16 अक्टूबर 2026 9:17 अपराह्न

दाखिल-खारिज में देरी से परेशान परिवार, संपत्ति हस्तांतरण का मामला बना चर्चा का विषय

नगर निगम जोन-2 कार्यालय, प्रभावित परिवार की महिलाओं, संपत्ति दान पत्र और रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी को दर्शाती समाचार फीचर इमेज।

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रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी

LUCKNOW संपत्ति के दाखिल-खारिज में हो रही कथित देरी और प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई न होने के आरोपों ने एक परिवार को लंबे समय से परेशान कर रखा है। मामला राजधानी लखनऊ के मवैया क्षेत्र स्थित दुर्गापुरी ब्लंट स्क्वायर के एक आवासीय भवन से जुड़ा है, जहां एक वृद्ध महिला द्वारा अपनी संपत्ति तीन बेटियों के नाम दान किए जाने के बाद भी राजस्व एवं नगर निगम अभिलेखों में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। परिवार का आरोप है कि संबंधित कार्यालय में कई महीनों से लगातार चक्कर लगाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

पारिवारिक विवाद के बीच लिया गया संपत्ति दान का निर्णय

प्राप्त जानकारी के अनुसार दुर्गापुरी ब्लंट स्क्वायर स्थित भवन संख्या 280/45 में रहने वाली वृद्ध महिला श्रीमती पुष्पा देवी ने अपनी संपत्ति अपनी तीन बेटियों के नाम दान कर दी थी। परिवार के अनुसार लंबे समय से घर में पारिवारिक मतभेद और अलग-अलग रहने की स्थिति बनी हुई थी।

बताया जाता है कि पुष्पा देवी और उनके पति जगदीश सिंह एक ही मकान में रहते हुए भी अलग-अलग जीवन व्यतीत कर रहे हैं। आरोप है कि वृद्धावस्था में पुष्पा देवी को घर के एक हिस्से में अकेले रहकर अपना जीवन यापन करना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि उनकी देखभाल और दैनिक आवश्यकताओं का खर्च मुख्य रूप से उनकी बेटियां ही उठाती रही हैं।

परिजनों के अनुसार वृद्ध महिला ने अपनी परिस्थितियों और भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए अपनी संपत्ति अपनी तीनों बेटियों—सुनीता वर्मा, अनिता वर्मा और संगीता पुनीत वशिष्ठ—के नाम दान करने का निर्णय लिया। इसके लिए विधिवत दान पत्र का पंजीकरण 11 दिसंबर 2025 को कराया गया था।

वृद्ध महिला ने लगाए उपेक्षा के आरोप

पुष्पा देवी का आरोप है कि वैवाहिक जीवन के दौरान उन्हें वह सम्मान और सहयोग नहीं मिला जिसकी अपेक्षा एक पत्नी को होती है। उनका कहना है कि सरकारी अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों में भी उन्हें उचित स्थान नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें आर्थिक रूप से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला, जिसके कारण उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

परिवार का कहना है कि वृद्ध महिला की आयु 75 वर्ष से अधिक है और इस उम्र में उन्हें भावनात्मक तथा आर्थिक सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता है। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने अपनी संपत्ति बेटियों के नाम हस्तांतरित करने का फैसला लिया, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो और उनकी देखभाल करने वालों को कानूनी अधिकार प्राप्त हो सके।

दाखिल-खारिज में देरी बना बड़ी परेशानी

संपत्ति दान के बाद सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया नामांतरण अथवा दाखिल-खारिज की होती है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से संपत्ति के नए स्वामियों का नाम सरकारी अभिलेखों में दर्ज किया जाता है। लेकिन परिवार का आरोप है कि दान पत्र के पंजीकरण के कई महीनों बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

बड़ी बेटी सुनीता वर्मा का कहना है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन और प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए हैं। इसके बावजूद उनकी फाइल आगे नहीं बढ़ रही है। उनका आरोप है कि नगर निगम जोन-2 ऐशबाग कार्यालय में पिछले पांच महीने से अधिक समय से लगातार चक्कर लगाने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं मिला है।

सुनीता वर्मा के अनुसार दाखिल-खारिज में देरी के कारण उन्हें अनेक प्रशासनिक और कानूनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संपत्ति से संबंधित अन्य कार्य भी लंबित हैं, क्योंकि अभिलेखों में नामांतरण पूरा नहीं हुआ है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

यह मामला केवल एक परिवार की समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि संपत्ति से जुड़े मामलों के निस्तारण में कितना समय लगना चाहिए और नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं किस प्रकार उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी होने पर नागरिकों को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर तब, जब मामला वृद्ध व्यक्तियों, महिलाओं या पारिवारिक उत्तराधिकार से जुड़ा हो।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए जा चुके हैं और कोई कानूनी बाधा नहीं है, तो ऐसे मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाना चाहिए। इससे नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होता है और अनावश्यक विवादों की संभावना भी कम होती है।

परिवार ने शीघ्र कार्रवाई की मांग की

परिवार ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि उनके प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराते हुए दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को जल्द पूरा कराया जाए। उनका कहना है कि कई महीनों से लंबित यह मामला अब उनके लिए मानसिक तनाव का कारण बन चुका है।

परिवार का यह भी कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के साथ-साथ कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।

फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग और अधिकारी इस प्रकरण में क्या कदम उठाते हैं तथा संपत्ति हस्तांतरण की लंबित प्रक्रिया कब तक पूरी हो पाती है।

(नोट: समाचार में लगाए गए आरोप संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं। प्रशासनिक पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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