को सामने रखने का प्रयास किया है। अखबार के जरिए यह संदेश उभरता है कि लड़कियों की शिक्षा, उनकी उपलब्धियों और आगे बढ़ने के अवसरों पर चर्चा करना समाज के लिए महत्वपूर्ण है।

बालिका शिक्षा को केंद्र में रखने से बच्चों को समाज में शिक्षा की समानता और लड़कियों के अवसरों जैसे विषयों पर सोचने का मौका मिलता है। समाचारों की कतरनों को चुनना और उन्हें अखबार में व्यवस्थित करना भी सीखने की एक प्रक्रिया है। इससे विद्यार्थियों को किसी विषय से जुड़ी जानकारी पहचानने, अलग-अलग समाचारों के बीच संबंध समझने और पाठकों के सामने एक महत्वपूर्ण मुद्दा प्रस्तुत करने का अनुभव मिल सकता है। इस दृष्टि से ‘दुलरुआ’ का पहला अंक केवल विद्यालय की गतिविधि का दस्तावेज नहीं, बल्कि बच्चों की सामाजिक समझ को विकसित करने का माध्यम भी है।

बाल सरकार और मीना मंच की संयुक्त पहल

विद्यालय के प्रधानाध्यापक रघुनाथ पाण्डेय के अनुसार, बाल अखबार ‘दुलरुआ’ की शुरुआत विद्यालय की बाल सरकार और मीना मंच के संयुक्त प्रयास से हुई है। इस पहल को नियमित गतिविधि का रूप देने की योजना है। अखबार का प्रकाशन हर महीने के अंतिम सप्ताह में किया जाएगा। नियमित प्रकाशन की यह व्यवस्था बच्चों को लगातार लिखने, नई जानकारी जुटाने और अपने काम को बेहतर बनाने का अवसर दे सकती है।

बाल सरकार जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को विद्यालय से जुड़ी जिम्मेदारियों और सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया से परिचित कराने में सहायक होती हैं। वहीं मीना मंच बच्चों को विशेष रूप से बालिका शिक्षा, समानता, आत्मविश्वास और सामाजिक मुद्दों पर संवाद करने का अवसर देता है। इन दोनों प्रयासों के साथ बाल अखबार को जोड़ने से विद्यार्थियों को अपनी बात लिखित रूप में रखने और उसे अन्य लोगों तक पहुंचाने का मंच मिला है। इस पहल की निरंतरता बनी रहती है, तो यह बच्चों में जिम्मेदारी की भावना और सहभागिता को मजबूत करने में उपयोगी हो सकती है।

बच्चे निभा रहे संवाददाता और संपादक की भूमिका

‘दुलरुआ’ की तैयारी में विद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं की भागीदारी रखी गई है। बच्चे अपने अनुभवों और आसपास घटने वाली घटनाओं को समाचार के रूप में लिखते हैं। इसके बाद संपादक मंडल की जिम्मेदारी शुरू होती है। संपादन करने वाले विद्यार्थी सामग्री को पढ़ते हैं, उसे व्यवस्थित करते हैं और चार्ट पर आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करते हैं। इस तरह खबर जुटाने से लेकर अखबार का रूप देने तक कई चरणों में बच्चों की सक्रिय भागीदारी रहती है।

अखबार के संपादक मंडल में कक्षा आठ की गोल्डी तथा कक्षा छह की अनम, नगमा, महक और वर्षा सिंह शामिल हैं। ये छात्राएं अखबार की सामग्री को व्यवस्थित करने और उसे पाठकों के सामने प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कम उम्र में संपादन जैसी जिम्मेदारी का अनुभव उन्हें भाषा की शुद्धता, विचारों की स्पष्टता और टीम के साथ काम करने के महत्व से परिचित करा सकता है। साथ ही, इससे छात्राओं को नेतृत्व और निर्णय लेने के अभ्यास का अवसर भी मिलता है।

किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक पत्रकारिता का अनुभव

पत्रकारिता का शुरुआती अभ्यास केवल खबर लिखने तक सीमित नहीं होता। इसमें आसपास की गतिविधियों पर नजर रखना, घटना के बारे में जरूरी जानकारी जुटाना, तथ्य और विचार के अंतर को समझना तथा बात को सरल और स्पष्ट भाषा में लिखना भी शामिल है। ‘दुलरुआ’ के माध्यम से बच्चों को इन बुनियादी प्रक्रियाओं से परिचित होने का अवसर मिल रहा है। वे अपनी बात को क्रमबद्ध ढंग से रखने और पाठकों को ध्यान में रखकर सामग्री तैयार करने का अभ्यास कर सकते हैं।

समूह में अखबार तैयार करने से सहयोग की भावना को भी बढ़ावा मिलता है। किसी विद्यार्थी को समाचार लिखने की जिम्मेदारी मिलती है, तो किसी को सामग्री को व्यवस्थित करने और उसे प्रस्तुत करने का काम। इस प्रक्रिया में बच्चों को दूसरों के विचार सुनने, अपनी गलती सुधारने और सामूहिक प्रयास के महत्व को समझने का मौका मिलता है। लेखन और संपादन के नियमित अभ्यास से उनकी भाषा संबंधी दक्षता, पढ़ने की रुचि और आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायता मिल सकती है।

सरकारी स्कूलों में नवाचार की संभावनाओं का उदाहरण

गोंडा के कंपोजिट विद्यालय इमरती विसेन की यह पहल इस बात की ओर ध्यान खींचती है कि सीखने के अवसर पैदा करने के लिए हर बार बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। बच्चों की भागीदारी, शिक्षकों का मार्गदर्शन और नियमित गतिविधियों की योजना मिलकर विद्यालय में एक नया शैक्षिक वातावरण तैयार कर सकते हैं। बाल अखबार जैसे प्रयोग से भाषा सीखने, रचनात्मक लेखन, सामाजिक जागरूकता और संवाद कौशल को एक साथ जोड़ने की संभावना बनती है।

यदि ‘दुलरुआ’ का प्रकाशन नियमित रूप से जारी रहता है, तो आने वाले अंकों में विद्यार्थियों को विद्यालय की गतिविधियों, पर्यावरण, स्वच्छता, स्थानीय घटनाओं, प्रेरक व्यक्तित्वों और सामाजिक सरोकारों जैसे विषयों पर काम करने का अवसर मिल सकता है। इससे बच्चों को अपने आसपास की दुनिया को समझने और उससे जुड़े सवालों पर विचार करने की आदत विकसित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इसकी मूल विशेषता यही है कि बच्चे केवल अखबार के पाठक नहीं हैं, बल्कि उसके निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार हैं।

कुल मिलाकर, ‘दुलरुआ’ बाल अखबार गोंडा के इस सरकारी विद्यालय में पढ़ाई को रचनात्मक गतिविधि से जोड़ने का प्रेरक प्रयास है। कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों द्वारा समाचार लेखन और संपादन की जिम्मेदारी संभालना उन्हें सीखने का व्यावहारिक अनुभव देता है। बालिका शिक्षा पर केंद्रित पहले अंक ने इस पहल को एक सामाजिक उद्देश्य से भी जोड़ा है। अब हर महीने के अंतिम सप्ताह में प्रकाशित होने वाला यह बाल अखबार बच्चों की प्रतिभा को सामने लाने, उनकी अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने और विद्यालय में नवाचार की संस्कृति को आगे बढ़ाने का मंच बन सकता है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें