22 अक्टूबर 2026 6:36 अपराह्न

‘मैं तो बकरी चोर…’, ओवैसी पर आजम खान के तंज वाला VIDEO👇 क्यों हो रहा वायरल? सियासत गरम

आजम खान, अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी की तस्वीरों के साथ रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह, आजम खान के वायरल वीडियो और उत्तर प्रदेश की सियासत पर विशेष समाचार।

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रिपोर्ट: ठाकुर बख्श सिंह

रामपुर/लखनऊ: ‘मैं तो बकरी चोर…’, । उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और सियासी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज होने लगी हैं। इसी माहौल में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान का एक पुराना वीडियो इंटरव्यू फिर सुर्खियों में है। इस बातचीत में आजम खान ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के व्यक्तित्व, राजनीतिक हैसियत और सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर ऐसे व्यंग्यात्मक जवाब दिए, जिनकी चर्चा अब दोबारा हो रही है। ‘ओवैसी साहब गली में रहते हैं, देखा है आपने?’ और ‘मैं तो बकरी चोर’ जैसे उनके तंज सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस का विषय बने हुए हैं।

इस घटनाक्रम को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की रामपुर यात्रा के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव आजम खान से मुलाकात करने रामपुर पहुंचने वाले हैं। इस दौरान आजम खान के परिवार से भी उनकी मुलाकात प्रस्तावित बताई गई है। ऐसे में इस यात्रा के राजनीतिक संदेश, मुस्लिम मतदाताओं के बीच विपक्षी दलों की रणनीति और उत्तर प्रदेश में विपक्षी राजनीति की दिशा को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, किसी मुलाकात का वास्तविक राजनीतिक उद्देश्य केवल अटकलों के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।

अखिलेश यादव की रामपुर यात्रा के बीच पुराने वीडियो की चर्चा

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और एआईएमआईएम के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। दोनों दलों की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, हालांकि उनके राजनीतिक दृष्टिकोण, संगठनात्मक आधार और चुनावी रणनीतियों में अंतर है। ऐसे में आजम खान के पुराने इंटरव्यू का दोबारा चर्चा में आना केवल एक वायरल वीडियो की घटना नहीं, बल्कि प्रदेश की विपक्षी राजनीति से जुड़ी बहस के रूप में भी देखा जा रहा है।

अखिलेश यादव की रामपुर यात्रा से पहले असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने अखिलेश यादव के चुनावी प्रदर्शन और उनकी राजनीतिक रणनीति पर टिप्पणी करते हुए आत्ममंथन की जरूरत बताई। ओवैसी का आरोप रहा कि समाजवादी पार्टी मुस्लिम समाज को नेतृत्व की भूमिका में देखने के बजाय मुख्य रूप से मतदाता के रूप में बनाए रखना चाहती है। यह ओवैसी का राजनीतिक आरोप है, जिस पर सपा का पक्ष अलग हो सकता है।

ओवैसी ने आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात के समय को लेकर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि अखिलेश यादव आजम खान से मिलने तब पहुंचे, जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस विषय को उठाया। इस बयान ने दोनों नेताओं के संबंधों को लेकर चल रही चर्चाओं को और हवा दी। हालांकि, मुलाकात के समय और उसके पीछे के उद्देश्य को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों के आधिकारिक वक्तव्यों को देखना जरूरी है।

आजम खान ने ओवैसी के पिता के साथ पुराने सफर को किया याद

लल्लनटॉप के एक वीडियो इंटरव्यू में पत्रकार ने जब आजम खान से असदुद्दीन ओवैसी के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बातचीत की शुरुआत ओवैसी के पिता के साथ अपने पुराने परिचय से की। आजम खान के मुताबिक, छात्र जीवन के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक चरित्र को बहाल रखने की मांग से जुड़ा एक बड़ा आंदोलन चल रहा था। उन्होंने उस दौर को याद करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से वह ऑल इंडिया एक्शन कमेटी में प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुए थे।

आजम खान ने बताया कि उस आंदोलन के सिलसिले में देश के विभिन्न हिस्सों में यात्राएं होती थीं। इन यात्राओं में उनके साथ कई सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग शामिल रहते थे। उन्होंने मरहूम मुशफ्फुर रहमान, अधिवक्ता जफर अहमद सिद्दीकी, रेडियंस अखबार से जुड़े यूसुफ साहब तथा असदुद्दीन ओवैसी और उनके पिता के साथ सफर करने का जिक्र किया। उनके अनुसार, उस समय रेल यात्रा का साधन भी आज की तरह सुविधाजनक नहीं था और वे लोग थ्री-टियर श्रेणी में साथ यात्रा किया करते थे।

इस प्रसंग के जरिए आजम खान ने यह स्पष्ट किया कि ओवैसी परिवार से उनका परिचय नया नहीं है। उन्होंने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए उस दौर की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का उल्लेख किया। उनके बयान में व्यक्तिगत परिचय के साथ-साथ अल्पसंख्यक शिक्षा और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी सामने आई।

‘जेल में अखबार नहीं मिलता’, ओवैसी की चिंता पर आजम का जवाब

इंटरव्यू के दौरान पत्रकार ने आजम खान से पूछा कि जब वह जेल में थे, तब ओवैसी ने उनकी चिंता को लेकर कई बयान दिए थे। पत्रकार ने यह भी जानना चाहा कि क्या आजम खान ने उन बयानों को सुना या उनके बारे में कोई जानकारी मिली। इस सवाल के जवाब में आजम खान ने कहा कि जेल में उन्हें अखबार नहीं मिलता था और किसी ने उन्हें इन बयानों के बारे में कुछ बताया भी नहीं।

आजम खान के इस जवाब में जेल के दौरान सूचनाओं तक उनकी सीमित पहुंच का उल्लेख था। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि वह ओवैसी के कथित समर्थन या चिंता से जुड़े बयानों के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी होने का दावा नहीं कर रहे थे। राजनीतिक बयानों की व्याख्या करते समय इस अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि किसी नेता के समर्थन में दिया गया बयान और संबंधित व्यक्ति तक उस बयान की जानकारी पहुंचना दो अलग बातें हैं।

‘मैं कम सलाहियत आदमी, चोर-उचक्का’, आजम खान ने अपने अंदाज में कसा तंज

इंटरव्यू का सबसे चर्चित हिस्सा उस समय सामने आया, जब पत्रकार ने आजम खान से पूछा कि वह और असदुद्दीन ओवैसी दोनों मुस्लिम समाज के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं, लेकिन आजम खान के खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमों का जिक्र होता रहा है, जबकि ओवैसी को लेकर ऐसी स्थिति क्यों नहीं दिखाई देती। सवाल के जवाब में आजम खान ने आत्मव्यंग्य का सहारा लेते हुए कहा कि वह कम सलाहियत वाले व्यक्ति हैं और खुद को चोर-उचक्का कहकर संबोधित किया, जबकि ओवैसी को उन्होंने खानदानी और बड़े कद का व्यक्ति बताया।

आजम खान के इस बयान को उनके विशिष्ट व्यंग्यात्मक अंदाज के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों और मुकदमों का जिक्र करते हुए ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसने इंटरव्यू को सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना दिया। हालांकि, किसी व्यक्ति पर दर्ज मुकदमों की संख्या अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होती। कानूनी मामलों की स्थिति को समझने के लिए प्रत्येक मामले के तथ्य और न्यायिक प्रक्रिया को अलग-अलग देखना आवश्यक है।

‘ओवैसी साहब गली में रहते हैं?’ घर और हैसियत पर भी टिप्पणी

बातचीत आगे बढ़ने पर आजम खान ने ओवैसी के घर और रहन-सहन का उल्लेख करते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या पत्रकार ने ओवैसी को गली में रहते देखा है। इसके बाद उन्होंने ओवैसी के घर में बारिश के दौरान पानी भरने का जिक्र किया और अपने घर की परिस्थितियों से तुलना की। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि उनके घर में किसी ने जनरेटर तक नहीं देखा।

आजम खान ने अपने लिए ‘मुर्गी चोर’ और ‘बकरी चोर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि वह खुद को जिस तरह का व्यक्ति बताते हैं, उसी के अनुरूप उनके साथ व्यवहार हो रहा है। उन्होंने अपने परिवार पर बड़ी संख्या में मुकदमे होने की बात भी कही। इन टिप्पणियों में कटाक्ष, आत्मव्यंग्य और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति उनकी शिकायत का मिश्रण दिखाई देता है। हालांकि, घरों की स्थिति और मुकदमों को लेकर कही गई बातें इंटरव्यू में आजम खान के अपने बयान हैं; उनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक होगी।

वीडियो का यह अंश इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि आजम खान ने व्यक्तिगत परिस्थितियों और राजनीतिक हैसियत के अंतर को व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनके समर्थक इसे उनके बेबाक अंदाज से जोड़ सकते हैं, जबकि आलोचक उनके शब्दों और राजनीतिक संदर्भ की अलग व्याख्या कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर किसी बयान की लोकप्रियता उसके सभी दावों की पुष्टि नहीं मानी जा सकती।

क्या ओवैसी बीजेपी की बी-टीम हैं? आजम खान ने आरोप को बताया गलत

आजम खान से जब पूछा गया कि क्या असदुद्दीन ओवैसी भारतीय जनता पार्टी की बी-टीम के रूप में काम करते हैं, तो उन्होंने इस आरोप को खारिज कर दिया। आजम खान ने कहा कि यह आरोप गलत है और ओवैसी के बारे में लगाए जाने वाले ऐसे आरोपों को भी उन्होंने उचित नहीं माना। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि ओवैसी की कोई गुप्त बैठक नहीं होती।

आजम खान ने ओवैसी की राजनीतिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए उन्हें वरिष्ठ नेता बताया। उन्होंने कहा कि ओवैसी उनसे कहीं अधिक पढ़े-लिखे हैं, पांच बार सांसद रह चुके हैं और उनकी अपनी बड़ी पार्टी है, जिसके विधायक और सांसद भी हैं। इसके विपरीत, आजम खान ने अपनी राजनीतिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वह ओवैसी को जवाब देने की हैसियत में खुद को नहीं मानते।

यह बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि ओवैसी पर बीजेपी की बी-टीम होने का आरोप भारतीय राजनीति में अक्सर चुनावी चर्चा का हिस्सा बनता रहा है। आजम खान ने इस सवाल पर ओवैसी का बचाव करते हुए स्पष्ट रूप से आरोप को गलत बताया। इससे यह भी जाहिर होता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आजम खान ने इस विशेष आरोप को स्वीकार नहीं किया। फिर भी, इस बयान को दोनों दलों के बीच व्यापक राजनीतिक सहमति का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

2027 के चुनाव से पहले मुस्लिम राजनीति और विपक्षी एकजुटता पर नजर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और एआईएमआईएम की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। मुस्लिम मतदाताओं के बीच प्रभाव, विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और नेतृत्व के सवाल आगामी राजनीतिक बहस में अहम हो सकते हैं। अखिलेश यादव की आजम खान से मुलाकात को भी इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात से चुनावी रणनीति में क्या बदलाव होगा या दोनों नेताओं के बीच किन विषयों पर चर्चा होगी, यह संबंधित पक्षों के बयानों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

आजम खान का पुराना इंटरव्यू इस समय इसलिए प्रासंगिक हो उठा है, क्योंकि इसमें ओवैसी के प्रति उनके विचार एक ही बातचीत में कई रूपों में सामने आते हैं। एक ओर उन्होंने पुराने पारिवारिक और राजनीतिक परिचय का जिक्र किया, वहीं दूसरी ओर अपने ऊपर लगे आरोपों और सामाजिक परिस्थितियों को लेकर तीखे व्यंग्य किए। इसके साथ ही उन्होंने ओवैसी को बीजेपी की बी-टीम बताने वाले आरोप को भी खारिज कर दिया।

फिलहाल, वायरल वीडियो और अखिलेश यादव की रामपुर यात्रा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में आजम खान, असदुद्दीन ओवैसी और समाजवादी पार्टी के संबंधों को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में नेताओं के बयान, राजनीतिक मुलाकातें और दलों की गतिविधियां यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगी कि यह बहस केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहती है या 2027 के चुनाव से पहले किसी बड़े राजनीतिक विमर्श का रूप लेती है।

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