जिंदगी की सौदेबाजी में फंसे लोग, ‘लुटेरी दुल्हन गैंग’ के हैरान करने वाले कारनामे

संभल में लुटेरी दुल्हन गैंग के खुलासे की खबर में पुलिस अधिकारियों, गिरफ्तार आरोपियों, हिडन कैमरे, दुल्हन के सामान और रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान की तस्वीर

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चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

संभल। पहली बातचीत में अपनापन, फिर भरोसा, उसके बाद शादी का सपना और अंत में ऐसा जाल, जिसमें फंसने वाला व्यक्ति बदनामी और ब्लैकमेलिंग के डर से चुप रहने को मजबूर हो जाए। संभल में पुलिस ने एक कथित ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो अविवाहित और पत्नी खो चुके पुरुषों को निशाना बनाकर कथित तौर पर कभी प्रेमजाल तो कभी शादी का झांसा देता था। पुलिस के अनुसार, गिरोह का मकसद केवल ठगी तक सीमित नहीं था, बल्कि आपत्तिजनक वीडियो बनाकर पीड़ितों से मोटी रकम वसूलने की कोशिश भी की जाती थी।

रजपुरा थाना क्षेत्र में सामने आए इस मामले ने पुलिस के सामने साइबर ब्लैकमेलिंग, फर्जी शादी और कथित लुटेरी दुल्हन के नेटवर्क की कई परतें खोल दी हैं। पुलिस ने इस मामले में महिला सदस्य लक्ष्मी, उसके पति प्रमोद उर्फ पालू और वीरेंद्र उर्फ छोटे को गिरफ्तार किया है। वहीं वेदप्रकाश और राजकुमार की तलाश जारी है।

पहली कॉल से शुरू होता था भरोसा जीतने का खेल

पुलिस के मुताबिक, गिरोह की महिला सदस्य लक्ष्मी ऐसे पुरुषों की तलाश करती थी, जो अविवाहित हों या जिनकी पत्नी का निधन हो चुका हो। ऐसे लोगों को कथित तौर पर उनकी परिस्थितियों के आधार पर निशाना बनाया जाता था। शुरुआत मोबाइल फोन पर बातचीत से होती थी।

कई दिनों तक बातचीत के जरिए सामने वाले व्यक्ति का विश्वास हासिल किया जाता था। बातचीत में अपनापन और सहानुभूति का माहौल बनाया जाता, जिससे पीड़ित को यह महसूस हो कि दूसरी तरफ मौजूद महिला वास्तव में रिश्ते को लेकर गंभीर है।

पुलिस का कहना है कि भरोसा कायम होने के बाद मुलाकात का सिलसिला शुरू होता था। इसके लिए किराये के कमरे का इस्तेमाल किया जाता था। कथित तौर पर कमरे में पहले से हिडन कैमरा लगाया रहता था। इसी दौरान पीड़ितों के निजी पलों को कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया जाता था।

यहीं से कथित गिरोह की असली सौदेबाजी शुरू होती थी।

वीडियो के नाम पर पांच लाख रुपये तक की मांग

पुलिस जांच के अनुसार, वीडियो तैयार होने के बाद संबंधित व्यक्ति को उसे इंटरनेट मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी जाती थी। इसके साथ ही झूठे दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने का डर भी दिखाया जाता था।

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आरोप है कि बदनामी और कानूनी कार्रवाई के डर से पीड़ितों से लाखों रुपये की मांग की जाती थी। कुछ मामलों में यह रकम पांच लाख रुपये तक बताई गई है।

ऐसे मामलों में पीड़ित अक्सर सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवार की चिंता के कारण पुलिस तक पहुंचने से बचते हैं। इसी वजह से इस तरह के अपराधों की वास्तविक संख्या सामने आने में भी मुश्किल होती है। पुलिस के अनुसार, अब तक पांच ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें इसी तरह के आरोपों की जांच की जा रही है।

प्रेमजाल में बात न बने तो शादी का दूसरा रास्ता

पुलिस के अनुसार, गिरोह की कथित कार्यप्रणाली का दूसरा हिस्सा शादी के इच्छुक लोगों को निशाना बनाना था। जो व्यक्ति प्रेमजाल में नहीं फंसते थे, उनके लिए शादी कराने का प्रस्ताव रखा जाता था।

पुलिस जांच में सामने आया कि शादी कराने के नाम पर 40 से 50 हजार रुपये तक लिए जाते थे। इसके बाद लक्ष्मी कथित तौर पर दुल्हन बनकर संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचती थी।

शादी की रस्मों और रिश्ते के भरोसे के बीच उसे घर के माहौल और सामान की जानकारी मिल जाती थी। आरोप है कि उचित मौका मिलते ही वह जेवर, नकदी और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो जाती थी।

इस तरह कथित गिरोह के पास ठगी के दो अलग-अलग तरीके थे—एक तरफ निजी वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग और दूसरी तरफ दुल्हन बनकर कथित रूप से सामान लेकर फरार होना।

गिरोह में हर सदस्य की अलग भूमिका

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में गिरोह की कथित कार्यप्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। बताया गया कि राजकुमार और वेदप्रकाश शादी के इच्छुक लोगों की तलाश करते थे। इसके बाद महिला सदस्य लक्ष्मी की भूमिका शुरू होती थी।

वहीं वीरेंद्र उर्फ छोटे पर महिला को सुरक्षित तरीके से वहां से निकालने में मदद करने का आरोप है। प्रमोद उर्फ पालू की भूमिका को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है।

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पुलिस का मानना है कि अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारी देकर इस नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था, ताकि पूरी योजना किसी एक व्यक्ति तक सीमित न रहे।

एक शिकायत ने खोल दी नेटवर्क की परतें

इस कथित गिरोह की गतिविधियों का मामला तब पुलिस तक पहुंचा, जब देवपुरा निवासी होराम सिंह ने 20 अगस्त को रजपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के अनुसार, उनसे पांच लाख रुपये की मांग की जा रही थी। आरोप था कि रुपये नहीं देने पर आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल करने और उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही थी।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए 21 अगस्त को सिंघौली कल्लू मंदिर के पास से लक्ष्मी, प्रमोद उर्फ पालू और वीरेंद्र उर्फ छोटे को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ के बाद पुलिस ने कथित गिरोह के काम करने के तरीके से जुड़ी कई जानकारियां जुटाईं।

हिडन कैमरे से लेकर दुल्हन के सामान तक बरामद

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने कई सामान बरामद किए हैं। इनमें हिडन कैमरा, लाल लहंगा-चुन्नी, दो जोड़ी पाजेब, मंगलसूत्र, अंगूठी, घड़ी, सिंदूर, बिंदी, नेल पॉलिश और नारंगी रंग का लेडीज पर्स शामिल हैं।

इसके अलावा पुलिस ने 40 हजार रुपये नकद भी बरामद किए हैं।

बरामद सामान ने पुलिस की उस जांच को महत्वपूर्ण आधार दिया है, जिसमें गिरोह द्वारा कथित तौर पर शादी के नाम पर ठगी किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब बरामद वस्तुओं और सामने आए मामलों के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है।

प्रमोद उर्फ पालू का पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी प्रमोद उर्फ पालू का करीब 16 वर्ष पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। पुलिस उसके पुराने मामलों और वर्तमान प्रकरण के बीच किसी संभावित संबंध की भी जांच कर रही है।

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वहीं फरार चल रहे वेदप्रकाश और राजकुमार की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और घटनाओं के बारे में और जानकारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

बदनामी के डर से चुप न रहें पीड़ित

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कथित ब्लैकमेलिंग का शिकार होने वाले लोग अक्सर सामाजिक प्रतिष्ठा के डर से पुलिस के पास नहीं पहुंचते। निजी वीडियो वायरल होने का भय और झूठे मुकदमे में फंसाए जाने की धमकी पीड़ितों को मानसिक दबाव में डाल सकती है।

पुलिस ने ऐसे लोगों से सामने आने की अपील की है, जो इस तरह की कथित ठगी या ब्लैकमेलिंग का शिकार हुए हों। पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को बदनामी के डर से चुप रहने की जरूरत नहीं है और शिकायत मिलने पर मामले की जांच की जाएगी।

जांच से सामने आएगा गिरोह का पूरा नेटवर्क

संभल में सामने आया यह मामला केवल कथित लुटेरी दुल्हन की कहानी तक सीमित नहीं दिखाई देता। पुलिस जांच में प्रेमजाल, फर्जी शादी, कथित चोरी, हिडन कैमरे से वीडियो रिकॉर्डिंग और ब्लैकमेलिंग जैसे कई पहलू सामने आए हैं।

फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि दो आरोपी फरार हैं। पुलिस की आगे की जांच यह स्पष्ट करेगी कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों को अपना निशाना बनाया, कितने मामलों में रकम की मांग की गई और कथित तौर पर कितने लोगों को शादी के नाम पर ठगा गया।

एक शिकायत के बाद सामने आई यह कहानी उन लोगों के लिए भी चेतावनी है, जो इंटरनेट या मोबाइल के जरिए बने नए रिश्तों में बिना पर्याप्त सत्यापन के भरोसा कर लेते हैं। किसी भी रिश्ते, शादी या आर्थिक लेन-देन से पहले व्यक्ति और उसके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

पुलिस की कार्रवाई जारी है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस कथित नेटवर्क से जुड़े और भी खुलासे होने की उम्मीद है।

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Author: यायावर

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