22 अक्टूबर 2026 10:54 पूर्वाह्न

पहले गला घोंटा, फिर सिर पर रख दिया पैर! बेटी की सांसें थमने तक नहीं पसीजा पिता का दिल

नाबालिग बेटी की हत्या के मामले में गिरफ्तार पिता और रिश्तेदार, पुलिस टीम और जनगणदूत के रिपोर्टर दुर्गा प्रसाद शुक्ला की तस्वीर

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रिपोर्ट : दुर्गा प्रसाद शुक्ला | जनगणदूत

औरैया, उत्तर प्रदेश।बेटी की हत्या का मामला.जिस पिता से बेटी को सुरक्षा और स्नेह की उम्मीद होती है, उसी पर अपनी नाबालिग बेटी की बेरहमी से हत्या करने का आरोप लगे तो रिश्तों पर भरोसा डगमगा जाता है। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में सामने आया 16 वर्षीय किशोरी की हत्या का मामला कुछ ऐसी ही भयावह तस्वीर पेश करता है। पुलिस के अनुसार, बेटी की गतिविधियों से नाराज पिता ने अपने रिश्तेदार के साथ मिलकर कथित तौर पर उसकी हत्या की साजिश रची। आरोप है कि पहले किशोरी का गला दबाया गया, फिर पानी से भरे गड्ढे में डुबोकर उसके सिर पर पैर रख दिया गया। इसके बाद शव को गड्ढे में दफना दिया गया। मामले में पुलिस ने पिता चन्द्रप्रकाश उर्फ भगवान दीन और दीपक उर्फ दीपांशु को गिरफ्तार किया है। इस सनसनीखेज हत्याकांड ने पारिवारिक रिश्तों, नाबालिगों की सुरक्षा और हिंसक मानसिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिसे देना था सुरक्षा का सहारा, उसी पर बेटी की हत्या का आरोप

यह पूरा मामला औरैया जिले के बेला थाना क्षेत्र के दलपपुर गांव का है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 20 सितंबर को दलपपुर मोड़ के पास वन विभाग की जमीन पर बबूल के पेड़ों के बीच एक गड्ढे में नाबालिग लड़की का शव दबा हुआ मिला था। सुनसान स्थान पर शव मिलने की खबर से इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और मृतका की पहचान कराने के साथ उसकी मौत के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाने का प्रयास किया। बाद में शव की पहचान 16 वर्षीय किशोरी के रूप में हुई।

शव को मिट्टी में छिपाकर दफनाने की घटना ने पुलिस के सामने कई सवाल खड़े किए। आखिर किशोरी की हत्या किसने की? उसे सुनसान जगह पर क्यों ले जाया गया? और हत्या के बाद शव को छिपाने की कोशिश किसने की? जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को मृतका के परिवार से जुड़े लोगों की कथित भूमिका के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद मामले में पिता और उसके रिश्तेदार की गिरफ्तारी हुई।

बेटी के घर छोड़ने से नाराजगी, हत्या की साजिश रचने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, आरोपी चन्द्रप्रकाश उर्फ भगवान दीन ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी से उसका एक बेटा और दूसरी शादी से तीन बेटियां थीं। जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, मृतका सितंबर के पहले सप्ताह में किसी के साथ घर से चली गई थी। बताया गया है कि आठ सितंबर को वह वापस आई, लेकिन घर के अंदर नहीं गई। आरोप है कि बेटी के इस व्यवहार से पिता नाराज था और इसी नाराजगी ने कथित तौर पर उसे गंभीर अपराध की ओर धकेल दिया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी पिता ने अपनी योजना को अंजाम देने के लिए दीपक उर्फ दीपांशु की मदद ली। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में दोनों की अलग-अलग भूमिका और अपराध से जुड़े सभी तथ्यों का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होना है। किसी भी पारिवारिक विवाद या नाराजगी को हत्या का औचित्य नहीं बनाया जा सकता। बेटी के फैसलों से असहमति होने पर बातचीत और कानूनी रास्ते मौजूद हैं, लेकिन किसी की जान लेने का अधिकार किसी को नहीं है।

दिल्ली ले जाने की बात कही, रास्ते में सुनसान जगह पर ले जाने का आरोप

पुलिस के अनुसार, नौ अक्तूबर को आरोपी पिता ने किशोरी को दिल्ली ले जाने की बात कही और उसे अपने साथ लेकर निकला। रास्ते में उसने अपनी बहन के घर जाने की बात भी कही। आरोप है कि यात्रा के दौरान किशोरी को सुनसान जंगल की ओर ले जाया गया। पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इसी जगह पर वारदात को अंजाम दिया गया और बाद में शव को छिपाने के लिए गड्ढे में दफना दिया गया।

जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, किशोरी का पहले गला दबाया गया और फिर उसे पानी से भरे गड्ढे में डुबोया गया। आरोप है कि उसकी सांसें थमने तक उसके सिर पर पैर रखकर दबाव बनाया गया। इसके बाद फावड़े की मदद से गड्ढा खोदकर शव को मिट्टी में दबा दिया गया। घटना से जुड़े ये आरोप बेहद गंभीर हैं। इनके संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों की जांच और अदालत में कानूनी परीक्षण के बाद ही प्रत्येक तथ्य पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

हत्या के बाद दिल्ली भागने का आरोप, रिश्तेदार की बात से खुला राज

पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपी पिता 11 अक्तूबर को दिल्ली चला गया था। दूसरी ओर, मामले में शामिल बताए जा रहे रिश्तेदार ने कथित रूप से शराब के नशे में अपनी मां और पत्नी को हत्या की घटना के बारे में बता दिया। इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस को जांच में अहम सुराग मिला। घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने की कार्रवाई की।

शव मिलने के बाद मृतका के भाई ने भी उसकी पहचान की थी। इसके बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई और आरोपियों की तलाश की। पुलिस ने चन्द्रप्रकाश उर्फ भगवान दीन तथा दीपक उर्फ दीपांशु को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार, वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल और फावड़ा भी बरामद किया गया है। बरामद वस्तुओं और अन्य साक्ष्यों की जांच मामले की विवेचना का हिस्सा है।

क्या नाराजगी किसी की जिंदगी छीनने का अधिकार दे सकती है?

इस हत्याकांड का सबसे चिंताजनक पहलू पिता पर लगा वह आरोप है, जिसके अनुसार उसने अपनी ही नाबालिग बेटी की जान लेने की योजना बनाई। परिवार बच्चों के लिए सुरक्षा, विश्वास और भावनात्मक सहारे का पहला स्थान माना जाता है। लेकिन जब घर के भीतर ही हिंसा का खतरा पैदा हो जाए, तो बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज और व्यवस्था दोनों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी होती है।

किशोरावस्था में बच्चों के व्यवहार, दोस्ती और फैसलों को लेकर परिवारों में मतभेद पैदा हो सकते हैं। ऐसे समय में संवाद, समझ और उचित परामर्श की आवश्यकता होती है। गुस्से, धमकी या हिंसा से समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि इसके परिणाम बेहद विनाशकारी हो सकते हैं। किसी नाबालिग के घर से चले जाने या उसके फैसलों से नाराज होने का अर्थ यह नहीं है कि उसके जीवन और स्वतंत्रता पर किसी दूसरे का मनमाना अधिकार हो जाता है।

यह मामला इस बात पर भी ध्यान देने की जरूरत बताता है कि परिवार के भीतर बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार, धमकी या हिंसा के संकेतों को गंभीरता से लिया जाए। बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे बिना भय अपनी बात रख सकें और जरूरत पड़ने पर किसी विश्वसनीय व्यक्ति या संबंधित प्राधिकरण से सहायता मांग सकें।

गिरफ्तारी के बाद अब साक्ष्यों और न्यायिक कार्रवाई पर नजर

फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने और वारदात में इस्तेमाल बताई गई मोटरसाइकिल तथा फावड़ा बरामद करने की जानकारी दी है। अब मामले की विवेचना में घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों, आरोपियों के बयानों, परिस्थितिजन्य तथ्यों और अन्य उपलब्ध प्रमाणों का महत्व होगा। जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि हत्या की योजना कैसे बनाई गई, घटना में किसकी क्या भूमिका थी और वारदात से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पुलिस के सामने कथित स्वीकारोक्ति या किसी आरोपी के बयान को अपने आप में अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता। अपराध के आरोपों का निर्धारण कानून और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय करता है। इसलिए इस मामले में निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों का विधिसम्मत संकलन और न्यायिक प्रक्रिया का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।

रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटना ने खड़े किए कई सवाल

एक 16 वर्षीय किशोरी की मौत और उसके शव को कथित रूप से छिपाकर दफनाने का मामला केवल अपराध की भयावहता तक सीमित नहीं है। यह परिवार में बच्चों की सुरक्षा, गुस्से पर नियंत्रण, सामाजिक सोच और कानून के प्रति जवाबदेही जैसे मुद्दों पर भी विचार करने के लिए मजबूर करता है। रिश्तों की मर्यादा तभी कायम रह सकती है, जब उनमें सम्मान, संवेदनशीलता और जीवन के अधिकार को सर्वोपरि रखा जाए।

औरैया के इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस जांच और अदालत की कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम महत्वपूर्ण होंगे। मृतका को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक है कि जांच निष्पक्ष हो, सभी साक्ष्यों की विधिवत पड़ताल की जाए और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। किसी भी परिवार में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हिंसा का रास्ता किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

जनगणदूत की नजर: बेटी की सुरक्षा और सम्मान परिवार की जिम्मेदारी है, न कि उसकी जिंदगी पर मनमाना नियंत्रण करने का अधिकार। इस मामले में सामने आए आरोप यदि अदालत में प्रमाणित होते हैं, तो यह एक बेहद गंभीर अपराध होगा। जरूरी है कि सच्चाई सामने आए, न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो और बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज में संवेदनशीलता तथा जवाबदेही मजबूत हो।

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