17 अक्टूबर 2026 7:22 अपराह्न

जी.एम. एकेडमी में नवरात्रि और दशहरा उत्सव की धूम, मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना से भक्तिमय हुआ परिसर

जी.एम. एकेडमी सलेमपुर में नवरात्रि और दशहरा उत्सव के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सजी बच्चियां, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और जनगणदूत के रिपोर्टर इरफान अली लारी।

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नन्हीं बच्चियों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने मोहा सबका मन, गणेश वंदना से काली तांडव और गरबा नृत्य तक सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिखा भक्ति और भारतीय परंपरा का संगम

इरफान अली लारी की रिपोर्ट | सलेमपुर, देवरिया

देवरिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सलेमपुर स्थित जी.एम. एकेडमी में नवरात्रि और दशहरा का पर्व धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक उल्लास और भारतीय परंपराओं के रंगों के बीच धूमधाम से मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा, उत्साह और मनमोहक प्रस्तुतियों से ऐसा वातावरण बनाया कि पूरा सभागार भक्तिरस में डूब गया। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना, गणेश वंदना, सरस्वती वंदना, भक्ति गीत, गरबा नृत्य और काली तांडव जैसी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

जी.एम. एकेडमी में नवरात्रि और दशहरा उत्सव का मुख्य आकर्षण नन्हीं बच्चियों का देवी के विभिन्न स्वरूपों में सजना-संवरना और अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करना रहा। बच्चों की प्रस्तुतियों में जहां भक्ति और श्रद्धा की झलक दिखाई दी, वहीं उनके आत्मविश्वास, अनुशासन और मंचीय कौशल ने दर्शकों को प्रभावित किया। सभागार में उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ बच्चों का उत्साह बढ़ाया। पूरे आयोजन में आस्था, सद्भाव, कर्तव्यनिष्ठा और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ

जी.एम. एकेडमी में आयोजित नवरात्रि और दशहरा उत्सव को दो चरणों में संपन्न कराया गया। प्रथम चरण में विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद दूसरे चरण में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की झांकी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन किया गया। इस प्रकार ज्ञान, बुद्धि, शुभारंभ और मंगलकामना के प्रतीकों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत हुई।

कार्यक्रम में विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों की प्रस्तुतियों में धार्मिक गीतों और नृत्यों के साथ भारतीय संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले। विद्यालय का सभागार विद्यार्थियों, शिक्षकों और उपस्थित दर्शकों की सहभागिता से उत्साहपूर्ण बना रहा।

आयोजन का उद्देश्य केवल पर्व का उत्सव मनाना नहीं था, बल्कि बच्चों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव से परिचित कराना भी था। मंच पर प्रस्तुत प्रत्येक कार्यक्रम ने अपनी अलग छाप छोड़ी। कहीं मां सरस्वती के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई तो कहीं भगवान गणेश की वंदना के माध्यम से मंगलमय जीवन की कामना की गई। देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों पर आधारित प्रस्तुतियों ने शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का संदेश दिया।

नन्हीं प्रतिभाओं ने भक्ति प्रस्तुतियों से बांधा समां

सांस्कृतिक कार्यक्रम में छोटे बच्चों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। शगुफ्ता, स्वर्णिमा, जान्हवी, समृद्धि, शिल्पी, कुमुद, प्रियांशी और दिव्यांश सहित अन्य बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनकी सहज अभिव्यक्ति, उत्साह और मंच पर दिखाई गई सक्रियता ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

बच्चों की प्रस्तुतियों में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक सीख का भी समावेश दिखाई दिया। विद्यालय में इस प्रकार के आयोजन बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देते हैं। मंच पर प्रस्तुति देने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और समूह में काम करने, अनुशासन बनाए रखने तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने की प्रेरणा मिलती है।

कार्यक्रम में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों ने अपनी तैयारी और अभ्यास के अनुरूप प्रस्तुतियां दीं। बच्चों ने गीतों और नृत्यों के माध्यम से दर्शाया कि विद्यालयी शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना भी है।

गणेश वंदना और सरस्वती वंदना ने किया मंत्रमुग्ध

कार्यक्रम की धार्मिक प्रस्तुतियों में कक्षा छह ‘बी’ की आराध्या, ध्रुवी, अर्पिता, वैष्णवी सिंह, प्रियांशी, मानसी, सपना और वैष्णवी ने गणेश वंदना पर नृत्य प्रस्तुत किया। भगवान गणेश की आराधना से जुड़ी इस प्रस्तुति ने शुभता और मंगलकामना का संदेश दिया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को भक्ति के भाव से जोड़ने का प्रयास किया।

इसके बाद कक्षा नौ ‘बी’ की स्तुति और नित्या ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। ज्ञान, विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती को समर्पित इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम में आध्यात्मिक वातावरण को और गहरा किया। शिक्षा के मंदिर में मां सरस्वती की वंदना का विशेष महत्व है, क्योंकि यह विद्यार्थियों को ज्ञान के प्रति सम्मान, एकाग्रता और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा देती है।

दोनों प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों ने धार्मिक परंपराओं के प्रति अपनी समझ और मंचीय प्रतिभा का परिचय दिया। दर्शकों ने उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की और पूरे सभागार में उत्साह का वातावरण बना रहा।

‘ललाटी भंडार’ और ‘डमरू डाक’ पर दिखी सांस्कृतिक छटा

कार्यक्रम में लोक और भक्ति संगीत से जुड़ी प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को आकर्षित किया। कक्षा पांचवीं ‘बी’ की राजनंदिनी, शालिनी, शालू, जोया, आयुषी, पूर्वी, अदिति और तान्या ने ‘ललाटी भंडार’ पर प्रस्तुति दी। सामूहिक रूप से प्रस्तुत इस कार्यक्रम ने सांस्कृतिक उत्सव में एक अलग रंग भर दिया।

इसी क्रम में कक्षा सातवीं ‘बी’ की तृष्णा, अन्नू, परी, शिवानी, रति और अर्पिता ने ‘डमरू डाक’ पर नृत्य प्रस्तुत किया। नृत्य की लय और बच्चों के उत्साह ने दर्शकों को प्रभावित किया। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विविधतापूर्ण बनाया और यह दिखाया कि विद्यार्थी धार्मिक गीतों तथा सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को कितने उत्साह के साथ सीखते और मंच पर प्रस्तुत करते हैं।

विद्यालय में आयोजित ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भारतीय लोक-संस्कृति और भक्ति परंपरा के विभिन्न रूपों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गीत और नृत्य के माध्यम से बच्चे उन सांस्कृतिक प्रतीकों को समझ पाते हैं, जो पीढ़ियों से भारतीय समाज की धार्मिक और सामाजिक पहचान का हिस्सा रहे हैं।

काली तांडव की प्रस्तुति पर तालियों से गूंज उठा सभागार

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण काली तांडव की प्रस्तुति रही। प्रतिष्ठा, सताक्षी, अद्विका, मोना, अंशिका, सृष्टि और आयुषी ने काली तांडव प्रस्तुत कर दर्शकों को प्रभावित किया। प्रस्तुति के दौरान मां काली के उग्र, शक्तिशाली और अन्याय का अंत करने वाले स्वरूप की झलक दिखाई गई। प्रस्तुति समाप्त होते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

मां दुर्गा और मां काली की उपासना भारतीय धार्मिक परंपरा में शक्ति, साहस और अधर्म के प्रतिरोध का प्रतीक मानी जाती है। नवरात्रि के अवसर पर देवी के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण इसी विचार को मजबूत करता है कि अन्याय, अहंकार और नकारात्मक शक्तियों के विरुद्ध संघर्ष आवश्यक है।

बच्चियों की इस प्रस्तुति ने दर्शकों के सामने देवी आराधना के भावनात्मक और सांस्कृतिक पक्ष को प्रभावशाली ढंग से रखा। मंच पर दिखाई गई ऊर्जा और सामूहिक तालमेल ने कार्यक्रम की भव्यता को बढ़ाया।

भक्ति गीतों ने जगाई श्रद्धा, ‘जय अंबे बोल’ को मिली सराहना

नवरात्रि और दशहरा उत्सव के दौरान भक्ति गीतों ने भी दर्शकों को भावविभोर किया। ‘ऐ गिरी नंदिनी’ की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मां दुर्गा की महिमा का गुणगान करने वाली इस प्रस्तुति के दौरान दर्शक भक्ति के भाव में डूबे दिखाई दिए।

इसके बाद ‘जय अंबे बोल’ गीत ने भी लोगों का मन मोह लिया। देवी की स्तुति से जुड़े गीतों ने आयोजन के धार्मिक स्वरूप को और अधिक प्रभावशाली बनाया। बच्चों की प्रस्तुतियों के माध्यम से मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भारतीय धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।

कनिका और गरिमा ने ‘धरती गगन में होती है तेरी जय जयकार’ गीत प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों से खूब सराहना मिली। गीत के माध्यम से देवी की महिमा और सर्वव्यापकता का भाव व्यक्त हुआ। एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उत्साह बनाए रखा और बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया।

गरबा नृत्य ने दर्शकों को झूमने पर किया मजबूर

सांस्कृतिक कार्यक्रम में गरबा नृत्य ने विशेष रंग भर दिया। कक्षा छह ‘बी’ की शालू, अनिका, वैष्णवी जायसवाल, विदिशा, लक्ष्मी, शिवानी और श्रेया ने गरबा नृत्य प्रस्तुत किया। पारंपरिक शैली और लयबद्ध गतिविधियों से सजी इस प्रस्तुति ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रस्तुति के दौरान सभागार में उत्साह का वातावरण बना रहा और दर्शक तालियों के साथ बच्चों का हौसला बढ़ाते रहे।

गरबा नृत्य नवरात्रि के उत्सव से गहराई से जुड़ा हुआ है। देवी आराधना के साथ किया जाने वाला यह पारंपरिक नृत्य सामूहिकता, उल्लास और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। विद्यालय के मंच पर बच्चों द्वारा गरबा प्रस्तुत करना इस बात का उदाहरण रहा कि शैक्षणिक संस्थान पढ़ाई के साथ भारतीय परंपराओं और लोककलाओं को आगे बढ़ाने में भी योगदान दे सकते हैं।

इस प्रस्तुति ने आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ उत्सवधर्मिता का सुंदर समन्वय स्थापित किया। दर्शकों को बच्चों की तैयारी और सामूहिक तालमेल देखने का अवसर मिला।

‘अंबे तू है जगदंबे काली’ से हुआ प्रस्तुतियों का समापन

कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुतियों में कक्षा छह ‘बी’ की कुंजल और मानसी ने ‘अंबे तू है जगदंबे काली’ गीत प्रस्तुत किया। दोनों की मनोहारी प्रस्तुति ने कार्यक्रम के भक्तिमय वातावरण को चरम पर पहुंचा दिया। मां दुर्गा की स्तुति से जुड़े इस गीत के माध्यम से देवी के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव व्यक्त हुआ।

इसके बाद प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपों में सजी बच्चियों की आरती उतारी। उन्होंने पुष्पवर्षा की और मां के सभी स्वरूपों की प्रार्थना करते हुए विश्व कल्याण की कामना की। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने भी उत्साहपूर्वक आरती में भाग लिया।

आरती के दौरान विद्यालय परिसर में श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता का वातावरण दिखाई दिया। धार्मिक अनुष्ठान ने बच्चों को यह संदेश दिया कि त्योहार केवल उत्सव और मनोरंजन का अवसर नहीं होते, बल्कि वे समाज में सद्भाव, सेवा, करुणा और सकारात्मक जीवन मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम भी हैं।

प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने दिया कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का संदेश

कार्यक्रम के समापन पर प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने विद्यार्थियों को अच्छाई के रास्ते पर चलने की सीख दी। उन्होंने नवरात्रि और दशहरा के महत्व को जीवन में नैतिकता, अनुशासन और सकारात्मक आचरण से जोड़ते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए।

उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना का उल्लेख करते हुए समस्त देशवासियों को नवरात्रि और दशहरा की शुभकामनाएं दीं। उनका संदेश था कि समाज में आपसी सद्भाव और विश्वबंधुत्व की भावना को मजबूत किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी करना चाहिए।

प्रधानाचार्य ने छात्र-छात्राओं तथा अध्यापक-अध्यापिकाओं से कहा कि वे ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाएं, आलस्य छोड़ें और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहें। उन्होंने समुचित शिक्षा और अच्छे संस्कारों के साथ राष्ट्रसेवा के लिए सदैव तत्पर रहने की प्रेरणा दी।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कर्म ही पूजा है। ज्ञान देना और ज्ञान प्राप्त करना ही शिक्षा जगत का मूल लक्ष्य होना चाहिए। सच्ची भक्ति केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह व्यक्ति के व्यवहार, जिम्मेदारी, सेवा भावना और समाज के प्रति उसके योगदान में भी दिखाई देती है।

शिक्षा, संस्कार और भारतीय संस्कृति का संदेश

जी.एम. एकेडमी में आयोजित नवरात्रि और दशहरा उत्सव ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और नैतिक शिक्षा के महत्व को एक साथ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बच्चों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि विद्यालयों में सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसी गतिविधियां उन्हें अपनी प्रतिभा पहचानने, मंच पर आत्मविश्वास के साथ बोलने और प्रस्तुति देने तथा सामूहिक जिम्मेदारी समझने का अवसर देती हैं।

दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, जबकि नवरात्रि शक्ति, साधना और आत्मविश्वास का संदेश देती है। इन पर्वों का वास्तविक महत्व तभी सार्थक होता है, जब इनके मूल्यों को जीवन में उतारा जाए। ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज में सद्भाव जैसे गुण ही त्योहारों की सीख को व्यवहार में बदलते हैं।

सलेमपुर स्थित जी.एम. एकेडमी का यह आयोजन बच्चों की सांस्कृतिक प्रतिभा को सामने लाने के साथ-साथ उन्हें भारतीय परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने का अवसर बना। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना, भक्ति गीतों, नृत्यों और सामूहिक आरती के माध्यम से विद्यालय ने शक्ति, सद्भाव, ज्ञान और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया। पूरे कार्यक्रम में बच्चों का उत्साह और शिक्षकों की सहभागिता प्रमुख रूप से दिखाई दी।

इस प्रकार जी.एम. एकेडमी में नवरात्रि और दशहरा उत्सव धार्मिक श्रद्धा, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और नैतिक शिक्षा के सुंदर संगम के रूप में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश यही रहा कि अच्छाई के मार्ग पर चलना, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना और ज्ञान के माध्यम से समाज को बेहतर बनाना ही सच्ची आस्था और सार्थक जीवन की पहचान है।

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