18 अक्टूबर 2026 4:19 पूर्वाह्न

आस्था की नगरी में ’52 पत्तियों का बेशर्म नाच’, भावना को शर्मसार करने वालों का जिम्मेदार कौन?

मिर्जापुर विंध्याचल धाम की तस्वीर के साथ जुए और नशे की गतिविधियों को दर्शाती फीचर इमेज में रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह

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ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

मिर्जापुर। विंध्याचल धाम को आस्था, साधना और मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। गंगा तट पर बसे इस पवित्र धार्मिक क्षेत्र में दूर-दराज से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। विंध्य कॉरिडोर बनने के बाद क्षेत्र की तस्वीर और सुविधाओं में बड़ा बदलाव आया है, लेकिन इसी बदलते धार्मिक परिदृश्य के बीच नशे और जुए जैसी सामाजिक बुराइयों की मौजूदगी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों और कथित वीडियो के अनुसार, विंध्याचल थाना क्षेत्र के सगरा में इन दिनों जुए का एक गिरोह सक्रिय होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि यहां खुलेआम जुए का संचालन कराया जा रहा है और 52 पत्तियों पर रुपये दांव पर लगाकर लोग अपना घर-परिवार तक जोखिम में डाल रहे हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो सवाल केवल जुए के एक अड्डे का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसके सामने कथित तौर पर यह कारोबार बेखौफ चलता दिखाई दे रहा है।

आस्था के बीच जुए की महफिल, सवालों के घेरे में व्यवस्था

विंध्याचल आने वाला श्रद्धालु मंदिरों की घंटियों, मां के जयकारों और धार्मिक वातावरण की कल्पना करता है। लेकिन यदि उसी धार्मिक क्षेत्र में खुले तौर पर जुए की महफिल सजने के आरोप सामने आएं तो यह पूरे क्षेत्र की छवि के लिए चिंता का विषय है।

सगरा में कथित जुआ संचालन से जुड़े वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है। इन वीडियो में जुआ खेलते लोगों की मौजूदगी का दावा किया जा रहा है। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित अधिकारियों द्वारा किया जाना बाकी है, लेकिन तस्वीरों और वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी स्थान पर लंबे समय से जुआ संचालित होने की शिकायतें हैं तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था कहां है? क्या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है? और अगर जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही?

52 पत्तियों का खेल, लेकिन दांव पर लग रहे परिवार

जुआ देखने में कुछ लोगों के लिए मनोरंजन या पैसे कमाने का आसान रास्ता लग सकता है, लेकिन इसका सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ता है जिनकी कमाई धीरे-धीरे जुए की मेज पर पहुंचने लगती है। शुरुआत छोटी रकम से होती है और हार की भरपाई के लिए दांव बढ़ता जाता है। इसके बाद कर्ज, घरेलू विवाद और आर्थिक संकट का सिलसिला शुरू हो सकता है।

कई परिवारों के लिए जुआ केवल पैसे का नुकसान नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संकट का कारण बन जाता है। घर की जरूरतों के लिए रखी रकम दांव पर लगने लगती है और देखते ही देखते परिवार की आर्थिक नींव कमजोर हो जाती है।

ऐसे में धार्मिक नगरी में जुए के कथित अड्डे का संचालन केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है। यह सामाजिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा सवाल भी है।

नशे और जुए के गठजोड़ से बढ़ता खतरा

विंध्याचल क्षेत्र में जुए के साथ नशे के कारोबार को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। नशा और जुआ जब एक ही इलाके में सक्रिय होते हैं तो इसका असर युवाओं पर विशेष रूप से पड़ सकता है।

नशे की लत व्यक्ति की सोच और आर्थिक स्थिति दोनों को प्रभावित करती है, वहीं जुआ कम समय में पैसा कमाने की लालसा पैदा करता है। दोनों प्रवृत्तियां मिलकर परिवार और समाज के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।

यही कारण है कि धार्मिक स्थलों के आसपास नशे और जुए पर प्रभावी नियंत्रण बेहद जरूरी माना जाता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय निवासियों के सामाजिक वातावरण को सुरक्षित रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

क्या किसी सफेदपोश संरक्षण का सहारा?

सगरा में कथित जुआ संचालन को लेकर एक और गंभीर सवाल उठ रहा है—क्या इस कारोबार को किसी प्रभावशाली व्यक्ति या सफेदपोश का संरक्षण हासिल है?

हालांकि इस तरह के संरक्षण की पुष्टि बिना आधिकारिक जांच के नहीं की जा सकती, लेकिन जब किसी अवैध गतिविधि के लंबे समय तक चलते रहने के आरोप सामने आते हैं तो स्वाभाविक रूप से संरक्षण के सवाल भी उठते हैं।

यदि जांच में कोई व्यक्ति, गिरोह या प्रभावशाली संरक्षक सामने आता है तो उसके खिलाफ भी कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो पुलिस और प्रशासन को जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि बेवजह किसी की छवि खराब न हो।

स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल

कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र में जुए के अड्डे के संचालन की शिकायत लगातार सामने आती है तो पुलिस की सक्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी गलत संदेश जाता है। खासकर तब जब विंध्याचल को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

पुलिस के सामने चुनौती केवल जुआ बंद कराने की नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि कार्रवाई के बाद ऐसे अड्डे दोबारा सक्रिय न हों। इसके लिए केवल छापेमारी ही नहीं, बल्कि निगरानी, सूचना तंत्र और स्थानीय स्तर पर प्रभावी पुलिसिंग भी आवश्यक है।

पहले भी सामने आती रही हैं ऐसी तस्वीरें

विंध्याचल क्षेत्र में जुए और नशे से जुड़ी गतिविधियों को लेकर पहले भी चर्चाएं और कार्रवाई सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जाता रहा है कि पहाड़ियों और अपेक्षाकृत सुनसान इलाकों से जुड़े कुछ स्थान जुआरियों के बीच काफी चर्चित रहे हैं।

पूर्व में जुए और नशे के कथित अड्डों पर बाहरी पुलिस टीमों द्वारा कार्रवाई किए जाने की बातें भी सामने आती रही हैं। यदि ऐसा हुआ है तो यह स्थानीय सूचना तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है कि बाहरी टीम को जानकारी कैसे मिली और स्थानीय स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी?

हालांकि किसी भी पुराने मामले को वर्तमान आरोपों से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा। वर्तमान में सगरा में जुए के कथित संचालन को लेकर सामने आए वीडियो और शिकायतों की निष्पक्ष जांच ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है।

विंध्य कॉरिडोर के बाद बढ़ी जिम्मेदारी

विंध्य कॉरिडोर ने विंध्याचल को नई पहचान और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, यातायात व्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिशें क्षेत्र के विकास की तस्वीर बदल रही हैं।

लेकिन किसी भी धार्मिक पर्यटन क्षेत्र का विकास केवल सड़क, कॉरिडोर और भवनों से पूरा नहीं होता। वहां का सामाजिक और सुरक्षा वातावरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

यदि श्रद्धालु धार्मिक यात्रा के दौरान नशे और जुए जैसी गतिविधियों को खुलेआम देखेंगे तो इससे पूरे क्षेत्र की छवि प्रभावित होगी। इसलिए विकास के साथ-साथ सामाजिक बुराइयों पर नियंत्रण भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

आस्था की नगरी में आखिर जिम्मेदार कौन?

सवाल सीधा है—यदि सगरा में जुए का कथित कारोबार चल रहा है तो इसका जिम्मेदार कौन है?

जुआ खेलने वाला जिम्मेदार है, जुआ खिलाने वाला जिम्मेदार है और यदि किसी स्तर पर संरक्षण मिलता है तो संरक्षण देने वाला भी जिम्मेदार होना चाहिए। लेकिन इसके साथ यह सवाल भी जरूरी है कि ऐसी गतिविधियों की रोकथाम की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर है, उनकी जवाबदेही कैसे तय होगी?

किसी भी आरोप को जांच से पहले सच मान लेना उचित नहीं है। लेकिन सामने आए वीडियो और स्थानीय शिकायतों को नजरअंदाज करना भी उतना ही गंभीर विषय हो सकता है। जरूरत इस बात की है कि संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और यदि जुआ संचालन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें।

श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए

विंध्याचल केवल एक सामान्य कस्बा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा धार्मिक क्षेत्र है। यहां आने वाला श्रद्धालु अपने साथ विश्वास लेकर आता है। इसलिए इस क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाना जरूरी है जो धार्मिक वातावरण और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं।

52 पत्तियों का खेल कुछ लोगों के लिए भले ही महज जुआ हो, लेकिन आस्था की नगरी में यह खेल कई परिवारों के लिए बर्बादी का कारण और पूरे धार्मिक क्षेत्र की छवि पर सवाल बन सकता है।

अब देखना यह है कि सगरा में जुए के कथित अड्डे को लेकर सामने आई शिकायतों और वीडियो पर पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या जांच होगी? क्या जुआ संचालकों तक कानून का हाथ पहुंचेगा? और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या उनके पीछे खड़े संभावित संरक्षण तंत्र की भी जांच होगी?

इन सवालों का जवाब कार्रवाई से ही मिलेगा। फिलहाल विंध्याचल की आस्था पूछ रही है—52 पत्तियों के इस कथित बेशर्म नाच से धार्मिक भावना को शर्मसार करने वालों पर लगाम कौन लगाएगा?

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