चित्रकूट

लोकतंत्र के चारों स्तंभों में आरक्षण लागू करने की मांग, भीम आर्मी ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

जातीय जनगणना, पदोन्नति में आरक्षण, बैकलॉग भर्ती और सामाजिक न्याय से जुड़े सात प्रमुख मुद्दे उठाए

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट। सामाजिक न्याय, समान प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर भीम आर्मी जय भीम संगठन ने सोमवार को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी चित्रकूट को सौंपा। संगठन ने दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के लिए लोकतंत्र के चारों स्तंभों—विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और पत्रकारिता—में आरक्षण लागू करने की मांग उठाई।

ज्ञापन में कहा गया कि देश को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद समाज के वंचित वर्गों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है। संगठन का कहना है कि संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा सामाजिक न्याय के उद्देश्य से आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, लेकिन उसका पूर्ण लाभ आज भी संबंधित वर्गों तक नहीं पहुंच पाया है।

जनसंख्या के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग

भीम आर्मी ने मांग की है कि दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासी वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सरकारी तथा निजी क्षेत्र में प्रतिनिधित्व दिया जाए। संगठन ने पदोन्नति में आरक्षण लागू करने और विभिन्न विभागों में लंबित बैकलॉग रिक्तियों को तत्काल भरने की भी मांग की।

जातीय जनगणना और लैटरल एंट्री का मुद्दा

ज्ञापन में देशव्यापी जातीय जनगणना कराने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। संगठन का कहना है कि वास्तविक जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर ही संसाधनों और अवसरों का न्यायपूर्ण वितरण संभव है। साथ ही लैटरल एंट्री व्यवस्था को समाप्त करने की मांग भी की गई है।

शिक्षा में आरक्षण और समान अवसर पर जोर

संगठन ने NEET, JEE और UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की। इसके अलावा स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप प्रवेश व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण नियमों का कड़ाई से पालन कराने की बात कही गई।

ठेका प्रथा समाप्त करने और सफाई कर्मियों की सुरक्षा की मांग

ज्ञापन में नगर निगमों और नगर निकायों में कार्यरत निजी कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की गई। साथ ही सीवर और नालों की सफाई के लिए आधुनिक मशीनों के उपयोग को अनिवार्य बनाने तथा मानव श्रम के जोखिमपूर्ण उपयोग पर कठोर कार्रवाई की व्यवस्था करने की मांग उठाई गई।

मॉब लिंचिंग रोकने के लिए विशेष कानून की मांग

भीम आर्मी ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता जताते हुए इसके खिलाफ विशेष कानून बनाने की मांग की। संगठन ने कथित फर्जी मुकदमों और विवादित मुठभेड़ों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता भी बताई तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया।

किसानों और भूमिहीनों के मुद्दे भी उठाए

ज्ञापन में भूमिहीन गरीबों को भूमि पट्टे देने, कृषि मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी तथा किसानों की फसलों का पूर्ण बीमा सुनिश्चित करने की मांग की गई।

संविधान शिक्षा को अनिवार्य बनाने की मांग

संगठन ने देश के सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संविधान की पढ़ाई अनिवार्य किए जाने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि संवैधानिक मूल्यों की जानकारी लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है।

ज्ञापन सौंपने के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कदम उठाने की अपील की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button