मुजहनी ग्राम पंचायत की पांच साल की विकास-पड़ताल : कागज पर योजनाएं, जमीन पर अधूरे सवाल

बलरामपुर की मुजहनी ग्राम पंचायत में पांच साल के विकास कार्यों की पड़ताल दर्शाती लैंडस्केप न्यूज फीचर इमेज, जिसमें जल जीवन मिशन, हैंडपंप, पंचायत भवन, सड़क और अमृत सरोवर से जुड़े सवाल दिखाए गए हैं।

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रिपोर्ट: अब्दुल मोबीन सिद्दीकी

बलरामपुर/श्रीदत्तगंज। ग्राम पंचायत मुजहनी में पिछले करीब पांच वर्षों के विकास की पड़ताल करने पर तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं, बल्कि कई परतों वाली सामने आती है। सरकारी पोर्टलों और उपलब्ध समाचार अभिलेखों में पंचायत के लिए पेयजल, स्वच्छता, पंचायत भवन, सड़क, जल संरक्षण और अन्य ग्रामीण सुविधाओं से जुड़े कामों के संकेत मिलते हैं, लेकिन दूसरी ओर कुछ बुनियादी सुविधाओं की स्थिति आज भी सवाल खड़े करती है। खास तौर पर जल जीवन मिशन की प्रगति, हैंडपंपों की गुणवत्ता, पंचायत भवन के उपयोग, सड़क की बदहाली और अधूरे अथवा गैर-कार्यशील कार्य जांच की मांग करते हैं।

इस पड़ताल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में ग्राम प्रधान के खिलाफ किसी आपराधिक मुकदमे, वित्तीय अनियमितता में दोषसिद्धि अथवा पद से हटाने जैसी कार्रवाई का पुष्ट दस्तावेज नहीं मिला है। इसलिए शिकायतों और ग्रामीण आरोपों को सीधे भ्रष्टाचार सिद्ध मानना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। हालांकि, शिकायतों और सरकारी योजनाओं की वर्तमान स्थिति ऐसे कई सवाल जरूर पैदा करती है, जिनका जवाब पंचायत स्तर के अभिलेख, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण और स्थलीय सत्यापन से मिलना चाहिए।

मुजहनी की पहचान और विकास का आधार

सरकारी अभिलेखों में मुजहनी ग्राम पंचायत विकासखंड श्रीदत्तगंज, जनपद बलरामपुर के अंतर्गत दर्ज है। पंचायत क्षेत्र में बीते वर्षों में ग्रामीण विकास, पेयजल, स्वच्छता, जल संरक्षण और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े विभिन्न कार्य कराए गए हैं। वर्तमान में ग्राम पंचायत की प्रधान सीमा नौशाद हैं। स्थानीय स्तर पर पंचायत के कामकाज में उनके पति नौशाद अली को एक्टिंग प्रधान के रूप में सक्रिय बताया जाता है, जिसके कारण पंचायत के वास्तविक संचालन और निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी ग्रामीणों के बीच चर्चा बनी हुई है।

2023-24 के सरकारी वित्तीय दस्तावेज में मुजहनी को स्वच्छता संबंधी ODF Plus गतिविधियों के लिए लक्षित पंचायतों में शामिल किया गया था। इसमें मुजहनी गांव के लिए 587 परिवार, 2011 की जनगणना के अनुसार 4,152 आबादी तथा 2022 की अनुमानित आबादी 5,275 दर्ज की गई है। इसी दस्तावेज में कुल लक्षित राशि ₹37,18,875 बताई गई है, जिसमें ₹26,03,213 SBM मद तथा ₹11,15,663 15वें वित्त आयोग की मद से संबंधित राशि दिखाई गई है।

यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है—₹37.19 लाख को सीधे खर्च हुई रकम नहीं कहा जा सकता। यह स्वच्छता संबंधी कार्यों के लिए दर्शाई गई लक्षित/आवंटित राशि है। वास्तविक भुगतान और कार्यवार व्यय जानने के लिए ई-ग्राम स्वराज के भुगतान एवं वाउचर रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है।

जल जीवन मिशन: 580 घर, 542 नल कनेक्शन और फिर भी 93.45 प्रतिशत

मुजहनी के विकास की पड़ताल में सबसे ठोस सरकारी आंकड़ा जल जीवन मिशन से मिलता है।

उत्तर प्रदेश जल जीवन मिशन के डैशबोर्ड के अनुसार मुजहनी गांव में कुल 580 परिवार दर्ज हैं और उनमें 542 परिवारों को Functional Household Tap Connection (FHTC) उपलब्ध कराया गया है। इसकी प्रगति 93.45 प्रतिशत दर्ज है। यानी सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से अभी भी लगभग 38 परिवार ऐसे हैं जिनके नाम FHTC सूची में नहीं हैं।

यह आंकड़ा अपने आप में महत्वपूर्ण है। क्योंकि योजना का लक्ष्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि घर तक नियमित और सुरक्षित पानी पहुंचाना है। और यहीं से दूसरा सवाल पैदा होता है।

जल जीवन मिशन के एक अन्य सरकारी रिकॉर्ड में “MUJAINNA & MUJHAINI WATER SUPPLY” नाम की योजना दर्ज है। योजना वर्ष 2022-23 है। इसका स्वीकृत लागत आंकड़ा ₹529.86 लाख, जारी राशि ₹197.50 लाख और दर्ज व्यय ₹213.28 लाख है। योजना की भौतिक प्रगति 67 प्रतिशत तथा कार्यात्मक स्थिति Non-functional दर्ज है।

इस आंकड़े को बहुत सावधानी से पढ़ने की जरूरत है। यह पूरी रकम केवल मुजहनी की नहीं है, क्योंकि योजना में मुजैहना और मुजहनी दोनों शामिल हैं। इसलिए ₹529.86 लाख को मुजहनी पंचायत का अकेला खर्च बताना गलत होगा।

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लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में योजना का 67 प्रतिशत भौतिक प्रगति और Non-functional होना निश्चित रूप से जांच का विषय है। सवाल यह है कि जब घर-घर नल कनेक्शन की प्रगति 93.45 प्रतिशत बताई जा रही है, तो संबंधित जलापूर्ति परियोजना की कार्यात्मक स्थिति गैर-कार्यशील क्यों दर्ज है?

हैंडपंपों पर गंभीर सवाल: लाखों खर्च के बाद भी गंदा पानी?

मुजहनी के पेयजल संकट का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू हैंडपंपों से जुड़ा है।

मुजहनी और विशंभरपुर में इंडिया मार्का हैंडपंपों को रिबोर करने के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई हैंडपंपों से गंदा पानी आने की शिकायत सामने आई थी। ग्रामीणों ने इस मामले में जांच की मांग की थी।

यह शिकायत सिर्फ एक खराब हैंडपंप की समस्या नहीं है। अगर रिबोर या मरम्मत के बाद भी पानी पीने योग्य नहीं है, तो तीन स्तरों पर जांच जरूरी हो जाती है—

  1. किस हैंडपंप को कब रिबोर किया गया?
  2. उस पर कितना भुगतान हुआ?
  3. रिबोर के बाद पानी की गुणवत्ता की जांच किसने की?

और सबसे महत्वपूर्ण—क्या जिस काम का भुगतान हुआ, उसका परिणाम मौके पर उपलब्ध है?

इसका जवाब ग्राम पंचायत की कार्यवाही पुस्तिका, बिल-वाउचर, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका और जल गुणवत्ता रिपोर्ट से ही मिल सकता है।

पंचायत भवन बना, लेकिन ग्रामीणों को सेवा मिली या नहीं?

श्रीदत्तगंज ब्लॉक की पंचायत व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल सामने आए थे। कई पंचायत भवनों में सचिव और प्रधान के नियमित बैठने की व्यवस्था नहीं होने तथा भवनों में ताले लगे रहने के कारण ग्रामीणों को प्रमाण-पत्र और परिवार रजिस्टर की नकल जैसे कामों के लिए ब्लॉक कार्यालय जाना पड़ता था।

इस स्थिति में मुजहनी भी सवालों के घेरे में रही। ग्रामीणों ने पंचायत भवन में ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध न होने की शिकायत की थी। प्रशासन की ओर से पंचायत सहायक के माध्यम से सर्वे कराए जाने तथा ग्रामीणों को पंचायत भवन में ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।

यह मामला विकास कार्य की गुणवत्ता से आगे बढ़कर पंचायत भवन के वास्तविक उपयोग का सवाल बन जाता है।

यदि भवन का निर्माण हो चुका है, लेकिन ग्रामीणों को वहीं प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, ऑनलाइन आवेदन और पंचायत सेवाएं नहीं मिल रही हैं, तो भवन की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सड़क का सवाल: विकास की सबसे दिखाई देने वाली परीक्षा

मुजहनी की स्थिति को सड़क से भी परखा जा सकता है। महदेइया से मुजैहनी संपर्क मार्ग समेत क्षेत्र की कई सड़कों की स्थिति खराब होने और विशेष मरम्मत की आवश्यकता सामने आई थी। बाद में इस सड़क की मरम्मत के लिए ₹48.63 लाख की लागत का उल्लेख सामने आया। श्रीदत्तगंज क्षेत्र की नौ सड़कों की मरम्मत के लिए कुल ₹8 करोड़ खर्च किए जाने की बात कही गई थी।

यह राशि ग्राम पंचायत मुजहनी की ग्राम निधि की राशि नहीं है। यह सड़क विभाग/शासन की सड़क मरम्मत योजना से संबंधित है। इसलिए इसे ग्राम प्रधान के खाते का विकास कार्य मानना सही नहीं होगा।

फिर भी मुजहनी के विकास की समीक्षा में इसे इसलिए शामिल करना जरूरी है क्योंकि ग्रामीण के लिए विकास का सबसे प्रत्यक्ष पैमाना सड़क ही है।

अमृत सरोवर: जल संरक्षण के नाम पर काम, लेकिन पानी कहां?

श्रीदत्तगंज ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों के अमृत सरोवरों की स्थिति पर भी सवाल उठे थे। इनमें मुजहनी भी शामिल थी। मनरेगा के तहत बनाए गए कई अमृत सरोवरों पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद उनके सूखे पड़े रहने की स्थिति सामने आई थी। मुजहनी समेत कई पंचायतों के अमृत सरोवरों में पानी नहीं होने की बात सामने आई।

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यहां भी सवाल सीधा है— तालाब बना तो उसकी वर्तमान उपयोगिता क्या है?

यदि जल संरक्षण योजना का उद्देश्य वर्षा जल को संरक्षित करना है, तो केवल तालाब की खुदाई या किनारे बनाने से योजना पूरी नहीं मानी जा सकती। उसमें जल संचयन, इनलेट-आउटलेट, रखरखाव और वास्तविक जल उपलब्धता भी देखी जानी चाहिए।

पिछले पांच वर्षों में सामने आए प्रमुख विकास-सवाल

उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और समाचार रिपोर्टों को जोड़ने पर मुजहनी के संबंध में कम से कम ये प्रमुख बिंदु सामने आते हैं—

क्षेत्र उपलब्ध आंकड़ा/स्थिति जांच की जरूरत
ODF Plus ₹37.19 लाख लक्षित राशि, 2023-24 वास्तविक भुगतान और कार्य
जल जीवन मिशन 580 परिवार, 542 FHTC शेष 38 परिवारों का सत्यापन
जलापूर्ति परियोजना ₹529.86 लाख स्वीकृत, ₹213.28 लाख व्यय; संयुक्त योजना मुजहनी-मुजैहना में वास्तविक खर्च का विभाजन
जलापूर्ति भौतिक प्रगति 67% अधूरा काम क्यों?
जलापूर्ति कार्यात्मक स्थिति Non-functional वर्तमान स्थिति का भौतिक सत्यापन
हैंडपंप रिबोर पर लाखों खर्च की शिकायत भुगतान बनाम मौके पर परिणाम
पंचायत भवन उपयोग/खुले रहने पर शिकायत नियमित संचालन और ऑनलाइन सेवा
अमृत सरोवर सूखा होने की रिपोर्ट निर्माण, भुगतान और वर्तमान उपयोगिता
सड़क महदेइया-मुजैहनी मार्ग की मरम्मत प्रस्तावित/स्वीकृत वर्तमान गुणवत्ता और पूर्णता

प्रधान के खिलाफ शिकायतें: क्या मिला, क्या नहीं मिला?

यह इस पड़ताल का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। उपलब्ध ऑनलाइन समाचार और सरकारी दस्तावेजों में वर्तमान ग्राम प्रधान सीमा नौशाद के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर या दंडात्मक कार्रवाई का स्पष्ट, पुष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला है।

इसी तरह उपलब्ध रिकॉर्ड में उनके पति नौशाद अली के खिलाफ भी पंचायत के वित्तीय मामलों में किसी पुष्ट आपराधिक कार्रवाई का स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर पंचायत के कामकाज में उनके एक्टिंग प्रधान के रूप में सक्रिय रहने की बात कही जाती है, इसलिए पंचायत के निर्णयों और कार्यों में उनकी वास्तविक भूमिका की जांच दस्तावेजों के आधार पर की जानी चाहिए।

यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि शिकायत, आरोप और सिद्ध अनियमितता तीन अलग-अलग बातें हैं। किसी ग्रामीण की शिकायत अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं होती और किसी शिकायत के निस्तारण को भी स्वतः क्लीन चिट नहीं माना जा सकता। इसके लिए जांच रिपोर्ट और सक्षम अधिकारी का अंतिम आदेश देखना आवश्यक है।

एक पुराना शिकायत रिकॉर्ड जरूर है

अक्टूबर 2020 के संपूर्ण समाधान दिवस के रिकॉर्ड में रामफल यादव, निवासी मुजेहनी, द्वारा ग्राम सचिवालय निर्माण में बाधा पहुंचाने वाले लोगों की शिकायत दर्ज होने का उल्लेख मिलता है। प्रशासन ने राजस्व और पुलिस टीम को मौके पर भेजने का निर्देश दिया था।

लेकिन यह शिकायत वर्तमान प्रधान के खिलाफ वित्तीय अनियमितता की शिकायत नहीं थी। इसे सीमा नौशाद या नौशाद अली के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत बताना गलत होगा।

इसलिए उपलब्ध रिकॉर्ड से फिलहाल निष्कर्ष यही निकलता है कि वर्तमान प्रधान सीमा नौशाद के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी कार्रवाई का सार्वजनिक रूप से पुष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जबकि पंचायत में हुए कुछ कार्यों की गुणवत्ता और पूर्णता को लेकर ग्रामीण शिकायतें तथा विभागीय रिपोर्ट जरूर मौजूद हैं।

क्या-क्या काम अधूरा या संदिग्ध स्थिति में हैं?

उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के आधार पर सबसे बड़ा अधूरा काम जलापूर्ति परियोजना दिखाई देता है। संयुक्त मुजैहना-मुजहनी जलापूर्ति योजना में 67 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज है और स्थिति Non-functional दिखाई गई है।

दूसरा मुद्दा 38 परिवारों का FHTC से बाहर होना है। 580 परिवारों में 542 कनेक्शन का अर्थ है कि 100 प्रतिशत कवरेज अभी हासिल नहीं हुआ।

तीसरा मुद्दा हैंडपंपों की गुणवत्ता है। रिबोर/मरम्मत पर खर्च के बावजूद गंदे पानी की शिकायत सामने आना काम की गुणवत्ता का स्वतंत्र परीक्षण मांगता है।

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चौथा सवाल पंचायत भवन के संचालन का है। भवन मौजूद होने के बावजूद ग्रामीण सेवाओं के लिए ब्लॉक का चक्कर लगाने की शिकायत हुई।

पांचवां मुद्दा अमृत सरोवर की उपयोगिता है। निर्माण के बावजूद पानी नहीं रहने की शिकायत सामने आई।

लेकिन असली जांच अभी बाकी है

इस रिपोर्ट से सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह नहीं निकलता कि मुजहनी में भ्रष्टाचार हुआ है। बल्कि यह निकलता है कि कुछ ऐसे काम और सरकारी आंकड़े हैं जिनका ग्राम पंचायत स्तर पर स्वतंत्र भौतिक एवं वित्तीय सत्यापन आवश्यक है।

यदि मुजहनी ग्राम पंचायत की पूरी पांच वर्षीय वित्तीय जांच करनी है तो निम्न रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए—

  • 2021-22 से 2025-26 तक ग्राम पंचायत की वार्षिक आय-व्यय
  • 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि
  • राज्य वित्त आयोग की राशि
  • मनरेगा के प्रत्येक कार्य का मस्टर रोल
  • प्रत्येक कार्य की माप पुस्तिका (MB)
  • भुगतान की तारीख और राशि
  • लाभार्थी/वेंडर/कार्यदायी संस्था का विवरण
  • पंचायत भवन निर्माण एवं मरम्मत का भुगतान
  • हैंडपंप रिबोर की कार्यवार सूची
  • अमृत सरोवर की स्वीकृत लागत और वास्तविक व्यय
  • जल जीवन मिशन में मुजहनी से संबंधित कार्यों का अलग वित्तीय विवरण
  • ग्राम सभा की बैठक में पारित कार्ययोजनाएं
  • सोशल ऑडिट की आपत्तियां और अनुपालन रिपोर्ट
  • आईजीआरएस/मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत संख्या और निस्तारण रिपोर्ट

यही दस्तावेज बताएंगे कि कागज पर दर्ज विकास वास्तव में जमीन पर कितना उतरा।

मुजहनी में सवाल विकास की रकम से ज्यादा उसके परिणाम का है

मुजहनी की पांच साल की पड़ताल में एक विरोधाभासी तस्वीर सामने आती है। एक तरफ सरकारी रिकॉर्ड में ODF Plus के लिए ₹37.19 लाख की लक्षित राशि, जल जीवन मिशन में 93.45 प्रतिशत FHTC कवरेज, बड़ी जलापूर्ति परियोजना और विभिन्न ग्रामीण विकास गतिविधियां दर्ज हैं। दूसरी ओर जलापूर्ति परियोजना की 67 प्रतिशत भौतिक प्रगति और Non-functional स्थिति, हैंडपंपों से गंदा पानी आने की शिकायत, पंचायत भवन के उपयोग पर सवाल, सूखे अमृत सरोवर और सड़क की बदहाली जैसी तस्वीरें भी सामने आती हैं।

इसलिए मुजहनी का असली सवाल यह नहीं है कि “कितना पैसा आया?” बल्कि यह है कि “कितना पैसा किस काम पर लगा, काम कितना पूरा हुआ और उसका लाभ कितने परिवारों तक पहुंचा?”

प्रधान सीमा नौशाद के खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड को देखते हुए फिलहाल निष्पक्ष निष्कर्ष यही है कि भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर अथवा दंडात्मक कार्रवाई का पुष्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। वहीं उनके पति नौशाद अली के एक्टिंग प्रधान के रूप में सक्रिय रहने की बात पंचायत के वास्तविक संचालन और निर्णय प्रक्रिया की अलग से जांच का विषय हो सकती है।

हां, पंचायत के कुछ कार्यों को लेकर शिकायतें और कमियां दर्ज हैं, जिनकी जिम्मेदारी तय करने के लिए दस्तावेजी ऑडिट और स्थलीय जांच जरूरी है।

यानी मुजहनी में अभी भ्रष्टाचार का फैसला नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच की जरूरत है। यदि ग्राम पंचायत के पिछले पांच वर्षों के भुगतान, मस्टर रोल, माप पुस्तिका और ई-ग्राम स्वराज रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिए जाएं तो यह साफ हो सकता है कि विकास की कहानी कितनी “कागजी” है और कितनी “जमीनी”

रिपोर्टिंग नोट: यह पड़ताल 4 सितंबर 2026 तक उपलब्ध खुले सरकारी पोर्टलों और प्रकाशित समाचार अभिलेखों पर आधारित है। जहां तथ्य पुष्ट हैं, वहां आंकड़े दिए गए हैं; जहां केवल शिकायत/आरोप सामने आए हैं, उन्हें आरोप के रूप में ही रखा गया है। खासकर जल जीवन मिशन की ₹529.86 लाख वाली योजना मुजैहना-मुजहनी संयुक्त योजना है, इसलिए उसकी पूरी राशि मुजहनी पंचायत के खाते में जोड़ना उचित नहीं होगा।

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