चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
प्रदेश के अनेक ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति को लेकर लोगों की चिंता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। मौसम में फिलहाल कुछ राहत मिलने के बावजूद ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में उमस और गर्मी का स्तर फिर बढ़ता है, तो बिजली की मांग में अचानक वृद्धि हो सकती है। ऐसी स्थिति में पहले से दबाव झेल रही विद्युत व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट एक बार फिर गंभीर रूप ले सकता है।
ऊर्जा उत्पादन से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश को बड़ी मात्रा में बिजली उपलब्ध कराने वाली कई महत्वपूर्ण तापीय विद्युत इकाइयां लंबे समय से बंद हैं। इन इकाइयों के ठप रहने के कारण उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है, जिसका असर विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ रहा है। हालांकि बिजली निगम का दावा है कि उपभोक्ताओं को अधिकतम बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास लगातार जारी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन क्षमता में आई कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चार बड़ी उत्पादन इकाइयों के बंद रहने से बढ़ी चिंता
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रदेश की चार प्रमुख तापीय विद्युत इकाइयां फिलहाल उत्पादन नहीं कर रही हैं। इन परियोजनाओं से कुल 2230 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता जुड़ी हुई है, जबकि इनमें से लगभग 2098 मेगावाट बिजली प्रदेश को प्राप्त होती है।
इन इकाइयों के बंद रहने से बिजली उत्पादन पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब मौसम में बदलाव के साथ बिजली की मांग तेजी से ऊपर-नीचे हो रही है, उत्पादन क्षमता का कम होना आपूर्ति तंत्र के लिए चुनौती बन सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम सामान्य बना रहता है तो स्थिति नियंत्रित रह सकती है, लेकिन उमस और गर्मी में बढ़ोतरी होने पर घरेलू, कृषि और व्यावसायिक क्षेत्रों में बिजली की मांग बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में उत्पादन की कमी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक महसूस की जा सकती है।
तकनीकी खामियों के कारण बंद हैं इकाइयां
उपलब्ध जानकारी के अनुसार विभिन्न परियोजनाओं में अलग-अलग तकनीकी समस्याओं के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। एक इकाई में टरबाइन में अत्यधिक कंपन की समस्या सामने आई है, जबकि दूसरी इकाई टरबाइन रोटर में आई तकनीकी खराबी के कारण बंद है।
इसी प्रकार अन्य दो इकाइयों में सुपर हीटर ट्यूब में लीकेज तथा बॉयलर रीसर्कुलेशन पंप में खराबी जैसी समस्याएं बताई गई हैं। इन तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए मरम्मत और परीक्षण का कार्य चल रहा है, लेकिन फिलहाल इनके शीघ्र संचालन शुरू होने की कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि तापीय परियोजनाओं में आने वाली तकनीकी खराबियों का समय पर समाधान अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ऐसी इकाइयां बेस लोड बिजली उत्पादन का महत्वपूर्ण स्रोत होती हैं। इनके लंबे समय तक बंद रहने से वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
उत्पादन ठप होने के कारणों की जांच की उठी मांग
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की ओर से भी इस मामले में सवाल उठाए गए हैं। परिषद का कहना है कि उपलब्ध रिपोर्टों में कहीं भी कोयले की कमी को उत्पादन प्रभावित होने का कारण नहीं बताया गया है। यदि ईंधन की उपलब्धता पर्याप्त थी, तो फिर एक साथ कई इकाइयों के बंद होने के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच की जानी चाहिए।
परिषद के प्रतिनिधियों का मानना है कि विद्युत उत्पादन व्यवस्था में बार-बार आने वाली तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान खोजा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते रखरखाव और निगरानी की व्यवस्था बेहतर की जाए, तो इस तरह की स्थितियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बड़े पावर प्लांटों की नियमित तकनीकी समीक्षा और आधुनिक निगरानी प्रणाली अपनाने से उत्पादन बाधित होने की घटनाओं को कम किया जा सकता है।
बिजली निगम का दावा, कटौती में आई कमी
दूसरी ओर बिजली निगम का कहना है कि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। निगम के अनुसार हाल के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती की अवधि में कमी दर्ज की गई है।
निगम का दावा है कि एक दिन के दौरान दिन के समय लगभग कटौती मुक्त बिजली उपलब्ध कराई गई। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी औसतन बहुत कम अवधि के लिए आपूर्ति प्रभावित रही। विभाग के अनुसार उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर उपभोक्ताओं तक अधिकतम बिजली पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए लोड प्रबंधन, वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग और ग्रिड समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नई इकाई शुरू होने से मिली कुछ राहत
ऊर्जा उपलब्धता के मोर्चे पर एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है। एक बड़ी तापीय इकाई का संचालन पुनः शुरू होने से बिजली व्यवस्था को कुछ राहत मिली है। इस इकाई से लगभग 600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने लगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अतिरिक्त उत्पादन मौजूदा दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद करेगा। हालांकि चार अन्य इकाइयों के बंद रहने के कारण पूरी समस्या का समाधान अभी नहीं माना जा सकता।
यदि शेष इकाइयां भी जल्द चालू हो जाती हैं, तो प्रदेश की बिजली उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था अधिक स्थिर होगी।
रिकॉर्ड मांग के बीच बनी हुई है चुनौती
हाल के दिनों में प्रदेश में बिजली की मांग लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई है। एक दिन में 27 हजार मेगावाट से अधिक बिजली आपूर्ति दर्ज होना इस बात का संकेत है कि उपभोक्ताओं की जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती आबादी, कृषि कार्यों, औद्योगिक गतिविधियों और घरेलू उपकरणों के व्यापक उपयोग के कारण बिजली की मांग हर वर्ष नए रिकॉर्ड बना रही है। ऐसे में उत्पादन क्षमता और वितरण व्यवस्था दोनों को मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है।
मौसम रहेगा निर्णायक
बिजली क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि बारिश और ठंडी हवाओं के कारण तापमान नियंत्रित रहता है, तो बिजली मांग में बहुत अधिक वृद्धि नहीं होगी। लेकिन यदि उमस और गर्मी का दौर दोबारा लौटता है, तो एयर कूलर, पंखों और अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग से मांग तेजी से बढ़ सकती है।
ऐसी स्थिति में उत्पादन इकाइयों के बंद रहने का प्रभाव अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं के साथ-साथ ऊर्जा विभाग की नजर भी अब मौसम और उत्पादन क्षमता दोनों पर टिकी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों उपभोक्ता उम्मीद कर रहे हैं कि बंद पड़ी इकाइयां जल्द शुरू हों और बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो सके।













