शुद्ध पेयजल की हकीकत पर खुद उतरीं मंत्री, टीडीएस मशीन लेकर सड़कों पर पहुंचीं विजयलक्ष्मी गौतम
भीषण गर्मी में वाटर कूलरों की गुणवत्ता और सफाई व्यवस्था की अचानक जांच, अधिकारियों को लगाई फटकार
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
Deoria भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच आम लोगों के लिए सबसे बड़ी जरूरत शुद्ध पेयजल बन गई है। ऐसे समय में सरकार की योजनाएं धरातल पर कितनी प्रभावी हैं, इसे परखने के लिए राज्यमंत्री विजयलक्ष्मी गौतम खुद मैदान में उतर गईं। बिना किसी प्रोटोकॉल, बिना किसी पूर्व सूचना और बिना प्रशासनिक तामझाम के उन्होंने शहर में लगाए गए वाटर कूलरों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा ही नहीं लिया, बल्कि स्वयं टीडीएस मशीन से पानी की गुणवत्ता की जांच कर पानी पीकर उसकी शुद्धता भी परखी।
राज्यमंत्री का यह अलग अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। तेज धूप और उमस भरी गर्मी के बीच जब अधिकांश लोग घरों में रहने को मजबूर हैं, तब मंत्री का सड़क पर उतरकर शुद्ध पेयजल की स्थिति का निरीक्षण करना स्थानीय लोगों को राहत देने वाला संदेश माना जा रहा है।
वाटर कूलर पर पहुंचते ही शुरू की जांच
राज्यमंत्री विजयलक्ष्मी गौतम सबसे पहले उपनगर स्थित हनुमान मंदिर के सामने लगाए गए वाटर कूलर पर पहुंचीं। यहां उन्होंने सबसे पहले टीडीएस मशीन निकाली और पानी की गुणवत्ता की जांच की। जांच के बाद उन्होंने स्वयं पानी पिया और आसपास मौजूद लोगों से भी पेयजल की स्थिति के बारे में जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान उनकी नजर वाटर कूलर से व्यर्थ बह रहे पानी पर पड़ी। पानी की बर्बादी देखकर उन्होंने तुरंत नाराजगी जाहिर की। मौके पर ही अधिशासी अधिकारी को फोन लगाकर उन्होंने कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट निर्देश दिया कि आगे से ऐसी लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि एक तरफ लोग भीषण गर्मी में पानी की समस्या से जूझ रहे हैं और दूसरी तरफ यदि सरकारी व्यवस्थाओं में पानी की बर्बादी होगी तो यह बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि पेयजल व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आई तो कार्रवाई तय मानी जाएगी।
दूसरे स्थल पर मिली गंदगी, अधिकारियों की बढ़ी मुश्किलें
पहले वाटर कूलर की जांच के बाद राज्यमंत्री का काफिला राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में लगे वाटर कूलर तक पहुंचा। यहां पानी की गुणवत्ता तो मानकों के अनुरूप मिली, लेकिन आसपास फैली गंदगी ने मंत्री को नाराज कर दिया।
उन्होंने मौके पर मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों को साफ-सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। अधिशासी अधिकारी को दो टूक शब्दों में कहा गया कि सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए वाटर कूलरों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए ताकि लोगों को स्वच्छ वातावरण में शुद्ध पानी मिल सके।
राज्यमंत्री ने कहा कि केवल पानी उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके आसपास की स्वच्छता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। यदि वाटर कूलर के आसपास गंदगी होगी तो बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
“हर व्यक्ति तक शुद्ध पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता”
निरीक्षण के दौरान राज्यमंत्री विजयलक्ष्मी गौतम ने कहा कि प्रदेश सरकार भीषण गर्मी के दौरान प्रत्येक व्यक्ति तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर वाटर कूलर लगाए गए हैं ताकि राहगीरों, मजदूरों, बुजुर्गों और आम नागरिकों को राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि केवल योजनाओं का उद्घाटन कर देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि समय-समय पर उनकी गुणवत्ता और रखरखाव की निगरानी भी जरूरी है। इसी कारण वह स्वयं मौके पर पहुंचकर पानी की गुणवत्ता और साफ-सफाई की स्थिति की जांच कर रही हैं।
राज्यमंत्री ने यह भी कहा कि गर्मी के इस मौसम में दूषित पानी लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इसलिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और साफ-सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।
आम लोगों ने सराहा मंत्री का तरीका
राज्यमंत्री के इस औचक निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। लोगों ने मंत्री के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि अक्सर अधिकारी केवल कागजों में व्यवस्थाएं ठीक बताते हैं, लेकिन जब जनप्रतिनिधि स्वयं मौके पर पहुंचते हैं तो वास्तविक स्थिति सामने आती है।
कई लोगों ने बताया कि गर्मी के दिनों में सार्वजनिक वाटर कूलर आम जनता के लिए बड़ी राहत साबित हो रहे हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर रखरखाव की कमी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में मंत्री द्वारा अचानक निरीक्षण किए जाने से संबंधित विभागों में सक्रियता बढ़ना तय माना जा रहा है।
भीषण गर्मी में बढ़ी पेयजल की चुनौती
प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी का दौर जारी है। तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। दोपहर के समय सड़कों पर निकलना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। ऐसे हालात में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में दूषित पानी से डायरिया, उल्टी, दस्त और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए वाटर कूलरों की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।
राज्यमंत्री का यह निरीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश के कई हिस्सों में पेयजल संकट और पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में उनका सीधे मैदान में उतरना प्रशासन के लिए भी स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि लापरवाही अब छिप नहीं सकेगी।
निरीक्षण के दौरान ये लोग रहे मौजूद
इस दौरान जिला मंत्री अभिषेक जायसवाल, मंडल अध्यक्ष पुनीत यादव, अभय सिंह, अशोक तिवारी, त्रिपुनायक विश्वकर्मा, अनूप उपाध्याय, राजीव मिश्रा, अनूप मिश्रा, शिवाकांत तिवारी, अभय तिवारी सहित कई स्थानीय कार्यकर्ता और नागरिक मौजूद रहे।








