दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के गोंडा में पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने तीखे और विवादित बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने योग गुरु बाबा रामदेव और उनके स्वदेशी अभियान को निशाने पर लिया है। एक छात्र सम्मान समारोह के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव के आंदोलन, स्वदेशी अभियान और पतंजलि से जुड़े उत्पादों को लेकर कई सवाल उठाए। उनके बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
गोंडा में बाबा रामदेव पर बृजभूषण का तीखा हमला
गोंडा में आयोजित कार्यक्रम में बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव पर तंज कसते हुए कहा कि जिस स्वदेशी अभियान को लेकर वह आगे बढ़े थे, वह अब अलग दिशा में चला गया है। उन्होंने दावा किया कि स्वदेशी की बात करते-करते बाबा रामदेव का अभियान कथित तौर पर ऐसे उत्पादों के कारोबार तक पहुंच गया है, जिनकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
पूर्व सांसद ने अपने संबोधन में अंडरगारमेंट्स और घी का उल्लेख करते हुए बाबा रामदेव पर तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में नकली घी और मिलावटी खाद्य पदार्थों के बढ़ते चलन के लिए भी रामदेव से जुड़े कारोबारी तंत्र को जिम्मेदार माना जाना चाहिए। हालांकि, ये आरोप बृजभूषण शरण सिंह के बयान हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
‘स्वदेशी’ से लेकर उत्पादों की गुणवत्ता तक उठाए सवाल
बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव के स्वदेशी अभियान को लेकर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि आंदोलन का मूल उद्देश्य देशी उत्पादों को बढ़ावा देना था, लेकिन समय के साथ इसकी दिशा बदलती दिखाई देती है। उनके अनुसार, आज स्वदेशी के नाम पर बाजार में तरह-तरह के उत्पाद उपलब्ध हैं और उपभोक्ताओं के सामने उनकी वास्तविक गुणवत्ता को लेकर सवाल भी मौजूद हैं।
उन्होंने खास तौर पर नकली घी, तेल और मावे जैसे खाद्य पदार्थों में मिलावट के मुद्दे को उठाया। उनका कहना था कि लंबे समय से देश में मिलावट का कारोबार चिंता का विषय बना हुआ है और इस पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।
आंदोलन को लेकर भी बाबा रामदेव पर निशाना
बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव के पुराने आंदोलनों का उल्लेख करते हुए उन पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि यदि बाबा रामदेव को दोबारा आंदोलन करना है तो उन्हें सीधे मैदान में उतरना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने बाबा रामदेव के पुराने आंदोलन से जुड़े प्रसंग का हवाला देते हुए कपड़ों को लेकर आपत्तिजनक और व्यक्तिगत टिप्पणी की।
उनका यह बयान सामने आने के बाद विवाद बढ़ने की संभावना है, क्योंकि राजनीतिक बहस में किसी व्यक्ति की नीतियों या विचारों पर सवाल उठाने और व्यक्तिगत टिप्पणी करने के बीच स्पष्ट अंतर होता है। बृजभूषण का ताजा बयान इसी वजह से सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में चर्चा का विषय बन गया है।
मिलावटखोरी पर बृजभूषण शरण सिंह ने जताई चिंता
कार्यक्रम में बृजभूषण शरण सिंह ने केवल बाबा रामदेव को ही निशाने पर नहीं लिया, बल्कि देश में मिलावटखोरी की समस्या पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ देशव्यापी स्तर पर ईमानदारी से अभियान चलाया जाए तो व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
उन्होंने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से नकली घी, तेल और मावे जैसे खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा उठाते रहे हैं। उनके अनुसार, बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
बृजभूषण ने खाद्य तेल की कीमतों का उदाहरण देते हुए भी मिलावट और बाजार मूल्य पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कच्चे माल की लागत और तैयार उत्पाद की कीमत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है तो उसकी गुणवत्ता तथा उत्पादन प्रक्रिया की जांच आवश्यक हो जाती है।
2022 में भी पतंजलि के घी को लेकर दिया था बयान
बाबा रामदेव और बृजभूषण शरण सिंह के बीच बयानबाजी कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2022 में भी बृजभूषण शरण सिंह ने पतंजलि के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उसे ‘नकली घी’ बताया था। उस समय उनका बयान काफी चर्चित हुआ था।
बाराबंकी में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लोगों से घर में गाय या भैंस पालने और दूध-घी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही थी। इसी दौरान उन्होंने पतंजलि के घी को लेकर सवाल उठाया था। उनके बयान के बाद मामला सार्वजनिक बहस में आया और पतंजलि की ओर से उन्हें कानूनी नोटिस भेजे जाने की खबरें भी सामने आई थीं।
उस समय बृजभूषण शरण सिंह ने कहा था कि ग्रामीण परिवारों में शुद्ध दूध और घी की उपलब्धता स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बाजार से खरीदे जाने वाले घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए लोगों को स्थानीय स्तर पर दूध और दुग्ध उत्पादों की व्यवस्था करने की सलाह दी थी।
पुराना विवाद फिर चर्चा में
2022 के बयान के बाद बाबा रामदेव और बृजभूषण शरण सिंह के बीच सार्वजनिक रूप से बयानबाजी देखने को मिली थी। पतंजलि की ओर से कानूनी नोटिस दिए जाने की खबर भी सामने आई थी, जबकि बृजभूषण ने अपनी टिप्पणी को लेकर पीछे हटने से इनकार किया था। उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि रामदेव से उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है।
अब 2026 में गोंडा से आया बृजभूषण का ताजा बयान इस पुराने विवाद को फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है। हालांकि इस बार उनका निशाना केवल पतंजलि के घी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने बाबा रामदेव के स्वदेशी अभियान, आंदोलन की राजनीति और विभिन्न उत्पादों को लेकर भी तीखी टिप्पणियां की हैं।
छात्र सम्मान समारोह में दिया बयान
बृजभूषण शरण सिंह का यह बयान गोंडा में आयोजित मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान समारोह के दौरान सामने आया। कार्यक्रम में कई विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चार विकासखंडों के 47 विद्यालयों से जुड़े करीब 1,400 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में बृजभूषण ने युवाओं को शिक्षा, मेहनत और राष्ट्र निर्माण के प्रति जिम्मेदार बनने का संदेश भी दिया। उन्होंने शिक्षित युवाओं को देश की महत्वपूर्ण पूंजी बताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी के परिश्रम से ही देश की नई दिशा तय होगी। हालांकि कार्यक्रम के दौरान बाबा रामदेव को लेकर दिए गए उनके बयान ने पूरे आयोजन की खबरों में सबसे अधिक सुर्खियां बटोरीं।
बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
बृजभूषण शरण सिंह अपने बेबाक बयानों के लिए पहले भी चर्चा में रहे हैं। बाबा रामदेव पर उनकी ताजा टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नेताओं को किसी व्यक्ति या संस्था की आलोचना करते समय किन शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए।
एक ओर बृजभूषण शरण सिंह मिलावटखोरी और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बाबा रामदेव पर उनकी व्यक्तिगत टिप्पणियां बहस का केंद्र बन गई हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे इस बयान पर बाबा रामदेव या पतंजलि की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी
बृजभूषण शरण सिंह द्वारा पतंजलि उत्पादों और बाबा रामदेव से जुड़े कारोबारी तंत्र को लेकर लगाए गए आरोपों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी उत्पाद को ‘नकली’ या ‘मिलावटी’ बताने के लिए संबंधित सरकारी जांच, प्रयोगशाला रिपोर्ट या सक्षम प्राधिकरण की पुष्टि आवश्यक होती है। इसलिए सार्वजनिक बहस में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
फिलहाल गोंडा में दिए गए बृजभूषण शरण सिंह के बयान ने बाबा रामदेव और पतंजलि से जुड़ा पुराना विवाद एक बार फिर सामने ला दिया है। वर्ष 2022 के घी विवाद के बाद अब 2026 में स्वदेशी अभियान, उत्पादों और आंदोलन को लेकर उनकी नई टिप्पणियां चर्चा में हैं। बाबा रामदेव या पतंजलि की ओर से ताजा बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही विवाद का अगला पक्ष स्पष्ट हो सकेगा।

























